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दिल्ली की महिलाओं का मांग पत्र आज ईमेल के माध्यम से मुख्यमंत्री का उप राज्यपाल को भेजा गया।
प्रैस विज्ञप्ति
आज दिल्ली के विभिन्न महिला संगठनों की दिल्ली की महिलाओं का मांग पत्र मुख्यमंत्री श्री अरविंद केजरीवाल और उपराज्यपाल अनिल बैजल को सौंपा गया ।दोनों ही कार्यालयों से महिला संगठनों के प्रतिनिधियों को मिलने का समय मांगा गया परंतु जब समय नहीं दिया गया तो यह मांग पत्र ईमेल द्वारा भेजा गया । अधोहस्ताक्षरी संगठनों द्वारा जारी किए गए मांग पत्र में मांग की गई है कि:1.बेरोजगार , बेघर , आश्रय घरों इत्यादिमें रहने वाली महिलाओं को खाना लगातार मुहैया कराया जाए 2.दिल्ली में सभी जरूरतमंद परिवारों को फिलहाल दिसंबर महीने तक मुफ्त राशन दिया जाएl 3दिल्ली में सभी जरूरतमंद परिवारों की महिलाओं को ₹10000 की विशेष राहत राशि प्रदान की जाए। यह राशि प्रति माह उनके बैंक खाते में दी । जिन महिलाओं का बैंक खाता नहीं है उनका खाता बिल्कुल सरल व सहज प्रक्रिया द्वारा बैंकों द्वारा स्वयं खोला जाए। एसडीएम कार्यालय ,रिहायशी इलाकों में इसके लिए विशेष कैंप लगाए जाएं। इस खाते मेंन्यूनतम बैलेंस रखने की शर्त ना हो।लॉकडाउन की अवधि सहित करोना काल में यह आर्थिक सहायता जारी रहे।4.सभी महिला पेंशनधारकों को रुकी हुई पेंशन के साथ-साथ ₹5000 की लॉकडाउन अवधि की सहायता दी जाएदिल्ली सरकार द्वारा घोषित₹1000 की अतिरिक्त राशि सभी दिव्यांग वृद्ध विधवा एकल महिला पेंशनधारियों के खाते में अविलंब हस्तांतरित की जाए।
5.छात्राओं को विशेष अनुदान दिया जाए जिससे वे मोबाइल नेटवर्क संबंधी डाटा रिचार्ज संबंधी जरूरतों को पूरा कर सकें।6.शिक्षा के लिए जो कर्ज लिए गए हैं उन्हें माफ किया जाए। 7.छात्राओं को किताबें खरीदने के लिए विशेष अनुदान राशि दी जाए। 8.निजी स्कूलों में, व कॉलेजों को ट्यूशन फीस के अलावा दूसरी फीस ना लेने की निर्देश दिया जाए औरउसकाउल्लंघन करने की स्थिति में उन पर कारवाई की जाए।9.स्कूलों में मिड डे मील तथा स्वास्थ्य सुविधाएं जैसेआयरन टेबलेट सैनिटरी पैड्स देने के कार्यक्रम को लगातार जारी रखा जाए10.प्रत्येक मोहल्ला क्लीनिक, डिस्पेंसरी तीन शिफ्ट में चलाई जाए में विशेषज्ञों की नियुक्ति सुनिश्चित की जाए। प्रत्येक व्यक्ति को मुफ्त व् गुणवत्तापूर्ण इलाज कराया जाए। तथा कोविड-19 निशुल्क जांच यहां पर सुनिश्चित की जाए।11.सभी फ्रंटलाइन करोना कर्मियों को अविलंब पीपी ई किट दी जाए। सफाई कर्मचारियों व चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारियों को भी करोना के खिलाफ अग्रिम पंक्ति के योद्धाओं के रूप में शामिल किया जाए।सभी को समय पर तनख्वाह मिले। पर्याप्त छुट्टी मिले, काम के दौरान पर्याप्त अवकाश मिले यह सुनिश्चित किया जाए. मृत्यु की स्थिति में उनके परिवार की जिम्मेदारी सरकार उठाए। 12आशा कार्यकर्ताओं को कुशल कामगार का दर्जा दिया जाए13गर्भवती महिलाओं की सभी अस्पतालों में जांच की उचित व्यवस्था की जाए14 गर्भवती महिलाओं को मातृत्व सहायता राशि अविलंब उपलब्ध करवाई जाए बिना किसी शर्त के अभी केवल पहली प्रसूति के लिए ही यह राशि उपलब्ध है ।15गर्भवती महिलाओं को ,स्तनपान कराने वाली महिलाओं को कोविड जांच के नाम पर अस्पतालों में भटकाना बंद किया जाए.व उनके लिए यह जांच प्रसूति केंद्र पर ही उपलब्ध करवाई जाए।16बड़े निजी व कॉर्पोरेट अस्पतालों को सरकार अपने अधीन ले ताकि दिल्ली की महिलाओं को गुणवत्तापूर्ण इलाज उपलब्ध हो सके।17असहमति (dissent) के अधिकार पर प्रहार बंद करो ।18सी ए ए विरोधी प्रदर्शनकारियों को अविलंब रिहा करो। 19यूएपीए रद्द करो। 20जेल में कैदियों को स्वास्थ्य की सुरक्षा की गारंटी करो।
