नई दिल्ली (डॉ. अभय कुमार) प्रिय हिंदू बहनो और भाइयो,
कृपया एक पल के लिए सोचिए। अगर ज्ञानवापी मस्जिद को मंदिर में बदल दिया जाए तो क्या इससे आपके बच्चों को शिक्षा, और आप को नौकरी और स्वास्थ्य सुविधाएं मिल जाएँगी?
असली खेल को समझिए। देश में पेट्रोल, रसोई गैस, खाने-पीने की चीजों, रेलवे टिकटों के दाम आसमान छू रहे हैं। युवा बेरोजगार हैं। अर्थव्यवस्था संकट में है। बहुसंख्यक समुदाय होने की वजह से, क्या आप दूसरे अन्य समुदायों की तुलना में अधिक पीड़ित नहीं हैं?
नफरत की राजनीति के खिलाफ खड़े होने की ज़रूरत है। अपने अधिकारों के लिए लड़िए। अपनी साझी संस्कृति के लिए भारत जाना जाता है, जहाँ मंदिर की घंटी और मस्जिद की अज़ान राष्ट्रीय एकता का मधुर सुर बनाती हैं।
आप अपनी खामोशी को तोड़िए। अन्याय के ख़िलाफ़ आवाज़ बुलंद कीजिए और कहिए कि ज्ञानवापी मस्जिद एक मस्जिद है और आदर के साथ इसे आगे भी मस्जिद ही रहना चाहिए।
आप बुलंद आवाज़ से कहिए कि अगर हमें और मंदिर बनाने ही होंगे तो हम उसे कहीं और बनाएंगे। हम मंदिर को किसी मस्जिद के मलबे पर नहीं बनाएँगे। क़सम लीजिए कि हम अब किसी भी पूजा स्थल पर हमला नहीं करेंगे, जैसा कि 6 दिसंबर 1992 को बाबरी मस्जिद पर किया गया था।
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