नई दिल्ली, 17 जुलाई 2026: ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPLB) ने रामपुर विकास प्राधिकरण (RDA) द्वारा मौलाना मोहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय के 38 भवनों को ध्वस्त करने के लिए जारी नोटिस की कड़ी निंदा की है। बोर्ड ने इसे पक्षपातपूर्ण, प्रतिशोधात्मक और अन्यायपूर्ण कार्रवाई बताते हुए उत्तर प्रदेश सरकार से तत्काल इस कार्रवाई पर रोक लगाने और नोटिस वापस लेने की मांग की है।
‘यह सिर्फ एक विश्वविद्यालय नहीं, मुस्लिम शिक्षा पर हमला’
बोर्ड के प्रवक्ता डॉ. एस.क्यू.आर. इलियास ने जारी बयान में कहा कि यह कार्रवाई केवल एक शैक्षणिक संस्थान के खिलाफ नहीं, बल्कि मुस्लिम समुदाय की शैक्षणिक तरक्की के खिलाफ भी है। उन्होंने कहा कि एक तरफ सरकारें मुसलमानों की शैक्षणिक पिछड़ेपन को दूर करने में पर्याप्त प्रयास नहीं कर रहीं, वहीं दूसरी ओर जनता के सहयोग, कुर्बानियों और वर्षों की मेहनत से स्थापित संस्थानों को प्रशासनिक और कानूनी कार्रवाई के जरिए निशाना बनाया जा रहा है।
उन्होंने आरोप लगाया कि यह कार्रवाई समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम खान के खिलाफ राजनीतिक प्रतिशोध का हिस्सा है और इसके जरिए मुस्लिम समुदाय की शैक्षणिक प्रगति को भी कमजोर करने की कोशिश की जा रही है।
RDA के दावे को बताया गलत
डॉ. इलियास ने रामपुर विकास प्राधिकरण के उस दावे को भी खारिज किया, जिसमें कहा गया है कि विश्वविद्यालय के 40 में से 38 भवन बिना आवश्यक स्वीकृति के बनाए गए हैं।
उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय प्रशासन के अनुसार जिन भवनों पर आपत्ति जताई गई है, उनका निर्माण उस समय हुआ था जब यह क्षेत्र रामपुर विकास प्राधिकरण के अधिकार क्षेत्र में शामिल ही नहीं था। ऐसे में RDA से भवन निर्माण की अनुमति लेने की कोई कानूनी बाध्यता नहीं थी।

‘तकनीकी कमियों का समाधान बुलडोजर नहीं’
AIMPLB ने कहा कि यदि किसी प्रकार की तकनीकी या कानूनी कमी है तो उसका समाधान कानून के तहत किया जा सकता है। लेकिन वर्षों की मेहनत, भारी निवेश और जनसहयोग से बने एक विश्वविद्यालय के 38 भवनों को गिराने का आदेश न केवल असंगत और मनमाना है, बल्कि यह देश के शिक्षा हितों के भी खिलाफ है।
बोर्ड का कहना है कि ऐसी कार्रवाई केवल एक संस्थान या एक समुदाय को ही नुकसान नहीं पहुंचाएगी, बल्कि देश की शैक्षणिक संपदा को भी अपूरणीय क्षति होगी।
सरकार से फैसले पर पुनर्विचार की मांग
ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने उत्तर प्रदेश सरकार और रामपुर विकास प्राधिकरण से मांग की है कि वे इस फैसले की तत्काल समीक्षा करें, ध्वस्तीकरण का नोटिस वापस लें और यदि कोई कानूनी या तकनीकी विवाद है तो उसका समाधान बातचीत और विधिक प्रक्रिया के माध्यम से करें। साथ ही विश्वविद्यालय जैसे महत्वपूर्ण शैक्षणिक संस्थान की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।
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