सभी महिला संगठनों में मांगों पर दिल्ली में विभिन्न बस्तियों में लगातार संघर्ष के कदम उठाने का निर्णय करते हुए 2 अक्टूबर को जंतर मंतर पर एक केंद्रीय कार्यक्रम करने का भी निर्णय लिया है।
जारीकर्ता
दीप्ति भारती _नेशनल फेडरेशन ऑफ इंडियन वुमन दिल्ली इकाई,
पूनम कौशिक _प्रगतिशील महिला संगठन दिल्ली,
आशा शर्मा_अखिलभारतीय जनवादी महिला समिति,
आरती__संघर्षशील महिला केंद्र,
रितु कौशिक _अखिल भारतीय सांस्कृतिक महिला संगठन,
कुसुमलता सहगल _स्वास्तिक महिला समीति ।
दिल्ली
सितंबर 21,2020
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लोकतांत्रिक भारत की आवाज़ दबाना जारी है, सरकार का घमंड पूरे देश के लिए आर्थिक संकट लाया है : राहुल गांधी
विभिन्न विपक्षी नेताओं ने केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार को निरंकुश बताते हुए आरोप लगाया है कि वह विपक्ष की आवाज़ को अलोकतांत्रिक तरीके से दबा रही है.
नई दिल्ली: किसान बिल को लेकर राज्यसभा (Rajya Sabha) में हुए हंगामे के बाद आठ विपक्षी सांसदों को निलंबित किए जाने पर सरकार को कड़ी आलोचना का सामना करना पड़ रहा है, और विभिन्न विपक्षी नेताओं ने केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार को निरंकुश बताते हुए आरोप लगाया है कि वह विपक्ष की आवाज़ को अलोकतांत्रिक तरीके से दबा रही है. कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी (Rahul Gandhi) ने कहा कि लोकतांत्रिक भारत की आवाज़ दबाना जारी है, सरकार का घमंड पूरे देश के लिए आर्थिक संकट लाया है.
राहुल गांधी ने अपने ट्वीट में लिखा, “लोकतांत्रिक भारत की आवाज़ दबाना जारी : शुरुआत में उन्हें चुप किया गया, और बाद में काले कृषि कानूनों को लेकर किसानों की चिंताओं की तरफ से मुंह फेरकर संसद में सांसदों को निलंबित किया गया… इस ‘सर्वज्ञ’ सरकार के कभी खत्म नहीं होने वाले घमंड की वजह से पूरे देश के लिए आर्थिक संकट आ गया है…”
इससे पहले, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सांसदों के निलंबन को लेकर मोदी सरकार की कड़ी आलोचना की थी. ममता बनर्जी ने अपने ट्वीट में लिखा, “किसानों के हितों की रक्षा के लिए लड़ने वाले आठ सांसदों का निलंबन दुर्भाग्यपूर्ण है, और इस निरंकुश सरकार की सोच का परिचायक है कि वह लोकतांत्रिक नियमों और सिद्धांतों का सम्मान नहीं करती… हम नहीं झुकेंगे और इस फासीवादी सरकार से संसद में और सड़कों पर लड़ेंगे…
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कृषि विधेयकों पर बोले PM मोदी- आज हंगामा कर रहे लोग ही कृषि सुधारों के सुझाव पैरों तले दबाकर बैठे थे
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को एक बार फिर बिहार में इंफ्रास्ट्रक्चर और परियोजनाओं को लेकर बड़ी घोषणाएं की हैं. इस दौरान पीएम ने संसद में पास हुए किसान विधेयक को लेकर भी अहम बातें कहीं.
नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) ने सोमवार को एक बार फिर बिहार में इंफ्रास्ट्रक्चर और विकास परियोजनाओं को लेकर बड़ी घोषणाएं की हैं. इस दौरान पीएम ने संसद में पास हुए किसान विधेयक (Farm Bills) को लेकर भी अहम बातें कहीं. पीएम ने अपने भाषण में कहा कि ‘कल देश की संसद ने, देश के किसानों को नए अधिकार देने वाले बहुत ही ऐतिहासिक कानूनों को पारित किया है. मैं देश के लोगों को, देश के किसानों, देश के उज्ज्वल भविष्य के आशावान लोगों को भी इसके लिए बहुत-बहुत बधाई देता हूं. ये सुधार 21वीं सदी के भारत की जरूरत हैं.’ पीएम ने इन विधेयकों को लेकर उठे हंगामे का जिक्र करते हुए विपक्ष पर हमला भी बोला.
उन्होंने विधेयकों पर बात करते हुए कहा कि ‘नए कृषि सुधारों ने किसान को ये आजादी दी है कि वो किसी को भी, कहीं पर भी अपनी फसल अपनी शर्तों बेच सकता है. उसे अगर मंडी में ज्यादा लाभ मिलेगा, तो वहां अपनी फसल बेचेगा. मंडी के अलावा कहीं और से ज्यादा लाभ मिल रहा होगा, तो वहां बेचने पर भी मनाही नहीं होगी.’
पीएम ने कहा कि ‘हमारे देश में अब तक उपज बिक्री की जो व्यवस्था चली आ रही थी, जो कानून थे, उसने किसानों के हाथ-पांव बांधे हुए थे. इन कानूनों की आड़ में देश में ऐसे ताकतवर गिरोह पैदा हो गए थे, जो किसानों की मजबूरी का फायदा उठा रहे थे. आखिर ये कब तक चलता रहता?’ इसे लेकर पीएम ने विपक्ष पर हमला करते हुए कहा कि अब देश अंदाजा लगा सकता है कि अचानक कुछ लोगों को जो दिक्कत होनी शुरू हुई है, वो क्यों हो रही है.
पीएम ने कृषि मंडियों के बंद होने के सवाल पर कहा कि क’ई जगह ये भी सवाल उठाया जा रहा है कि कृषि मंडियों का क्या होगा? क्या मंडियां बंद हो जाएंगी? कृषि मंडियां कतई बंद नहीं होंगी. ये कानून, ये बदलाव कृषि मंडियों के खिलाफ नहीं हैं. कृषि मंडियों में जैसे काम पहले होता था, वैसे ही अब भी होगा.’ पीएम मोदी ने बताया कि ‘किसानों के हितों की रक्षा के लिए दूसरा कानून बनाया गया है. ये ऐसा कानून है जिससे किसान के ऊपर कोई बंधन नहीं होगा. किसान के खेत की सुरक्षा, किसान को अच्छे बीज, खाद, इन सभी की जिम्मेदारी उसकी होगी, जो किसान से समझौता करेगा.’
उन्होंने MSP को लेकर उठे विवाद पर विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि ‘कृषि क्षेत्र में इन ऐतिहासिक बदलावों के बाद, इतने बड़े व्यवस्था परिवर्तन के बाद कुछ लोगों को अपने हाथ से नियंत्रण जाता हुआ दिखाई दे रहा है. इसलिए अब ये लोग MSP पर किसानों को गुमराह करने में जुटे हैं. मैं देश के प्रत्येक किसान को इस बात का भरोसा देता हूं कि MSP की व्यवस्था जैसे पहले चली आ रही थी, वैसे ही चलती रहेगी.’ पीएम ने विपक्ष के हंगामे को लेकर यह भी कहा कि ‘यही वो लोग हैं, जो कृषि क्षेत्रों में सुधारों को लेकर स्वामीनाथन समिति के सुझावों को अपने पैरों तले दबाए हुए बैठे हुए थे.’
