नई दिल्ली, छत्तीसगढ़ में आयोजित धर्मसंसद 2021 में संत कालीचरण ने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को लेकर विवादित बयान दिया था। इसको लेकर उठे विवाद में MIM के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने कड़ा विरोध जताया है।
वहीं, ओवैसी ने सोशल मीडिया पर धर्म संसद को ‘नर संहारी सम्मेलन’ बताते हुए कांग्रेस को इन सबके लिए जिम्मेदार ठहराया है। उन्होंने कहा कि इस सम्मेलन में गांधी के खिलाफ कही गई बातों का विरोध हुआ। इसमें FIR भी दर्ज की गई है, मगर मुसलमानों के खिलाफ जो कुछ कहा गया उसकी अनदेखी की गई है।
दरअसल, मिडिया रिपोर्टस के मुताबिक बीते दिनों हुए धर्म संसद में कही गई बात को लेकर असदुद्दीन ओवैसी ने लिखा, रायपुर के ‘नर संहारी सम्मेलन’ में कालीचरण ने गांधी जी को गाली दी और गोडसे की तारीफ की। इस बात पर आपत्ति जताते हुए संत राम सुंदर रूठ कर सम्मेलन से बाहर चले गए।
वहीं, राम सुंदर छत्तीसगढ़ गौ सेवा आयोग के अध्यक्ष हैं और इनका कैबिनेट रैंक है। फिलहाल ये धर्म संसद के मुख्य संरक्षक थे। वहीं, ये सम्मेलन कांग्रेस पार्टी के बिना परमिशन के करना मुमकिन ही नहीं था। इस दौरान उन्होंने कहा कि राम सुंदर के संरक्षण में ना सिर्फ महात्मा गांधी को गाली दी गई, बल्कि ये भी कहा गया कि इस्लाम का मकसद देश पर कब्जा करना है।
बता दें कि संत कालीचऱण द्वारा की गई टिप्पणी पर ओवैसी ने कहा कि कालीचरण चाहते हैं कि सांसद, विधायक, मंत्री-प्रधानमंत्री ऐसा होना चाहिए जो कट्टर हिंदुत्ववादी हो. ऐसे में लोगों के वोट न देने की वजह से देश में इस्लाम हावी होगा, उन्होंने लोगों को ज्यादा से ज्यादा वोट देना चाहिए और ऐसा राजा चुनना चाहिए जो कट्टर हिंदुत्ववादी हो, चाहे राजनीतिक पार्टी कोई भी हो।
वहीं, क्या राम सुंदर को ये बयान आपत्तिजनक नहीं लगा? जब कालीचऱण बयान दे रहा था तो उस दौरान कार्यक्रम स्थल पर दर्शकों के बीच कांग्रेस नेता प्रमोद दुबे, बीजेपी नेता सच्चिदानंद उपासने और नंद कुमार साय भी मौजूद थे. हालांकि वहां पर किसी ने अपनी चुप्पी नहीं तोड़ी।
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