आजमगढ़: समाजवादी पार्टी (सपा) के वरिष्ठ विधायक और उत्तर प्रदेश की सियासत की एक सम्मानित शख्सियत आलमबदी आजमी का बुधवार (22 जुलाई) को 90 वर्ष की उम्र में इंतकाल हो गया। वह लंबे समय से बीमार चल रहे थे। उन्होंने आजमगढ़ स्थित अपने आवास पर अंतिम सांस ली। उनके इंतकाल की खबर से समर्थकों, समाजवादी कार्यकर्ताओं और राजनीतिक जगत में शोक की लहर दौड़ गई। परिवार की ओर से बताया गया कि उनका जनाज़ा गुरुवार शाम 4 बजे जामियातुर रशाद में अदा किया जाएगा, जिसके बाद उन्हें सुपुर्द-ए-खाक किया जाएगा।
लंबे समय से चल रहे थे बीमार
आलमबदी आजमी पिछले कई महीनों से अस्वस्थ थे। 13 अप्रैल 2026 को तबीयत बिगड़ने पर उन्हें लखनऊ के मेदांता अस्पताल में भर्ती कराया गया था। मई, जून और जुलाई के दौरान उनका इलाज लगातार चलता रहा। कुछ दिन पहले उन्हें अस्पताल से छुट्टी मिली थी, लेकिन स्वास्थ्य में अपेक्षित सुधार नहीं हो सका और बुधवार देर शाम उनका इंतकाल हो गया।
पांच बार विधायक बने, अवाम का भरोसा लगातार जीता
16 मार्च 1936 को आजमगढ़ में जन्मे आलमबदी आजमी ने अपने लंबे राजनीतिक जीवन में जनता का विश्वास लगातार हासिल किया। वह आजमगढ़ की निजामाबाद विधानसभा सीट से पांच बार विधायक चुने गए। 1996 से 2007 तक लगातार इस सीट का प्रतिनिधित्व किया और चुनाव में अंगद यादव को हराया। बाद में जनता ने एक बार फिर उन पर भरोसा जताया और वह पांचवीं बार भी विधायक बने। उन्हें उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी के सबसे उम्रदराज विधायकों में गिना जाता था।
सादगी ही थी उनकी सबसे बड़ी पहचान
आलमबदी आजमी अपनी सादगी, ईमानदारी और गांधीवादी सोच के लिए जाने जाते थे। वह आज भी साधारण की-पैड वाला मोबाइल फोन इस्तेमाल करते थे। कुछ महीने पहले स्कूटी से विधानसभा पहुंचने की उनकी तस्वीरें काफी चर्चा में रही थीं।
इतना ही नहीं, वह लगभग 30 रुपये प्रति मीटर वाले कपड़े से बने साधारण लिबास पहनते थे, जो अंबेडकरनगर की टांडा मिल में तैयार होता था। उनके लिए दिखावे से ज्यादा सादगी और जनता के बीच रहना मायने रखता था।
मुलायम सिंह को लौटा दिए थे चुनाव खर्च के पैसे
उनकी ईमानदारी का एक चर्चित किस्सा आज भी लोगों के बीच याद किया जाता है। वर्ष 1996 के विधानसभा चुनाव के दौरान समाजवादी पार्टी के संस्थापक मुलायम सिंह यादव ने चुनाव खर्च के लिए उन्हें पांच लाख रुपये भेजे थे। लेकिन आलमबदी आजमी ने वह रकम लेने से इनकार कर दिया। वह स्वयं लखनऊ पहुंचे और पूरी राशि मुलायम सिंह यादव को लौटाते हुए कहा कि उन्हें चुनाव लड़ने के लिए इस धन की आवश्यकता नहीं है। इस घटना को उनकी साफगोई और उसूलों पर अडिग रहने की मिसाल माना जाता है।
इंजीनियरिंग की पढ़ाई की, बड़ा परिवार छोड़ गए
आलमबदी आजमी ने 1953 में गोरखपुर के इस्लामिया कॉलेज से इंटरमीडिएट की पढ़ाई पूरी की। इसके बाद 1956 में गोरखपुर के टेक्निकल इंस्टीट्यूट से इलेक्ट्रिकल एंड मैकेनिकल इंजियरिंग में डिप्लोमा हासिल किया।
अपने पीछे वह एक बड़ा परिवार छोड़ गए हैं। उनके छह बच्चे हैं। उनके निधन को उत्तर प्रदेश की राजनीति में सादगी, ईमानदारी और जनसेवा के एक महत्वपूर्ण अध्याय का अंत माना जा रहा है।
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