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बिहार विधानसभा चुनाव:शिकारी आएगा,जाल बिछाएगा,दाना डालेगा,भूल से फंसना नहीं
चुनाव में बिहार के मुस्लिम समुदाय के लिए चुनौती
*शारिब जि़या रहमानी*
जदयू ने अपनी मुस्लिम फौज चुनावी मैदान में उतार दी है,इस से समझ आता है कि नीतीश कुमार कितने डरे होए हैंI मुस्लिम वोट अगर 100% जदयू से हट गया तो जदयू की सत्ता वापसी नामुमकिन है, बीजेपी से अलग नीतीश कुमार का अपना कोई वोट जनाधार नहीं है, और Covid19 पर विफलता और ग़रीब , मज़दूर के ग़ुस्से से वो परेशान हैं, जिन की घर वापसी का नीतीश ने विरोध किया था और किसी तरह आने के बाद भी सिर्फ़ जुमले बाज़ी होती रही, अब वे वापस जाने को मजबूर हैं, बेरोज़गारी मुद्दा बन जाए इस से वो परेशान हैं, सैलाब से हर साल तबाही आती है, सरकार विफल रहती है, पिछली घोषणाओं पर कोई जवाब नहीं है लकिन लुभावन जुमले बरस रहे हैं।प्रेस कॉन्फ्रेंस,पोस्टरों द्वारा नीतीश को मुसलमानों का मसीहा कहा जारहा है,हरगिज़ उन की जाल में नहीं आना है। वो तरह तरह से जुमले छोड़ेंगे, अगर इस बार इस पार्टी को वोट दे दिया तो CAA पर आप का आंदोलन, आप की जागरुकता की विशाल मुहिम बर्बाद होगी और वो समझेंगे कि मुसलमानों के साथ कुछ भी करो, वोट तो दे ही देंगे, इस बार इस रिवायत को बदलना हैI ऊर्दू को अनिवार्य विषय से हटा कर नीतीश कुमार ने उर्दू बल्कि अपने मुस्लिम विरोधी होने पर मुहर लगाई है,बार बार इस विषय पर ध्यान दिलाया जा रहा है, शिक्षा मंत्री को मेमोरेंडम दिए जा रहे हैं लेकिन नीतीश और उन के मुस्लिम चमचों पर कोई असर नहीं है, उर्दू अनुवादक और सहायक अनुवादक की परीक्षा टाल दी गई, यानी इस की घोषणा सिर्फ़ वोट लेने और चुनावी धोखे बाज़ी के लिए थी तभी तो बिहार स्टाफ़ सिलेक्शन कमिशन की वेबसाइट पर सारी चीजें अपलोड हो रही हैं लकिन अनुवादक परीक्षा पर चुप्पी हैI याद रहे जो भी जदयू का मुस्लिम चेहरा आप के पास आए या सोशल मीडिया पर गुण गान करे उससे CAA पर वोटिंग पर सवाल करें,जदयू की वजह से यह बिल Act बना हैI वे आपको बताएँगे कि बिहार सरकार ने NRC और NPR पर प्रस्ताव पारित कर दिया है कि बिहार में 2010 का NPR होगाI
याद रहे कि यह धोका है,NPR 2010 वाला हो या 2020 वाला, दोनों नागरिकता Act से जुड़े हैंI जिस के साथ NRC भी है यानी जब NPR होगा तो NRC भी होगी,जब तक उसे नागरिकता से अलग नहीं किया जाता, CAA के साथ NPR ख़तरनाक है, क्यूँ कि धर्म के नाम पर नागरिकता मिलोगी और नागरिकता धूमिल की जाएगी जो संविधान के सिद्धांत, लोकतंत्र, एकता और बराबरी के ख़िलाफ़ है और जदयू ने इसे पास कराया है।
एक और बात कि NRC लागू करने से बिहार सरकार कैसे मना कर सकती है? जदयू के मुस्लिम नेताओं के पास इसका कोई जवाब नहीं है कि NRC लागू ना करना स्टेट का संविधानिक अधिकार ही नहीं है यानी जिस का अधिकार नहीं उस पर प्रस्ताव पारित हो रहा है और जहाँ वोट ना देने का अधिकार था वहाँ (पार्लियामेंट में) जदयू बिल पारित करवाती है, मुसलमान को इतना बेवकूफ़ ना बनाएं, मुसलमानों ने बदला लेने का मन बना लिया है, मुस्लिम वोट लेकर बीजेपी की गोद में बैठ कर जो धोका नीतीश कुमार ने दिया है वो भी याद है, बिहार में जगह जगह मुस्लिमों को निशाना बनाया गया, मुस्लिम असुरक्षित हैं, नीतीश राज में माब लिंचींग बढ़ी, फुलकारी, औरंगाबाद, सीतामढ़ी सब याद हैं, इनका जवाब जदयू के मुस्लिम बहादुर नहीं दे सकते हैं लकिन सब का हिसाब मुस्लिम, वोट से लेंगे, उन्हें सब याद हैIजदयू के प्रचारकों से जवाब लेना होगा।
