दिल्ली की एक अदालत ने जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी (जेएनयू) की छात्र नेता और जम्मू एवं कश्मीर पीपुल्स मूवमेंट की नेता शेहला राशिद को गिरफ्तारी से अंतरिम सुरक्षा प्रदान की है. भारतीय सेना के खिलाफ कथित ट्वीट करने के लिए शेहला पर देशद्रोह का मामला दर्ज किया गया है. अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश पवन कुमार जैन ने पटियाला हाउस कोर्ट में राशिद को अंतरिम सुरक्षा देते हुए कहा, “सभी तथ्यों पर विचार करते हुए, मैं इस विचार पर पहुंचा हूं कि मामले की विस्तृत जांच की जरूरत है. तब तक आरोपी को गिरफ्तार नहीं किया जाना चाहिए, हालांकि जांच अधिकारी (आईओ) के बुलाने पर उन्हें जांच में शामिल होना होगा.’
कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई पांच नवंबर को तय की है. सुनवाई के दौरान, अतिरिक्त जन अभियोजक ने कहा कि पुलिस ने शेहला राशिद को अभी तक नोटिस नहीं दिया है. आरोपी के वकील ने कोर्ट में कहा कि उनकी क्लाइंट जांच में शामिल होने के लिए तैयार है और वह पुलिस का सहयोग करेंगी.
जन अभियोजक ने भी कहा कि पुलिस को अभी तक सेना की तरफ से कोई शिकायत नहीं मिली है. उन्होंने आगे कहा कि पुलिस को मामले की जांच के लिए कम से कम छह सप्ताह का समय चाहिए.
पुलिस ने कहा कि जम्मू एवं कश्मीर में मानवाधिकारों के कथित उल्लंघन के संदर्भ में शेहला राशिद के बयानों के आधार पर उनके खिलाफ शुक्रवार को देशद्रोह का मुकदमा दर्ज कराया गया था.
दिल्ली पुलिस की विशेष सेल ने कहा कि तीन सितंबर प्राथमिकी दर्ज की गई थी और जेएनयू से पीएचडी कर चुकीं राशिद पर सुप्रीम कोर्ट के वकील आलोक श्रीवास्तव की आपराधिक शिकायत पर देशद्रोह का मामला दर्ज किया गया. आलोक ने राशिद की गिरफ्तारी की मांग की थी.
राशिद ने एक साथ कई ट्वीट्स कर दावा किया था कि घाटी में भारतीय सेना ने निरंकुश होकर आदमियों को उठा रही है, घरों में छापेमारी कर रही है और लोगों का उत्पीड़न कर रही है. उन्होंने दावा किया था कि कश्मीर में मानवाधिकारों का उल्लंघन किया जा रहा है. भारतीय सेना ने आधिकारिक तौर पर इन आरोपों को खारिज कर इन्हें आधारहीन और असत्यापित बताया था.
Input: NDTV
Support Independent Media
Click Here and Join the Membership of Millat Times to Support Independent Media.
Support Millat Times