नई दिल्ली, हिजाब मामले पर कर्नाटक हाईकोर्ट के फैसले को लेकर मुस्लिम समुदाय के नेता नाराज नजर आ रहे हैं। मौलाना सगीर अहमद खान रश्दी ने कोर्ट के फैसले पर दुख जताया और इसके विरोध में तमाम मुस्लिम संगठनों से कर्नाटक बंद करने का अह्वान किया गया।
सगीर ने कर्नाटक बंद का ऐलान ऐसे समय में किया है, जब हिजाब विवाद के चलते पूरे राज्य में 21 मार्च तक धारा 144 लागू है। बेंगलुरु में बंद का असर देखने को मिला है, क्योंकि इसके शिवाजीनगर में कई दुकानों को बंद देखा गया है। शिवाजीनगर में स्टीफन स्क्वायर मर्चेंट एसोसिएशन के उपाध्यक्ष अली जान ने कहा कि हाईकोर्ट का फैसला शरियत के खिलाफ है।

वहीं, कर्नाटक में विपक्षी कांग्रेस ने बंद पर तटस्थ रुख अपनाने का फैसला किया है। बता दें कि देश में मुसलमानों के प्रमुख संगठन जमीयत उलेमा-ए- हिंद के प्रमुख मौलाना अरशद मदनी ने हिजाब को इस्लाम का अभिन्न अंग बताय है। उन्होंने बुधवार को कहा कि यह कहना ‘सरासर गलत है कि पर्दा इस्लाम का हिस्सा’ नहीं है।
मौलाना मदनी ने कहा कि धर्मनिरपेक्षता का अर्थ यह नहीं है कि कोई व्यक्ति या समुदाय अपनी धार्मिक पहचान जाहिर न करे। उन्होंने पूछा कि बहुत से लोग नमाज नहीं पढ़ते हैं या रोजा नहीं रखते हैं, इससे क्या नामाज-रोजा इस्लाम का हिस्सा नहीं रहेगा? संगठन की ओर से जारी बयान में मौलाना मदनी के हवाले से कहा गया है कि हाईकोर्ट का फैसला इस्लामी शिक्षाओं के अनुसार नहीं है, क्योंकि सिर ढंकना कुरान से साबित है जिसका मतलब है कि यह ‘अनिवार्य’ है।

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