नीतीश कुमार की मुस्लिम और उर्दू विरोधी नीति से उनकी अस्ल छवि सामने आगई है,इस बार हर सीट पर जदयू के प्रत्याशी को हराने की नीति अपनानी होगी और महागठबंधन को उन्हीं जगह मजबूरी में वोट करना है जहां मजलिस का मज़बूत प्रत्याशी ना हो, तेजस्वी की मानसिकता को देखते हुए मजलिस का मैदान में होना अनिवार्य है लकिन मजलिस को भी 10/12 सीटों पर ही प्रत्याशी उतारना चाहिए,और बहुत मज़बूत लड़ाई चिन्हित सीटों पर होनी चाहिएI ताकि ज़्यादा सीटों पर मुस्लिम वोट के बट जाने से एनडीए को फ़ायदा भी ना हो और मुस्लिम नुमाइंदगी भी हो जाए।
किसी भी तरह जाल में नहीं आना हैI वोट देते समय दिल पर हाथ रख कर महसूस कीजिए गा कि जिस दिन आप के वोट को लात मारकर नीतीश बीजेपी के साथ गए थे तो आप को कैसा लगा था? जब जदयू पार्लियामेंट में CAA पर वोट दे रही थी तो ख़ुद को आप कैसा ठगा महसूस कर रहे थे? तीन तलाक़ बिल पर पार्लियामेंट से भाग कर बिल को वो पारित कराने में मदद कर रही थी तो आप का दिल किया कह रहा था?
हाँ आरजेडी गठबंधन से भी सवाल करते रहना है कि मुस्लिम ईशू पर पार्टी की किया पॉलिसी है? कितनी नुमाइंदगी दे रहे हो?आरजेडी में मुस्लिम लीडरशिप पनपने क्यूँ नहीं दी जाती है? वोट लेने के लिए मुस्लिम और विकास और मंत्रालय के लिए यादव? यादव ने लोकसभा चुनाव में आरजेडी को वोट नहीं दिया है, तेजस्वी इस पर चुप क्यूँ हैं? मुस्लिम इशू से उन्हें दिलचस्पी क्यूँ नहीं है? क्या मुस्लिम को वोट की मशीन और मजबूर समझ लिया है? इसलिए 10/12 मजलिस के मज़बूत उम्मीदवारों को वोट देकर आरजेडी का ग़ुरूर भी तोड़ना ज़रूरी है।
मजलिस से भी सवाल है कि तेलंगाना में 7/8 और महाराष्ट्र,उप, बिहार में पार्टी विस्तार क्यूँ? तेलंगाना की तरह बिहार में भी 7/8 पर प्रत्याशी क्यूँ नहीं उतारते? KCR की पार्टी और उस की पॉलिसी, कॉग्रेस, आरजेडी,एसपी, एनसीपी से अलग कैसे है? जो नरसिम्हा रॉ के प्रेम में गिरफ़्तार है, KCR के कमयूनल एजेंडे पर चुप्पी रहती है लकिन सारी बहादुरी और ईमानी गर्मी तेलंगाना से बाहर निकलने लगती है? KCR को कमयूनल बोलने की हिम्मत ओवैसी में क्यूँ नहीं है? तेलंगाना में दोस्त के हाथों शहीद मस्जिदों पर भी मजलिस को जवाब देना होगा।
कहना यह है कि सभी पार्टियों को आईना दिखाना है,यानी वोट देना भी है तो फ़्री में नहीं, जाग कर वोट देंगे, सिर्फ़ वोट की मशीन नहीं बनेंगे, अब तक की हमारी सियासी ग़लती यही है कि हम वोट बैंक बनते रहे, सवाल करना और हिसाब लेना नहीं सीखाI सियासत में सौदेबाज़ी और मोल भाऊ का महत्व है, जो जितना बड़ा डीलर होगा उतना बड़ा नेता समझा जाएगा, सियासत के लिए अब कोई उसूल और सिद्धांत नहीं है,आज की सियासत बेऊसुली का नाम हैI किसी भी पार्टी का कोई सिद्धांत नहीं है और ना अब कोई सिकूलर है। मुस्लिम समुदाय को भी यही रास्ता चुन्ना होगा।
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बिहार चुनाव में ओवैसी की एंट्री, आरजेडी के मुस्लिम-यादव समीकरण में लगा सकते हैं सेंध
बिहार विधानसभा चुनाव के लिए अब एआईएमआईएम और समाजवादी जनता दल डेमोक्रेटिक के बीच गठबंधन तय हो गया है. एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने इसकी जानकारी दी.
