मॉब लिंचिंग पर पूर्व IAS नियाज खान का बयान, मुसलमानों को दी कुर्ता-टोपी छोड़ने की सलाह

Millat Times Staff

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10 July 2026 (Publish: 02:04 PM IST)

मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल से पूर्व आईएएस अधिकारी नियाज खान का एक बयान सामने आया है, जिसने मुसलमानों के पहनावे, पहचान और मॉब लिंचिंग को लेकर नई बहस छेड़ दी है। नियाज खान ने भारत के मुसलमानों को अपना लिबास और हुलिया बदलने की सलाह दी है। उनके इस बयान पर मुस्लिम स्कॉलर तौकीर निजामी, कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद और बीजेपी सांसद आलोक शर्मा की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं।

पूर्व IAS नियाज खान ने क्या कहा?

मध्य प्रदेश कैडर के पूर्व आईएएस अधिकारी और लेखक नियाज खान ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में लिखा कि भारत में मॉब लिंचिंग की जिन घटनाओं में मुसलमान शिकार हुए, उनमें अधिकांश लोग कुर्ता, पायजामा, दाढ़ी और टोपी पहने हुए थे। उनका दावा है कि इसी पहनावे की वजह से उनकी पहचान आसानी से हो जाती है।उन्होंने आगे कहा कि अगर मुसलमान ऐसी घटनाओं से बचना चाहते हैं तो उन्हें अपना लिबास और हुलिया बदल लेना चाहिए।

‘तुर्की के मुसलमानों जैसा पहनावा अपनाएं’

नियाज खान ने अपनी पोस्ट में सुझाव दिया कि भारत के मुसलमान तुर्की के मुसलमानों की तरह कपड़े पहनें, ताकि उनकी पहचान आसानी से न हो सके और वे सुरक्षित रह सकें।

गौ-रक्षा, शाकाहार और धर्म परिवर्तन पर भी रखी राय

नियाज खान ने एक अन्य पोस्ट में कहा कि मुस्लिम समाज को गौ-रक्षा में भी भागीदारी करनी चाहिए और जबरन धर्म परिवर्तन का विरोध करना चाहिए। उन्होंने लिखा कि इस्लाम में किसी का धर्म जबरन बदलवाने की अनुमति नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि यदि मुसलमान स्वेच्छा से शाकाहार अपनाएं तो यह एक अच्छा प्रयास होगा, हालांकि किसी को शाकाहारी बनने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता। नियाज खान के अनुसार, कई मुस्लिम परिवार पहले से ही गायों का पालन-पोषण करते हैं और गौ-रक्षा में योगदान दे रहे हैं।

पूर्व आईएएस अधिकारी ने अपने पोस्ट में यह भी लिखा कि मुस्लिम समाज को ब्राह्मणों के साथ मधुर संबंध रखने चाहिए। उन्होंने ब्राह्मण समाज के इतिहास और देश के विकास में उसकी भूमिका की सराहना करते हुए कहा कि यह किसी राजनीतिक उद्देश्य से किया गया ट्वीट नहीं है, बल्कि उनके व्यक्तिगत विचार हैं।

आरिफ मसूद बोले– हर नागरिक को अपनी पसंद के कपड़े पहनने का अधिकार

कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद ने कहा कि भारत का संविधान हर नागरिक को अपनी पसंद के कपड़े पहनने की आजादी देता है। उन्होंने कहा कि किसी भी व्यक्ति को उसके पहनावे के आधार पर निशाना बनाना गलत है। आरिफ मसूद ने यह भी कहा कि उनके अनुसार देश में भीड़ की हिंसा की कई घटनाओं में लोगों की पहचान के आधार पर हमले किए गए हैं।

तौकीर निजामी ने जताई कड़ी आपत्ति

पूर्व आईएएस के बयान पर मुस्लिम स्कॉलर तौकीर निजामी ने कड़ा विरोध जताया। उन्होंने कहा कि नियाज खान पहले यह बताएं कि क्या उन्होंने खुद अपने परिवार या बच्चों को पश्चिमी देशों की तरह पहनावा अपनाने की सलाह दी है। तौकीर निजामी ने कहा कि मुसलमानों ने कभी अपनी पहचान नहीं छिपाई है और न ही भविष्य में छिपाएंगे। उनके मुताबिक, इस्लामी पहचान और पहनावा उनकी धार्मिक परंपरा का हिस्सा है और वे इसे नहीं छोड़ेंगे।

बीजेपी सांसद आलोक शर्मा ने किया समर्थन

भोपाल से बीजेपी सांसद आलोक शर्मा ने नियाज खान के बयान का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि वह नियाज खान के विचारों का स्वागत करते हैं और उनके बयान से सहमत हैं।पूर्व आईएएस के इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर भी बहस तेज हो गई है। एक पक्ष इसे सुरक्षा के नजरिए से दी गई सलाह बता रहा है, जबकि दूसरा पक्ष इसे धार्मिक पहचान और व्यक्तिगत स्वतंत्रता से जुड़ा मुद्दा मानते हुए विरोध जता रहा है।

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