सहारनपुर: कलेक्ट्रेट परिसर में स्थित 115 साल पुरानी मस्जिद पर बुलडोजर कार्रवाई पर जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी ने सवाल उठाए हैं। उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट में इस कार्रवाई को अफसोसजनक बताते हुए कहा कि इससे संविधान, कानून के शासन और धार्मिक स्वतंत्रता को लेकर गंभीर सवाल खड़े होते हैं।
मौलाना मदनी ने कहा कि अगर संविधान और कानून सभी के लिए समान हैं, तो उनके लागू होने में दोहरा मापदंड क्यों दिखाई देता है? उन्होंने आरोप लगाया कि आज ‘बुलडोजर न्याय’ बदले, भेदभाव और नफरत की राजनीति का माध्यम बनता जा रहा है।
1991 के कानून और वक्फ कानून का हवाला
अरशद मदनी ने कहा कि 1991 का Places of Worship Act अभी भी लागू है। उन्होंने नए वक्फ कानून में ‘वक्फ बाई यूजर’ के प्रावधान का भी जिक्र किया।
उनका दावा है कि संबंधित मस्जिद वक्फ बोर्ड में 451 नंबर से दर्ज है। वहीं, जमीन के पुराने रिकॉर्ड में याकूब खान और वहीद खान के नाम दर्ज होने की बात कही गई है।
मदनी के मुताबिक, मस्जिद कमेटी ने अदालत में 1911 से संबंधित दस्तावेज, नगरपालिका रिकॉर्ड और पुराने राजस्व अभिलेख पेश कर अपना पक्ष रखा था। उनका कहना है कि ऐसे ऐतिहासिक और कानूनी दस्तावेजों को नजरअंदाज कर ध्वस्तीकरण की कार्रवाई किए जाने से न्याय के सिद्धांतों पर सवाल उठते हैं।
‘कार्रवाई का मापदंड सभी के लिए समान हो’
मौलाना मदनी ने कहा कि अगर अवैध कब्जा या अतिक्रमण कार्रवाई का आधार है, तो यही मापदंड हर धर्म और हर वर्ग के लिए समान रूप से लागू होना चाहिए।
उन्होंने सवाल उठाया कि देश के अलग-अलग हिस्सों में सरकारी जमीन, सड़क और सार्वजनिक स्थानों पर लंबे समय से मौजूद दूसरे धार्मिक निर्माणों के खिलाफ क्या प्रशासन इसी तरह सख्ती और तेजी से कार्रवाई करता है? अगर ऐसा नहीं है तो किसी एक धार्मिक स्थल के खिलाफ असाधारण सख्ती समान न्याय के सिद्धांत के विपरीत है।
‘भारत सभी धर्मों का साझा वतन’
अरशद मदनी ने कहा कि भारत किसी एक धर्म या वर्ग का देश नहीं है, बल्कि हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई और सभी धर्मों को मानने वालों का साझा वतन है। संविधान ने किसी को प्रथम और किसी को दूसरे दर्जे का नागरिक नहीं बनाया है।
उन्होंने कहा कि मुस्लिम समुदाय किसी विशेष रियायत की मांग नहीं कर रहा, बल्कि केवल समान न्याय चाहता है।
मदनी ने सवाल उठाते हुए कहा, “जो कानून मस्जिद के लिए है, वही हर धार्मिक स्थल के लिए क्यों नहीं? जो मापदंड मुसलमान के लिए है, वही दूसरे नागरिक के लिए क्यों नहीं?” उन्होंने कहा कि अगर संविधान और कानून सभी के लिए हैं तो उनका संरक्षण और उनका पालन भी सभी के लिए समान होना चाहिए।
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