बिहार विधानसभा चुनाव के लिए राजनीतिक पार्टियां कमर कस चुकी है. इस चुनाव के लिए ऑल इंडिया मजलिस ए इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी भी पार्टी को मजबूती प्रदान कर रहे हैं. इस क्रम में अब एआईएमआईएम और समाजवादी जनता दल डेमोक्रेटिक (एसजेडीडी) के बीच गठबंधन तय हो गया है. जिससे बिहार में राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के लिए भी खतरे की घंटी बज चुकी है.
एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने जानकारी देते हुए बताया कि बिहार चुनाव के लिए एआईएमआईएम और समाजवादी जनता दल डेमोक्रेटिक के बीच गठबंधन तय हुआ है. यूडीएसए गठबंधन देवेंद्र प्रसाद यादव के नेतृत्व में चुनाव लड़ेगा. ऐसी पार्टियां, जो साम्प्रदायिकता के खिलाफ लड़ना चाहते हैं उनका स्वागत है. वहीं बिहार में यादव और मुस्लिम आरजेडी का वोट बैंक माना जाता है, ऐसे में एआईएमआईएम और एसजेडीडी के साथ आने से आरजेडी के वोट बैंक में सेंधमारी हो सकती है.
ओवैसी ने कहा कि हमारे बारे में पुराना रिकॉर्ड बताता है कि हम किसी से नहीं डरते हैं. हम चुनाव लड़ेंगे. लोकसभा में आरजेडी ने कितनी सीट जीती है. किशनगंज में अगर हमारी पार्टी नहीं खड़ी तो कांग्रेस वहां से नहीं जीत पाती. बीजेपी अगर जीत रही है तो उसकी जिम्मेदार आरजेडी है. हैदराबाद में मैंने बीजेपी को हराया, शिवसेना को हराया. महागठबंधन अब नहीं रहा.
कांग्रेस पर निशाना साधते हुए असदुद्दीन ओवैसी ने कहा कि कांग्रेस आज शिवसेना की गोद में बैठी है. कांग्रेस खुद को धर्मनिरपेक्षता का ठेकेदा समझती है. कांग्रेस की सोच सामंती है. कांग्रेस की गलत नीतियों का खामियाजा लोगों को भुगतना पड़ रहा है.बता दें कि असदुद्दीन ओवैसी पहले ही बिहार विधानसभा चुना 2020 लड़ने का ऐलान कर चुके हैं. सितंबर महीने की शुरुआत में ओवैसी की पार्टी ने बिहार चुनाव के लिए अपने उम्मीदवारों का ऐलान भी कर दिया था. एआईएमआईएम 50 सीटों पर चुनाव लड़ने का पहले ही ऐलान कर चुकी है.
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IPL 2020 आज का मुक़ाबला: चेन्नई सुपर किंग्स बनाम मुंबई इंडियंस
इंडियन प्रीमियर लीग के तेरहवें सीजन की शुरुआत मुंबई इंडियंस और चेन्नई सुपर किंग्स के बीच अबू धाबी में शाम साढ़े सात बजे से होने वाले मुक़ाबले से हो रही है.
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जम्मू-कश्मीर के लिए 1350 करोड़ के पैकेज की घोषणा –
जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने राज्य में अर्थव्यवस्था और कारोबार को मजबूती देने के लिए 1350 करोड़ रुपये के प्रोत्साहन पैकेज की घोषणा की है.
