गुजरात हाईकोर्ट ने 2008 के अहमदाबाद सीरियल ब्लास्ट मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए विशेष अदालत के 2022 के फैसले को बरकरार रखा है। मंगलवार (7 जुलाई) को हाईकोर्ट ने 38 दोषियों को दी गई फांसी की सजा और 11 दोषियों को सुनाई गई उम्रकैद की सजा को कायम रखा।
फैसले की विस्तृत प्रति अभी जारी नहीं हुई है। इससे पहले वर्ष 2022 में राज्य सरकार ने विशेष अदालत द्वारा सुनाई गई मृत्युदंड की पुष्टि के लिए हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी।
2022 में 49 आरोपी ठहराए गए थे दोषी
विशेष अदालत ने 8 फरवरी 2022 को कुल 78 आरोपियों में से 49 को दोषी ठहराया था। इन पर हत्या, राजद्रोह, राज्य के खिलाफ युद्ध छेड़ने, गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) और विस्फोटक पदार्थ अधिनियम समेत विभिन्न धाराओं के तहत आरोप साबित हुए थे। इसके बाद विशेष अदालत ने 38 दोषियों को फांसी और 11 दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी।
पीड़ितों को मुआवजे का भी दिया था आदेश
विशेष अदालत ने विस्फोट में मारे गए प्रत्येक व्यक्ति के परिजनों को एक लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया था। इसके अलावा गंभीर रूप से घायल प्रत्येक पीड़ित को 50 हजार रुपये और मामूली रूप से घायल लोगों को 25 हजार रुपये मुआवजा देने का निर्देश दिया गया था। अदालत ने दोषियों पर 2.85 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया था।
अपने 2022 के फैसले में विशेष अदालत ने कहा था कि कई आरोपी उच्च शिक्षित थे और उनमें डॉक्टर, प्रोफेसर तथा कंप्यूटर विशेषज्ञ भी शामिल थे। अदालत ने यह भी कहा था कि कुछ आरोपियों के खिलाफ अन्य राज्यों में भी मामले लंबित हैं।
26 जुलाई 2008 को हुए थे सिलसिलेवार धमाके
26 जुलाई 2008 को अहमदाबाद में सिलसिलेवार बम धमाके हुए थे। धमाके राज्य सरकार के सिविल अस्पताल, एलजी अस्पताल, बसों, साइकिलों, कारों और शहर के कई अन्य स्थानों पर किए गए थे। इन धमाकों में 56 लोगों की मौत हुई थी, जबकि बड़ी संख्या में लोग घायल हुए थे। यह देश के सबसे बड़े हमलों में से एक माना जाता है। अब गुजरात हाईकोर्ट ने विशेष अदालत के फैसले को बरकरार रखते हुए सभी 38 दोषियों की फांसी और 11 दोषियों की उम्रकैद की सजा को कायम रखा है।
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