नई दिल्ली, केरल के एक हिंदू मंदिर में मुस्लिम भरतनाट्यम कलाकार प्रर्दशन करने से रोक दिया। लड़की का नाम वीपी मानसिया बताया जा रहा है। इस घटना की जानकारी मानसिया ने फेसबुक पोस्ट पर लिखकर दी।
जिसके बाद सोशल मीडिया पर इसकी काफी चर्चा हो रही है। दरअसल वीपी मानसिया को हिंदू संगठन के लोगों ने इसलिए प्रस्तुती नहीं करने दी क्योंकि वह मुसलमान थी। मानसिया सोशल मीडिया पर लिखा कि मुझे मंदिर के अधिकारी ने बताया कि मैं वहां प्रस्तुति नहीं दे सकती क्योंकि मैं गैर हिंदू हूं।
मुझसे यह भी पूछा गया कि क्या मैंने शादी के बाद हिंदू धर्म अपनाया है? मेरा कोई धर्म नहीं है, मैं कहां जाऊं? मलयालम में लिखी अपनी फेसबुक पोस्ट में मानसिया ने लिखा। भरतनाट्य में पीएचडी कर रही मानसिया ने संगीतकार श्याम कल्याण से शादी की है। उन्होंने आगे अपनी पोस्ट में लिखा है कि कला और कलाकारों को धर्म के बंधन में बांधने की कोशिश की होती रही है। मेरे लिए यह बस नया नहीं है। मैं पहले भी ऐसे अपमान बर्दाश्त कर चुकी हैं। ऐसा लगता है कि सिक्यूलर केरल बहुत नहीं बदला है। मैं फिर से लिख रही हूं ताकि याद रहे कि चीजें नहीं बदली हैं।
बाद में कूडलमणिक्यम मंदिर के बोर्ड चेयरमैन प्रदीप मेनन ने कहाकि वह एक मशहूर नृत्यांगना हैं। लेकिन मंदिर के नियम केवल हिंदुओं को ही अंदर प्रस्तुति की अनुमति देते हैं। उन्होंने कहाकि मानसिया ने लिखित में दिया है कि उनका कोई धर्म नहीं है। हम मंदिर की सदियों पुराने नियम को देखते हुए उन्हें अनुमति नहीं देने पर बाध्य हैं। उन्होंने कहाकि यह मामला मंदिर के मुख्य पुजारी तक भी ले जाया जा चुका है। इस मामले में उनकी बात ही अंतिम होगी। इस घटना पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए पूर्व स्वास्थ्य मंत्री केके शैलजा और अन्य एक्टिविस्ट्स ने मंदिर बोर्ड के इस फैसले की आलोचना की है।
शैलजा के मुताबिक यह एक गंभीर मुद्दा है। लगता है केवल धर्म का पट्टा पहनकर सर्वाइव किया जा सकता है। हम ऐसी मानसिक अवस्था में पहुंच चुके हैं। उन्होंने कहाकि मानवता सबसे बड़ा धर्म है, अन्यथा सांप्रदायिकता ही फले-फूलेगी। मैं निश्चिंत हूं कि केरल इस मामले में भाईचारा और सद्भाव की मिसाल पेश करेगा।
वहीं इस घटना पर कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने हैरानी जताते हुए सवाल किया है कि ‘कहां है वसुधैव कुटुंबकम’। सांसद थरूर ने मंगलवार को ट्वीट कर कहा कि मानसिया को रोके जाने से वह ‘हैरान’ हैं। दू
सरे धर्म जहां अपने धर्म का सम्मान करने वाले दूसरे लोगों को आकर्षित करने के लिए अपने रास्ते खोल देते हैं। मस्जिदों, चर्चों, गुरुद्वारा और सिनेगाग के दरवाजे सब के लिए खोल दिए जाते हैं, लेकिन मेरे कुछ हिंदू साथी हमारे मंदिरों को बाहरी लोगों के लिए बंद करना पसंद करते हैं। कहां है वसुधैव कुटुंबकम।’
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