दिल्ली में GPA से प्रॉपर्टी की खरीद-बिक्री पर बड़ा बदलाव, जानिए नए नियम
दिल्ली की अनाधिकृत कॉलोनियों में अब जनरल पावर ऑफ अटॉर्नी (GPA) के आधार पर मकान, दुकान या अन्य संपत्तियों की रजिस्ट्री पहले की तरह नहीं हो सकेगी। दिल्ली सरकार ने स्टांप ड्यूटी चोरी, फर्जीवाड़े और भू-माफियाओं पर रोक लगाने के लिए सख्त नियम लागू किए हैं। अब ब्लड रिलेशन (रक्त संबंधियों) को छोड़कर अन्य लोगों के पक्ष में GPA के जरिए संपत्ति का पंजीकरण सीधे नहीं किया जाएगा।
अब ऐसे सभी मामलों में दस्तावेजों की जांच होगी और उन्हें कलेक्टर ऑफ स्टांप के पास भेजना अनिवार्य होगा। सरकार का कहना है कि इससे राजस्व की चोरी रुकेगी और संपत्ति के लेनदेन में पारदर्शिता आएगी।
अब क्यों बदले गए नियम?
अब तक अनाधिकृत कॉलोनियों में 25 लाख से लेकर 40-50 लाख रुपये तक की संपत्तियों की खरीद-बिक्री अक्सर GPA के जरिए होती थी। इससे खरीदार और विक्रेता दोनों रजिस्ट्री पर लगने वाली 8-10 फीसदी स्टांप ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन शुल्क से बच जाते थे।
सरकार का कहना है कि इस व्यवस्था का बड़े पैमाने पर दुरुपयोग हो रहा था। इसलिए अब केवल माता-पिता, पति-पत्नी, बेटा, बेटी, भाई और बहन जैसे रक्त संबंधियों के अलावा किसी अन्य व्यक्ति के पक्ष में GPA का पंजीकरण सीधे नहीं होगा।
सब-रजिस्ट्रार को करनी होगी सख्त जांच
नई व्यवस्था के तहत दिल्ली के सभी सब-रजिस्ट्रार हर GPA दस्तावेज की विस्तार से जांच करेंगे। यदि दस्तावेज में संपत्ति के वास्तविक हस्तांतरण या बिक्री के संकेत मिलते हैं, तो मामला कलेक्टर ऑफ स्टांप के पास भेजा जाएगा।
कलेक्टर ऑफ स्टांप यह तय करेंगे कि दस्तावेज केवल सामान्य पावर ऑफ अटॉर्नी है या वास्तव में उसे बिक्री पत्र (Sale Deed/Conveyance Deed) माना जाएगा। उसी के अनुसार स्टांप ड्यूटी तय होगी।
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा है कि कलेक्टर ऑफ स्टांप को ऐसे मामलों का निपटारा 30 दिनों के भीतर करना होगा। विशेष परिस्थितियों में यह अवधि अधिकतम तीन महीने तक बढ़ाई जा सकती है।
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि कोई सब-रजिस्ट्रार नियमों का उल्लंघन करते हुए बिना कलेक्टर ऑफ स्टांप की अनुमति के GPA का पंजीकरण करता है, तो उसके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
क्या है PM-UDAY योजना?
दिल्ली की नोटिफाइड अनधिकृत कॉलोनियों के लोगों को उनकी संपत्तियों पर कानूनी मालिकाना हक देने के लिए केंद्र सरकार ने वर्ष 2019 में PM-UDAY (Pradhan Mantri Unauthorised Colonies in Delhi Awas Adhikar Yojana) शुरू की थी।
इस योजना के तहत पात्र लोगों को कन्वेयंस डीड (Conveyance Deed) या ऑथराइजेशन स्लिप (Authorization Slip) जारी की जाती है। इसके बाद संपत्ति का मालिक उसे कानूनी रूप से बेच सकता है, दूसरे के नाम ट्रांसफर कर सकता है और उस पर बैंक से होम लोन या मॉर्गेज लोन भी ले सकता है।
PM-UDAY योजना में आवेदन कैसे करें?
PM-UDAY योजना की पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन और पारदर्शी बनाई गई है।
सबसे पहले आवेदक को PM-UDAY पोर्टल पर पंजीकरण करना होता है। इसके बाद DDA द्वारा अधिकृत एजेंसी से संपत्ति का GIS सर्वे कराया जाता है। सर्वे पूरा होने के बाद पुराने दस्तावेज जैसे GPA, एग्रीमेंट टू सेल, पजेशन लेटर, बिजली बिल, आधार और पैन कार्ड पोर्टल पर अपलोड किए जाते हैं।
इसके बाद DDA दस्तावेजों की जांच और मौके पर फिजिकल वेरिफिकेशन करता है। सभी औपचारिकताएं पूरी होने पर शुल्क जमा करने के बाद कन्वेयंस डीड या ऑथराइजेशन स्लिप जारी की जाती है।
इसके बाद सबसे अहम प्रक्रिया यह है कि DDA से डीड मिलने के तीन महीने के भीतर उसे सब-रजिस्ट्रार कार्यालय में रजिस्टर कराना अनिवार्य है। यदि ऐसा नहीं किया जाता, तो डीड अमान्य (Invalid) हो सकती है।
तीन किस्तों में भुगतान की सुविधा
PM-UDAY योजना के तहत मालिकाना हक पाने के लिए शुल्क संपत्ति के क्षेत्रफल और संबंधित इलाके के सर्किल रेट के आधार पर तय किया जाता है। 100 वर्ग मीटर से छोटे मकानों के लिए शुल्क अपेक्षाकृत कम रखा गया है।
लोगों को राहत देने के लिए DDA ने शुल्क तीन समान किस्तों में जमा करने की सुविधा भी दी है। दो किस्तें जमा करने पर अस्थायी (प्रोविजनल) अधिकार मिल जाते हैं, जबकि पूरी राशि जमा होने के बाद स्थायी मालिकाना हक प्रदान किया जाता है।
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