देवबंद के बच्चे कोरोना काल में कर रहे हैं गरीबों की मदद

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नई दिल्ली (मिल्लत टाइम्स):यूपी के सहारनपुर में (Abna-e-Madaris Welfare Educational Trust, Deoband Alummi Fedratiin) के प्रेसिडेंट में मेंहदी हसन ऐनी क़ासमी, ने 25 अप्रैल को कोरोना महामारी के बढ़ते, और लोगों में मिस इन्फॉर्मेशन के अभाव को लेकर (covid relief emergency force) नाम की एक फ़ोर्स बनाई। हालांकि जब उन्होंने इसकी शरुआत की तब वो अकेले ही थे। लेकिन आज उनकी फ़ोर्स में 8 से ज्यादा डॉक्टर और 50 वॉलिंटियर्स की एक पूरी टीम बन गयी है। जो कि इस कोरोना काल में लोगों की मदद कर रही है। उन्होंने लोगो की काउंसिलिंग और हेल्प के लिए के (covid help desk deoband) खोल रखा है, उनका यह डेस्क 24 घंटे लोगों की मदद में खुला रहता है। वह बिना किसी भेद भाव के सभी धर्मों के लोगों की मदद कर रहे हैं चाहें वो हिंदू हों, मुसलमान, सिख, या फिर ईसाई उनकी यह टीम सभी धर्मों के लिए निष्पक्ष होकर उनकी मदद कर रही है। मेंहदी ने मिल्लत टाइम्स से अपनी बातचीत में बताया कि जब उन्होंने इस काम की शुरुआत की तब कोई भी उनके पास नहीं था, क्योंकि वो मदरसे से ताअल्लुक़ रखते हैं और इस वक़्त सभी मदरसे बन्द हैं, और कोई भी उनकी इस मुहिम में शामिल नहीं था। वो कहते हैं ना कि जब नियत साफ हो तो मंज़िल तक पहुंचने में लोग जुड़ ही जाते हैं। और इस तरह से उनके इस काम में देवबंद मदरसे के बच्चे और लोग जुड़ते गए।
देवबंद मदरसा से ताल्लुक रखने वाले मेंहदी की टीम जगह- जगह जाकर लोगों में, कोरोना में कैसे एहतियात बरतना है, इसके बारे में बताती है साथ ही वैक्सीनेशन को लेकर लोगों में जागरूकता अभियान भी चला रही है। उन्होंने अपनी बातचीत में आगे बताया कि वो लोगों की मदद किस तरह करते है?
हसन बताते हैं कि उन्होंने सोशल मीडिया पर बाक़ायदा लोगों को काम में लगा रखा है व्हाट्सएप ग्रुप बनाये हुए हैं जहां पर लोग उनको मैसेज और कॉल कर अपनी समस्याओं को बताते हैं। और उनकी टीम उसी हिसाब से लोगों की मदद करती है। अगर कोई मरीज़ उन तक नहीं पहुंच पा रहा है, तो यह खुद चलकर उनकी मदद करने लोगों के घर तक जाते हैं। किसी को दवाइयों की ज़रूरत है, तो किसी को बेड की ,किसी को ऑक्सीजन की ज़रूरत है, तो किसी को एम्बुलेंस की , तो किसी को प्लाज़्मा की।

देवबंद से फारिक हर तरह से लोगों की मदद में तात्पर्य हैं। उन्होंने बताया कि एक दिन के अंदर कम से कम उनको 300 के आस पास मैसेज और कॉल आते हैं।जिसमें से उनकी टीम अमूमन 50 लोगों की मदद करने में कामयाब होती है। लोग हेल्प डेस्क पर कोरोना से जुडी सभी जानकारियों को जान सकते हैं, फ्री में दवाइयां ले सकते हैं, ऑक्सीजन सिलेंडर के लिए बुकिंग कर सकते हैं उनकी टीम फ्री ऑफ कॉस्ट लोगों की काउंसिलिंग करती है। अगर किसी को हॉस्पिटल पहुंचाना है,तो वो भी ये लोग करते हैं। जो लोग होम iasolate हैं उन तक मेडिकल की सभी जरूरतों को घर बैठे प्रोवाइड कराते हैं।


यहां तक कि उनकी टीम ने उन लोगों के लिए भी काम किया जो कोविड की वजह से अलविदा कह गए , जिनके परिवारों में कोई कमाने वाला नहीं है। उनके परिवारों की पूरी जिम्मेदारी ली खाने से लेकर बीमारी के इलाज तक ।
हसन ने अपनी बातचीत में आगे बताया कि उनकी टीम शहर से लेकर सहारनपुर के छोटे- छोटे गांव में तक अपनी मदद पहुंचा रही है। हालांकि उनको इसमें काफी दिक्कतें आ रहीं हैं, क्योंकि शहर में लोगों की मदद करना आसान होता है लेकिन गांव में जाकर मदद करना थोड़ा मुश्किल होता है। लेकिन फिर भी उनकी टीम वहां तक जाती है और मदद करती है। वो लोगों में ज्यादा से ज्यादा प्लांट लगाने पर भी जोर दे रहे हैं, और लोगों को प्लांट भी दे रहे हैं ताकि आपने आस- पास हरियाली को बढाएं। कल भी उनके पास ब्लैक फंगस के भी 2 मरीज़ आए थे। उनको भी इनकी टीमने मेडिकल कॉलेज करनाल और एम्स ऋषिकेश में एडमिट कराया है,

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