असम के लोकसंगीत सुरीली जिकिर अब हिंदी में भी उपलब्ध।शिल्पी वाजिदुर रहमान का प्रयास।ईद-उल-फितर के पहले किया जायेगा रिलीज।

चाईजुर रहमान, गुवाहाटी, 21 मई:– असम के जातीय जीवन का अभिन्न अंग जिकिर अब राष्ट्रीय भाषा हिंदी में भी उपलब्ध होगा। गोलाघाट जिले के देरगांव के अनातार शिल्पी वाजिदुर रहमान ने पहली बार असमिया भाषा से हिंदी भाषा में जिकिर को अनुवाद करके राष्ट्रीय स्तर पर लाने की कोशिश की है। गौरतलब है कि असम के जातीय जीवन के प्रसिद्ध समाज संस्कारक तथा एकता, संप्रीति, भाईसारे का प्रतीक अजान फ़क़ीर ने जिकिर रचना की थी। अनुमानिक चोलवी शताब्दी में बगदाद से असम आये इस शख्सियत ने ईस्लाम की सार्वजनिन भाईसारे की वाणी से असम की हिन्दू-मुसलमान को एकता की डोर से बंधा था।

असम की हिन्दू महिला से शादी करके यही बचे अजान फ़क़ीर का असली नाम शाह मिलन था। असम के शिवसागर जिले के सरागुरि सापरि में उसका मज़ार है। इस महान शख्सियत के नाम से असम सरकार हर वर्ष राज्य के लिए उल्लेखनीय अवदान देनेवाले ब्यक्ति कोे अजान पीर अवार्ड से सम्मानित करते है। अजान फ़क़ीर का नाम असम के जनजीवन के दो महान शख्सियत तथा महापुरुष श्रीमंत शंकरदेव और श्रीमंत माधवदेव के साथ जोड़ा जाता है। इन्ही शख्सियत के नाम से ही असम को शंकर-माधव-अजान का देश कहा जाता है। ये महान शख्सियत अजान फ़क़ीर ने जिकिर और जारी रचना की थी। जिकिर एक तरह का गीत है जिसमे अल्लाह के गुनगान के जरिये एकता, भाईसारे, संप्रीति, मिलन का सन्देश दिया जाता है। हर किसी के दिल को शकुन देता जिकिर असम के लोकसंगीत में से अन्यतम है और इसे असम के संस्कृति का अभिन्न हिस्सा माना जाता है। अजान फ़क़ीर द्वारा रचित जिकिर में से एक बहुत ही अनोखा और लोकप्रिय जिकिर ‘मोर मनत भेद भाव नाइ ओ अल्लाह’ को हिंदी भाषा में पहली बार अनुवाद किया है अनातार शिल्पी वाजिदुर रहमान ने। असम के गोलाघाट जिले के देरगांव के रहनेवाले वाजिदुर रहमान ने इस अनोखा और सुरीली जिकिर का ऑडियो रिकॉर्डिंग करने के बाद अब वीडियो भी बनाया है। उन्होंने बताया की ईद-उल-फितर के पहले हिंदी भाषा में यह जिकिर रिलीज़ किया जायेगा। जिकिर में यास्मीन सुल्ताना के साथ कोई महिलाओ ने कंठदान दिया है। उल्लेखनीय है की अनतार शिल्पी वाजिदुर रहमान असम के जिकिर सम्राट रेकीबुद्दीन अहमद का भतीजा है।