पटना: तथ्य बताते हैं कि बड़े आयोजनों पर रोक की घोषणा के बाद मरकज निजामुद्दीन ने अपने धार्मिक आयोजन को जिसमें देश – विदेश के सैकड़ों लोग शामिल थे , स्थगित कर सरकार से बार बार आग्रह किया कि वहां मौजूद लोगों को उनके घर भेजने के लिए गाड़ियों को परमिशन दिया जाए.
लॉकडाउन की घोषणा के बाद संस्था ने प्रशासन को अपने यहां फंसे लोगों की सूचना दी और SDO ने जाकर जांच पड़ताल भी की . वहां कुछ लोग कोरोना पीड़ित हुए और उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया जो प्रशासन की जानकारी और सहयोग से हुआ. लेकिन अब दो दिनों से मीडिया में जिस तरह इस पूरे मामले को पेश किया जा रहा है और सरकार जो एफआईआर करने की बात कर रही है वह एक साजिश है , प्रवासी मजदूरों में सरकार की संवेदनहीनता के खिलाफ उभरते गुस्से को मुसलमानों की तरफ मोड़ देने की.
Meena Tiwari
सेंट्रल कमेटी मेम्बर भाकपा-माले
राष्ट्रीय महासचिव AIPWA
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