नई दिल्ली, स्वामी निश्चलानंद सरस्वती ने ज्ञानवापी मामले को लेकर बुधवार को बड़ा बयान दिया। वाराणसी में आयोजित पत्रकारों से बातचीत करते हुए उन्होंने कहा कि ज्ञानवापी में शिवलिंग ही है।
उन्होंने कहा कि ज्ञानवापी परिसर को जल्द से जल्द हिंदुओं को सौंप देना चाहिए। ताजमहल से जुड़े सवाल पर स्वामी निश्चलानंद ने कहा कि उसे तेजोमहल घोषित किया जाए। मक्का में मक्केश्वर महादेव मंदिर चाहिए। हम सब अब स्वतंत्र भारत में रहते हैं और हमारा अधिकार है कि हम अपने पूर्व के मानवाधिकार को स्थापित करें।
स्वामी बोला कि मोहम्मद साहब और ईसा मसीह के पूर्वज कौन थे? यह बात सिद्ध है कि सबके पूर्वज सनातनी वैदिक आर्य हिन्दू थे। अतः अपने पूर्वजों के मार्ग पर चलने का प्रयास करें। ज्ञानवापी का जो पूर्व स्वरूप था उसे एक बार फिर इस स्वरूप में लाना चाहिए।
मानवाधिकार की सीमा में विश्व की कोई भी शक्ति हमें इससे वंचित नहीं कर सकती। स्वामी निश्चलानंद सरस्वती ने एलान किया कि मंदिरों को संरक्षित करने के लिए काशी में तमाम शंकराचार्यों, प्रमुख पीठों के महंत एवं धर्माचार्यों का सम्मेलन आय़ोजित करने की बात कही।
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