इबादतगाहों की हैसियत बदली जाएगी तो पूरा मुल्क होगा अफरा-तफरी का शिकार, अन्याय के खिलाफ होगा मुकाबला : मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड

admin

admin

17 May 2022 (Publish: 01:21 PM IST)

नई दिल्ली : (रुखासर अहमद)  प्रमुख संगठन ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (एआईएमपीएलबी) ने वाराणसी की ज्ञानवापी मस्जिद में शिवलिंग मिलने वाली बात पर एक बयान जारी किया है। अदालत के आदेश पर मस्जिद का वजू खाना बंद कराए जाने को नाइंसाफी करार दिया है।

पर्सनल लॉ बोर्ड का कहना है कि पूरा घटनाक्रम सांप्रदायिक उन्माद पैदा करने की एक साजिश से ज्यादा कुछ नहीं है। बोर्ड के महासचिव खालिद सैफुल्लाह रहमानी ने सोमवार देर रात जारी एक बयान में कहा, ज्ञानवापी मस्जिद, मस्जिद है और मस्जिद ही रहेगी। इसको मंदिर करार देने की कोशिश सांप्रदायिक उन्माद पैदा करने की एक साजिश की जा रही है। यह संवैधानिक अधिकारों और कानून के खिलाफ है।

साल 1937 में दीन मोहम्मद बनाम स्टेट सेक्रेटरी मुकदमे में अदालत ने जबानी गवाही और दस्तावेजों के आधार पर यह बात तय कर दी थी कि यह पूरा अहाता (ज्ञानवापी मस्जिद परिसर) मुस्लिम वक्फ की मिल्कियत है और मुसलमानों को इसमें नमाज पढ़ने का हक है।

अदालत ने यह भी तय कर दिया था कि कितना हिस्सा मस्जिद है और कितना हिस्सा मंदिर है। उसी वक्त वजू खाने को मस्जिद की मिल्कियत स्वीकार किया गया था।

फिर 1991 में प्लेसेस ऑफ़ वरशिप एक्ट संसद से पारित हुआ जिसका खुलासा यह है कि 1947 में जो इबादतगाहें जिस तरह थीं उनको उसी हालत पर कायम रखा जाएगा। साल 2019 में बाबरी मस्जिद मुकदमे के फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने बहुत साफ तौर पर कहा था कि अब तमाम इबादतगाहें इस कानून के मातहत होंगी और यह कानून दस्तूर हिंद की बुनियाद के मुताबिक है। फिर आज इस मस्जिद को लेकर ऐसे हलात क्यों पैदा किए जा रहे है।

वहीं बोर्ड ने वाराणसी की सिविल जज (सीनियर डिवीजन) की अदालत की भूमिका पर भी सवाल उठाते हुए कहा, “कानून का तकाजा यह था कि मस्जिद में मंदिर होने के दावे को अदालत फौरन खारिज कर देती लेकिन अफसोस, कि बनारस की सिविल अदालत ने इस स्थान के सर्वे और वीडियोग्राफी का हुक्म जारी कर दिया। वक्फ बोर्ड इस सिलसिले में हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटा चुका है और वहां यह मुकदमा विचाराधीन है।

इसी तरह ज्ञानवापी मस्जिद की इंतजामिया कमेटी भी सिविल कोर्ट के इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटा चुकी है। वहां भी यह मसला सुनवाई के दौर में है लेकिन इन तमाम बातों को नजरअंदाज करते हुए सिविल अदालत ने पहले तो सर्वे का हुक्म जारी कर दिया और फिर उसकी रिपोर्ट कुबूल करते हुए वजू खाने के हिस्से को बंद करने का हुक्म जारी कर दिया।

उन्होंने कहा, “यह आदेश ज्यादती है और कानून का उल्लंघन भी है जिसकी एक अदालत से हरगिज़ उम्मीद नहीं की जा सकती। अदालत के इस अमल ने इंसाफ के तकाजों को घायल कर दिया है, इसलिए सरकार को चाहिए कि फौरी तौर पर इस फैसले पर अमल को रोके, इलाहाबाद हाई कोर्ट के फैसले का इंतजार करे और 1991 के कानून के मुताबिक तमाम मजहबी स्थलों का संरक्षण करे।

रहमानी ने मस्जिद के अंदर मंदिर होने की हिंदू पक्ष की दलीलों की तरफ इशारा करते हुए कहा, “अगर ऐसी खयाली दलीलों के आधार पर इबादतगाहों की हैसियत बदली जाएगी तो पूरा मुल्क अफरा-तफरी का शिकार हो सकता है, क्योंकि कितने ही बड़े-बड़े मंदिर बौद्ध और जैन इबादतगाहों को तब्दील करके बनाए गए हैं और उनके प्रत्यक्ष निशान भी मौजूद हैं। मुसलमान इस जुल्म को हरगिज बर्दाश्त नहीं कर सकते। ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड हर स्तर पर इस अन्याय का मुकाबला करेगा।

बता दें कि वाराणसी की एक स्थानीय अदालत के आदेश पर ज्ञानवापी मस्जिद के अंदर किए गए सर्वे वीडियोग्राफी में एक शिवलिंग पाया गया। इस कारण अदालत के निर्देश पर वजू खाने को सील कर दिया गया है। लेकिन हैरानी है जिसकी शिवलिंग बाताया जा रहा है, वह वजू खाने में लगा फव्वारा है, जो मुगलो के समय लगया जाता था।

वहीं आज ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने आज अपनी कार्यकारी समिति की तत्काल बैठक बुलाई है। ज्ञानवापी मस्जिद, टीपू सुल्तान मस्जिद समेत देश के मौजूदा मुद्दों समेत अन्य मुद्दों पर चर्चा होगी। बोर्ड अपनी भविष्य की कार्रवाई तय करेगा।

 

Support Independent Media

Click Here and Join the Membership of Millat Times to Support Independent Media.

Support Millat Times

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Scroll to Top