इस पैकेज की घोषणा पीएम नरेंद्र मोदी के आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत की गई है.
पैकेज के तहत औद्योगिक और वाणिज्यिक उपभोक्ताओं के लिए बिजली में एक साल के लिए फिकस्ड डिमांड चार्जेस पर 50% की छूट दी गई है.
इसके अलावा पर्यटन के कारोबार में लगे लोगों को भी आर्थिक सहायता प्रदान की जाएगी.
पैकेज के मुताबिक अच्छी कीमत और भुगतान के विकल्प के साथ पर्यटन क्षेत्र में लोगों को वित्तीय सहायता के लिए जम्मू और कश्मीर बैंक द्वारा कस्टम हेल्थ-टूरिज़्म स्कीम बनाई जाएगी. इसके अलावा कर्ज़दारों के लिए मार्च 2021 तक स्टाम्प ड्यूटी में छूट दी गई है.
हथकरघा और हस्तशिल्प उद्योगों में काम कर रहे लोगों के लिए क्रेडिट कार्ड स्कीम के तहत अधिकतम सीमा एक लाख रुपये से बढ़ाकर दो लाख रुपये कर दी गई है.
उन्हें पांच प्रतिशत की ऋण माफ़ी दी जाएगी. ये ऋण माफ़ी छोटे और बड़े दोनों कारोबारियों को मिलेगी. इस योजना में तकरीबन 950 करोड़ रुपये का खर्च आएगा. यह धनराशि अगले छह महीनों के लिए इस वित्त वर्ष में उपलब्ध रहेगी.
उपराज्पाल ने पैकेज की घोषणा करते हुए कहा, ”मैं समझता हूं कि आज तक कभी इतना बड़ा आर्थिक पैकेज नहीं बनाया गया था जिसमें वित्तीय और प्रशासनिक इकाइयों के माध्यम से कारोबारी समुदाय को राहत दी जा रही है. व्यापार होगा तो ना केवल जम्मू-कश्मीर की आम जनता को रोजगार मिलेगा बल्कि छोटे स्तर पर काम करके आजीविका चलाने वाले लोगों को भी राहत मिलेगी.”
उन्होंने कहा, ”पहला चरण है आत्मनिर्भर भारत. आज संघ राज्य क्षेत्र ने जो निर्णय किया है ये दूसरा चरण है और इससे बहुत बड़ा तीसरा चरण अभी आने वाला है. यहां की नई औद्योगिक नीति भारत सरकार ने तैयार कर ली है, मैं उम्मीद करता हूं कि जल्दी उसकी घोषणा होगी.’
सरकार ने यह भी कहा है कि बस ड्राइवर, कडंक्टर, ऑटो, टैक्सी ड्राइवर जिन्होंने अपना रोजगार खो दिया है उनकी भी मदद करने के लिए एक कार्य संरचना बनाई गई है.
यह भी निर्णय लिया गया है कि हाउस बोट मालिकों और ट्रांसपोर्टर्स को मदद दी जाए. उनके पुराने हो चुके वाहन को बदलने और इंश्योरेंस में जो भी सहायता की जा सकती है, उसे लोगों तक पहुंचाया जाएगा.
जम्मू और कश्मीर से पांच अगस्त 2019 को धारा 370 हटा दी गई थी. इसके बाद राज्य का पुनर्गठ करते हुए इसे केंद्र शासित प्रदेश बना दिया गया था.
