नई दिल्ली, मुस्लिम महिलाओं के एक समूह ने कर्नाटक हाईकोर्ट के उस फैसले के खिलाफ अपनी कड़ी नाराजगी व्यक्त की, जिसमें अदालत ने राज्य में शैक्षणिक संस्थानों में हिजाब पहनने पर प्रतिबंध को बरकरार रखा है।
राष्ट्रीय राजधानी में एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए सामाजिक कार्यकर्ता खालिदा परवीन ने कहा, “कर्नाटक उच्च न्यायालय ने कहा कि हिजाब पहनना इस्लाम में एक आवश्यक धार्मिक प्रथा नहीं है और इसलिए, संविधान के अनुच्छेद 25 द्वारा गारंटीकृत धर्म की स्वतंत्रता के अधिकार के तहत संरक्षित नहीं है।
यह सवाल ही नहीं है। इससे पहले, कर्नाटक उच्च न्यायालय की विशेष पीठ ने कक्षाओं में हिजाब पहनने की अनुमति के लिए निर्देश देने वाली सभी याचिकाओं को खारिज कर दिया था। हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि “हिजाब पहनना इस्लाम का अनिवार्य हिस्सा नहीं है। वर्दी का निर्देश संवैधानिक है और छात्र इस पर आपत्ति नहीं कर सकते।”
अन्य महिला वक्ताओं ने कहा कि वे ‘इस फैसले से बहुत व्यथित हैं’ और उनका मानना है कि यह न केवल संवैधानिक कानून में एक बुरी मिसाल कायम कर रहा है, बल्कि यह कर्नाटक में सार्वजनिक संस्थानों में मुस्लिम महिलाओं के खिलाफ भेदभाव को सक्षम बनाता है। उन्होंने कहा, “यह हिजाब पहनने वाली महिलाओं के लिए एक असुरक्षित माहौल बनाता है, जिससे वे भीड़ की हिंसा और दमन के समय में कमजोर हो जाती हैं।”
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