नई दिल्ली: एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने बीजेपी नेता नुपूर शर्मा के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने की मांग की है। उन्होंने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस करके अपनी बात रखी।
उन्होंने कहा कि देश का कानून सुप्रीम है। कानून के हिसाब से ही नूपुर शर्मा के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। हैदराबाद से सांसद ओवैसी ने शनिवार को गुजरात के मुस्लिम स्कॉलर्स से डिजिटली बातचीत की। इस दौरान ओवैसी ने साफ किया कि उनकी पार्टी का ऑफिशियल स्टेटमेंट है कि देश के कानून के तहत नूपुर शर्मा को सजा होनी चाहिए।
एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में ओवैसी ने कहा कि नूपुर शर्मा की गिरफ्तारी होनी ही चाहिए। साथ ही आरोपियों के घर पर बुलडोजर चलने के सवाल पर उन्होंने कहा कि सजा का फैसला कोर्ट करने के लिए कोर्ट है। ‘लोकतंत्र के लिए यह बहुत जरूरी है कि कहीं पर भी हिंसा न हो। यह सरकार की जिम्मेदारी है कि कहीं हिंसा न होने दे।
शुक्रवार को बहुत सारी जगहों पर प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहा। कई जगहों पर हिंसा हुई है, जो नहीं होनी चाहिए थी। किसी को हिंसा नहीं करनी चाहिए, और पुलिस को भी कानून अपने हाथों में नहीं लेना चाहिए। कल रांची में पुलिस फायरिंग में 2 लोगों की मौत हो गई।’
ओवैसी ने कहा कि नूपुर शर्मा की गिरफ्तारी होनी चाहिए, और अपने बयान के लिए सिर्फ माफी मांगने से यह मसला हल होने वाला नहीं है। उन्होंने कहा, ‘नूपुर शर्मा को गिरफ्तार क्यों नहीं किया जा रहा है? उन्हें देश के कानून के तहत गिरफ्तार किया जाना चाहिए।
इतने दिन हो गए, उन्हें गिरफ्तार क्यों नहीं किया जा रहा है? उनके ऊपर कानूनी कार्रवाई करने से आपको कौन रोक रहा है? बीजेपी को क्या लग रहा है कि उन्हें सस्पेंड करने से मामला हल हो जाएगा? ऐसे यह मामला हल नहीं होगा। हमारी मांग है कि उनकी गिरफ्तारी होनी चाहिए।’
उत्तर प्रदेश समेत देश के कई हिस्सों में हिंसा एवं अन्य अपराधों के आरोपियों के घर और अवैध संपत्ति पर बुलडोजर चलाए जाने को लेकर भी ओवैसी ने अपनी बात कही। ओवैसी ने कहा कि किसी भी गुनाह पर सजा देने के लिए कोर्ट है, ऐसे में इस तरह की कार्रवाई सही नहीं है।
ओवैसी ने कहा, ‘आप क्यों किसी का घर तोड़ते हैं? आप कौन होते हैं घर तोड़ने वाले? आरोप है तो कोर्ट तय करेगा कि क्या सजा देनी है। आप चीफ जस्टिस हैं? आप अदालत हैं? कोर्ट और जज की क्या जरूरत है जब आप ही सब कुछ कर देते हैं?’
इसके अलावा ओवैसी ने कश्मीरी पंडितों को लेकर कहा कि उन्हें सिर्फ वोटबैंक के रूप में ही देखा जाता है। उन्होंने कहा कि कश्मीरी पंडितों को जब मारा जा रहा है तो देश के प्रधानमंत्री का बयान क्यूं नहीं आता। कश्मीरी पंडित को वहां सिर्फ वोटबैंक के तौर पर देखा जा रहा है। कश्मीरी पंडित को वहां सिर्फ वोटबैंक के तौर पर देखा जा रहा है। ये सरकार की नाकामी है। कश्मीर घाटी में पंडितों को अगर आंतकी मारता है तो सरकार आतंकी के खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं करती है। जब उनके जीवन को खतरा है तो सरकार उन्हें सुरक्षा मुहैया क्यों नहीं कराती है।
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