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केंद्र की मोदी सरकार किसान विरोधी कानून को रद्द करें,पंजाब के अल्पसंख्यक किसान भाइयों के साथ है:शाही इमाम पंजाब
लुधियाना (मेराज़ आलम ब्यूरो रिपोर्ट) : आज यहां ऐतिहासिक जामा मस्जिद में जुम्मे की नमाज अदा करने से पहले अपने सप्ताहिक संबोधन में शाही इमाम पंजाब मौलाना हबीब उर रहमान सानी लुधियानवी ने केंद्र सरकार की तरफ से बनाए गए किसान विरोधी कानून की निंदा करते हुए उसे रद्द करने की मांग की है। शाही इमाम मौलाना हबीब उर रहमान लुधियानवी ने कहा कि किसान हमारे भाई हैं वह सिर्फ भारत को ही नहीं दुनिया भर के लोगों को अनाज मुहाईया करवाते हैं उनके साथ केंद्र सरकार की ओर से की जा रही मनमर्जी बर्दाश्त नही की जा सकती।
शाही इमाम ने कहा कि पंजाब के किसान जो भी रणनीति अपनाएंगे पंजाब के सभी अल्पसंख्यक उसमें उनका साथ देंगे। उन्होंने कहा कि किसानों ने हमेशा ही हक और इंसाफ के लिए आवाज उठाई है इसलिए सभी भारतीयों पर यह फर्ज है कि वह इस मुश्किल घड़ी में अपने किसान भाइयों का साथ दें शाही इमाम ने कहा कि किसानों का साथ देना कोई सियासी मामला नहीं यह किसानों कि जिन्दगी का सवाल है कयोंकि खेती ही उनका जीवन है। शाही इमाम ने कहा कि केंद्र सरकार की ओर से बनाए गए कानून से किसानों के ऊपर बाहर की कंपनियों का दबाव बढ़ जाएगा काला बाजारी बढ़ेगी इससे किसान तरक्की करने की बजाय मायूसी की तरफ चला जाएगा।
सरकार को चाहिए कि वह किसानों के साथ बैठकर बातचीत करें और किसानों के मुताबिक ही नया कानून बनाया जाऐ। शाही इमाम ने आज जामा मस्जिद लुधियाना से राज्य के सभी इमाम साहिबान और मस्जिदों के प्रधानों को अपील जारी की है कि किसान भाइयों की तरफ से किए का रहे आंदोलन में शामिल होकर हर तरफ से साथ दें। शाही इमाम ने कहा कि पंजाब के किसान सिर्फ किसान नहीं हक और सच्चाई की बुलंद आवाज भी हैं किसानों ने हमेशा ही सभी लोगों का साथ दिया इसलिए आज सब पर लाजमी है कि किसान भाइयों का साथ देकर काले कानून को रद्द करवाऐं।
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दिल्ली के सभी स्कूल 5 अक्टूबर तक बंद रहेंगे, सरकार ने आदेश जारी किया
दिल्ली में 9 से 12वीं क्लास के छात्रों के लिए आंशिक रूप से स्कूल खोलने का आदेश भी रद्द हो गया, कोरोना वायरस महामारी के चलते दिल्ली में मार्च से स्कूल बंद
नई दिल्ली: दिल्ली (Delhi) में सभी स्कूल (Schools) 5 अक्टूबर तक बंद रहेंगे. दिल्ली सरकार (Delhi Governemnt) ने इस बारे में आदेश जारी किया है. दिल्ली सरकार के इस आदेश का यह मतलब है कि 21 सितंबर से जो 9 से 12वीं क्लास के छात्रों के लिए आंशिक रूप से स्कूल खोलने की बात कही थी, वह भी रद्द कर दी गई है. अब केवल ऑनलाइन क्लास जारी रहेंगी. कोरोना वायरस महामारी के चलते दिल्ली में मार्च से स्कूल बंद हैं.
इससे पहले दिल्ली सरकार ने 5 सितंबर को दिल्ली में 30 सितंबर तक सभी स्कूलें बंद रखे जाने का आदेश जारी किया था. आदेश में कहा गया था कि ऑनलाइन पढ़ाई पहले की तरह ही जारी रहेगी. आदेश में कहा गया था कि 20 सितंबर तक छात्रों को किसी भी तरह की एक्टिविटी के लिए स्कूल ना बुलाया जाए.
सरकार ने कहा था कि 21 सितंबर से अगर 9वीं से 12वीं क्लास के छात्र अपने स्कूल जाना चाहें और टीचर की सलाह लेना चाहें तो वे अपने पेरेंट की लिखित सहमति के साथ जा सकते हैं. हालांकि अगर स्कूल और छात्र का घर कन्टेनमेंट जोन में नहीं है तो ही इजाजत होगी. लेकिन यह स्वैच्छिक होगा.
दिल्ली सरकार ने कहा था कि 21 सितंबर से स्कूल एक समय में अपने 50% टीचिंग और नॉन टीचिंग स्टाफ को ऑनलाइन पढ़ाई/ आदि के लिए बुला सकते हैं. केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय स्कूलों/छात्रों और टीचर आदि के लिए लिए स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर जारी करेगा जिसका पालन करना होगा.