देहरादून: उत्तराखंड में पुष्कर सिंह धामी सरकार द्वारा उत्तराखंड मदरसा एजुकेशन बोर्ड को खत्म कर उसकी जगह उत्तराखंड स्टेट माइनॉरिटी एजुकेशन अथॉरिटी बनाए जाने के बाद मदरसों के सामने नई चुनौती खड़ी हो गई है।
नए सिस्टम के तहत राज्य के सभी 452 मदरसों को नए सिरे से मंजूरी लेनी होगी। हालांकि, अथॉरिटी के गठन के करीब एक महीने बाद अब तक सिर्फ 7 मदरसों को ही मंजूरी मिल सकी है। यानी 99 फीसदी से ज्यादा मदरसे अभी इस प्रक्रिया से बाहर हैं।
एक महीने में सिर्फ 7 मदरसों को मिली मंजूरी
1 जुलाई से स्टेट माइनॉरिटी एजुकेशन अथॉरिटी के गठन के बाद सभी मदरसों के लिए नए सिरे से मंजूरी लेना जरूरी कर दिया गया है। इसके तहत मदरसों की जांच की जा रही है और तय मानकों को पूरा करने वाले संस्थानों को ही मंजूरी दी जा रही है।
अधिकारियों के मुताबिक, कुछ मदरसों ने मंजूरी लेने से इनकार किया है, जबकि कुछ ने जांच टीम को जरूरी जानकारी उपलब्ध नहीं कराई। ऐसे में सरकार की नई व्यवस्था के दायरे में आना सभी मदरसों के लिए चुनौती बन गया है।
सरकार का दावा- बच्चों को मिलेगी आधुनिक शिक्षा
उत्तराखंड के विशेष सचिव अल्पसंख्यक कल्याण डॉ. पराग मधुकर धकाते के मुताबिक, सरकार का उद्देश्य मदरसों में पढ़ने वाले बच्चों को साइंस और मैथ्स जैसी आधुनिक शिक्षा उपलब्ध कराना है।
सरकार का कहना है कि नई व्यवस्था के जरिए शिक्षा प्रणाली में पारदर्शिता लाई जाएगी और अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों को एक समान प्रशासनिक व्यवस्था के दायरे में लाया जाएगा।
CM धामी बोले- बेहतर शिक्षा के लिए जरूरी हैं मानक
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का कहना है कि सरकार बच्चों की शिक्षा का स्तर बेहतर करने की दिशा में काम कर रही है। उनके मुताबिक, पहले कई जगहों पर एक-दो कमरों में मदरसे संचालित किए जाते थे, जहां छात्रों को स्कूलों की तरह बेहतर सुविधाएं नहीं मिल पाती थीं।
अब मदरसा चलाने के लिए अल्पसंख्यक शिक्षा अथॉरिटी और शिक्षा विभाग से मंजूरी लेना जरूरी होगा। साथ ही संस्थानों को शिक्षा विभाग द्वारा तय मानकों को भी पूरा करना होगा।
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