अनवर हुसैन/मिल्लत टाइम्स,झारखंड: हजारीबाग कुछ दिन पूर्व केंद्रीय नागर विमानन राज्य मंत्री सह हज़ारीबाग सांसद जयंत सिन्हा को उनके संसदीय क्षेत्र हज़ारीबाग की निवासी रीमा मरांडी की ओर से एक आवेदन प्राप्त हुआ था।
आवेदन में रीमा मरांडी द्वारा बताया गया था कि उनकी माँ श्रीमती सिलविया पाउल को एक एजेंट द्वारा पासपोर्ट बनवाकर सऊदी अरब के जेद्दाह शहर में घरेलू काम करने के लिये अप्रैल 2015 में भेजा गया था जो अब वहां फंस चुकी हैं और उनके मालिक के द्वारा उनको परेशान किया जा रहा है। साथ ही उनका पासपोर्ट ज़ब्त कर लिया गया है और पिछले एक साल से उन्हें वेतन भी नहीं दिया गया है। वह भारत वापस आना चाहती हैं लेकिन पासपोर्ट के अभाव में उनके लिये यह मुमकिन नहीं हो पा रहा है। वह वहां की पुलिस से भी संपर्क नहीं कर पा रही हैं।इस विषय में जयंत सिन्हा ने विदेश मंत्री सुषमा स्वराज से बात कर उनसे मामले की गंभीरता को देखते हुए इस पर शीघ्र ही ठोस कदम उठाने व सऊदी अरब स्थित भारतीय दूतावास को सिलविया पाउल जी को जल्द से जल्द भारत वापस भिजवाने का निर्देश देने हेतु आग्रह किया था।
इस मामले की प्रगति पर प्रति सप्ताह जयंत सिन्हा समीक्षा कर जेद्दाह के कार्यालय से संपर्क बनाये हुए हैं।
यह निष्ठा अब रंग ला रही है। काउंसल जनरल, जेद्दाह के कार्यालय ने सिलविया पाउल से संपर्क स्थापित कर लिया है। साथ ही उनके मालिक की पत्नी से भी बात हुई जिन्होंने यह आश्वासन दिया है कि सिलविया पाउल को एक माह के भीतर उनका वीज़ा व बकाया वेतन प्राप्त हो जाएगा जिसके उपरांत वे भारत वापस आ सकेंगी।
साथ ही काउंसिल जनरल का कार्यालय अपने एक सदस्य को सिलविया का हाल चाल जानने भेज रहा है। वह यह भी सुनिश्चित कर रहे हैं कि उन्हें किसी भी प्रकार की कठिनाई का सामना नहीं करना पड़े। साथ ही बताया कि उनके मालिक से मिलकर उन्हें शीघ्र भारत वापस भेजने का प्रबंध किया जा रहा है।
कुछ माह पूर्व भी सऊदी अरब से भारतीय मज़दूरों द्वारा फोन कर यह बताया गया था कि उन्हें यहां बंधक बनाकर रखा गया है। इस मामले में सुषमा स्वराज और जयंत सिन्हा के समन्वय और प्रयासों से 32 मज़दूरों की वतन वापसी हुई थी।
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