मिल्लत टाइम्स,नई दिल्ली:ईवीएम से वीवीपैट की मिलान संख्या 50 फीसदी तक बढ़ाए जाने पर चुनाव के परिणाम मेंदेरी होगी। 21 विपक्षी पार्टियों ने इसे लेकर शनिवार को सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दायर किया। उन्होंने कहा कि हमें परिणाम में देरी मंजूर है, इससे देश केचुनावी प्रक्रिया में निष्पक्षता आएगी।
विपक्ष का दावा- परिणाम में केवल छह दिनों की देरी होगी
चुनाव आयोग के हलफनामे के जवाब में विपक्ष ने सुप्रीम कोर्ट में दावा किया कि वीवीपैट पर्ची का मिलान 50 फीसदी बढ़ाने से चुनावी परिणाम औसतन छह दिन लेट होगा।
आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने कहा, ”आमजन का हित देखते हुए 21 अलग-अलग पार्टियों के प्रमुखों द्वारा यह याचिका दाखिल की गई। वे देश के 70-75 फीसदी लोगों का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं।”
याचिकाकर्ताओं में मुख्यमंत्री नायडू के साथ केसी वेणुगोपाल, मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, सपा नेता अखिलेश यादव, राकांपा नेता शरद पवार, नेशनल कॉन्फ्रेंस फारूक अब्दुल्ला, टीएमसी नेता डेरेक ओ ब्रायन, लोजद नेता शरद यादव, रालोद नेता अजीत सिंह, दानिश अली और राजद नेता मनोज झा शामिल हैं।
वीवीपैट को लेकर भारतीय सांख्यिकी संस्थान (आईएसआई) द्वारा किए गए अध्ययन से विपक्ष आश्वस्त नहीं था। आईएसआई के अध्ययन में 13.5 लाख ईवीएम में 479 वीवीपैट पर्चियों का मिलान किया गया। इसमें 99.99 फीसदी परिणाम सटीक आया।
विपक्ष इस पर असहमत है। उनके मुताबिक पूरे भारत के 543 निर्वाचन क्षेत्रों में लोकसभा का चुनाव हो रहा है। पूरी चुनावी प्रक्रिया को सत्यापित करने के लिए 479 चयनित वीवीपैट पर्याप्त नहीं है। यह अध्ययन काफी छोटा है।
(इनपुट भास्कर)
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