उर्दू व मदरसा पैराटीचर्स की मांगो को लेकर 18-जनवरी को उर्दू शिक्षक संघ मुख्यमंत्री गहलोत का घेराव करेंगें।

जयपुर:अशफाक कायमखानी।…………दो महीने पहले उर्दू व मदरसा पैराटीचर्स की मांगो को लेकर चूरु से दाण्डी (गुजरात) की पैदल यात्रा पर निकले शिक्षक शमशेर खान का आंदोलन परवान चढने के साथ ही मुख्यमंत्री गहलोत द्वारा अपने एक मातहत अल्पसंख्यक नेता के मार्फत मध्य रास्ते मे शमशेर को रुकने पर राजी करके आंदोलन को कुचलनने के बाद कोरे आश्वासनों के बाद मांगो के अबतक जस की तस रहने के अवाम मे सरकार के प्रति बढते आक्रोश के बाद उर्दू शिक्षक संघ के अध्यक्ष आमीन कायमखानी, मदरसा पैराटीचर्स संघ के अध्यक्ष मसूद अख्तर व सामाजिक कार्यकर्ता मैमूना नरगिस के नेतृत्व मे राजस्थान भर के उर्दू शिक्षक व पैराटीचर्स जयपुर कलेक्ट्रेट के सामने जमा होकर 18-जनवरी को जयपुर शहर मे रैली निकाल कर सिविल लाईन स्थित मुख्यमंत्री निवास पर प्रदर्शन व घेराव करके अपनी मांगे मानने का दवाब बनायेगे।
गहलोत सरकार के शिक्षा मंत्री गोविंद डोटासरा की हठधर्मिता ओर मुख्यमंत्री गहलोत द्वारा उर्दू व पैराटीचर्स की मांगो को लेकर अनदेखी करने का रवैया लगातार अपनाये जाने के कारण अल्पसंख्यक समुदाय मे उनकी कार्यशैली को लेकर आक्रोश का पारा लगातार चढते जाने के उपरांत शिक्षक शमशेर खान दाण्डी यात्रा पर निकले थे जिस यात्रा को भरपूर जन समर्थन मिलते नजर आने के बाद सरकार उस आंदोलन को कुचलने मे तो सफल रही लेकिन आंदोलनों के प्रयाय माने जाने वाले उर्दू शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष आमीन कायमखानी पर सहानुभूति के डोरे डालने मे अभी तक सरकार सफल नही होने के चलते उनके द्वारा मुख्यमंत्री निवास का घेराव करने के ऐहलान करने के बाद सरकारी स्तर पर हलचल बढना बताया जा रहा है। उधर शिक्षक शमशेर खान का होसला अभी कमजोर नही पड़ा है। वो फिर आंदोलन की राह पकड़ सकते है।
हालांकि उर्दू को लेकर शिक्षक संघ की सभी मांगे नियमो के दायरे मे आने के बावजूद सरकार हठधर्मिता अपनाते हुये उनको मानने से अबतक दूर भागती आ रही है। संघ की प्रमुख मांग है कि भाजपा सरकार के समय 13-दिसम्बर- 2004 मे शिक्षा निदेशक के जारी आदेश को बहाल रखते हुये शिक्षक भर्ती मे उर्दू शिक्षकों की भर्ती उसी अनुपात मे की जाये। इसके अलावा जिस स्कूल व कालेज मे छात्र-छात्राऐ अल्पसंख्यक भाषा पढना चाहते है वहां उस भाषा के शिक्षक की नियुक्ति की व्यवस्था कायम हो। इसके अलावा मदरसा पैराटीचर्स भाजपा सरकार द्वारा 2008 मे जिस तरह उनका स्थाईकरण किया था, उसी तरह कांग्रेस सरकार भी मदरसा पैराटीचर्स का स्थाईकरण करे एवं समान कार्य समान वेतन का नियम उनके लिये भी लागू करे। इसके अतिरिक्त सरकार द्वारा बंद की गई उर्दू मीडियम स्कूलो को फिर से शूरु करने की मांग सहित कुछ अन्य महत्वपूर्ण मांगे है।
राजस्थान उर्दू शिक्षक संघ के अध्यक्ष आमीन कायमखानी ने बताया कि उर्दू शिक्षक व मदरसा पैराटीचर्स एवं सामाजिक कारकून 18-जनवरी को पहले कलेक्ट्रेट पर इकठ्ठा होगे फिर रैली के रुप मे सिविल लाईन पहुंच कर मुख्यमंत्री का घेराव करके उनकी मांगो को मानने का दवाब बनायेंगे।
कुल मिलाकर यह है कि मुस्लिम समुदाय द्वारा जायज मांगो को लेकर किये जाने वाले आंदोलनों का गहलोत सरकार पर अभी तक कोई खास असर नही पड़ पाया है। जिसके प्रमुख कारण यह है कि आंदोलन के साथ ही समुदाय मे कुछ जयचंद पैदा हो जाते है जो अपनी भुमिका निभाने से कभी चूकते नही है। फिर भी आमीन कायमखानी जैसा तेजतर्रार व चालाक संघर्षरत शिक्षक नेता अपने आंदोलनों के मार्फत विभिन्न सरकारों को कभी कभी झुकाकर अपनी कुछ मांगे मनवाने मे कामयाब जरूर रहे है।

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शम्स तबरेज़ क़ासमी मिल्लत टाइम्स ग्रुप के संस्थापक एंड चीफ संपादक हैं, ग्राउंड रिपोर्ट और कंटेंट राइटिंग के अलावा वो खबर दर खबर और डिबेट शो "देश के साथ" के होस्ट भी हैं सोशल मीडिया पर आप उनसे जुड़ सकते हैं Email: stqasmi@gmail.com