नई दिल्ली: संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद में शुक्रवार को रूस की निंदा वाले एक प्रस्ताव से भारत ने फिर दूरी बनाई। यह प्रस्ताव यूक्रेन में रूस की सैन्य कार्रवाइयों में मानवाधिकार उल्लंघन के संबंध में लाया गया था।
इसे भारी मतों के साथ अपनाया गया। 32 सदस्यों ने प्रस्ताव के पक्ष में वोटिंग की। भारत सहित 13 देशों ने इसमें हिस्सा नहीं लिया। वहीं, दो ने प्रस्ताव के खिलाफ वोट किया। इसी के साथ मानवाधिकार उल्लंघनों की जांच के लिए एक तीन सदस्यीय जांच आयोग के गठन पर मुहर लगाई गई।
यूक्रेन पर हमले के बाद संयुक्त राष्ट्र के अलग-अलग निकाय रूस के खिलाफ निंदा प्रस्ताव ला चुके हैं। इनमें सुरक्षा परिषद (UNSC) और महासभा (UNGA) शामिल हैं। भारत ने इनमें से किसी भी प्रस्ताव पर वोटिंग में हिस्सा नहीं लिया है। उसने इस पूरे मामले में न्यूट्रल रुख अपनाया हुआ है।
जिनेवा में संयुक्त राष्ट्र में यूक्रेन के राजदूत येवेनिया फिलिपेंको ने मतदान से कुछ मिनट पहले परिषद को बताया, ‘रूस के अपराधों के दस्तावेजीकरण और सत्यापन के साथ जिम्मेदार लोगों की पहचान को अनिवार्य करके जवाबदेही सुनिश्चित करना हम सबकी सामूहिक जिम्मेदारी है।’
रूस ने यूक्रेन में नागरिकों को निशाना बनाने से इनकार किया है। उसके प्रतिनिधि एवगेनी उस्तीनोव ने परिषद को बताया कि प्रस्ताव के समर्थक यूक्रेन में घटनाओं के लिए रूस को दोष देने के लिए किसी भी तरह के साधनों का उपयोग करेंगे।
हमले के बाद रूस पर पश्चिमी देश आग-बबूला हैं। इस प्रस्ताव का सिर्फ रूस और इरिट्रिया ने विरोध किया। चीन ने भी वोटिंग में हिस्सा नहीं लिया। इस मसले पर यूक्रेन ने तत्काल बहस का आह्वान किया था। इस दौरान परिषद के ज्यादा सदस्यों ने रूस को लताड़ा। सोमवार को चीन सहित पांच देशों ने तत्काल बहस बुलाने के यूक्रेन के प्रयास के खिलाफ मतदान किया था।
पश्चिमी देशों के कई दूतों ने अपने लैपल्स पर नीले या पीले रंग की टाई, स्कार्फ, जैकेट या रिबन पहने थे। ये यूक्रेनी ध्वज के संदर्भ में थे। इसके जरिये उन्होंने यूक्रेन के साथ अपना समर्थन जताया। गाम्बिया और मलेशिया जैसे दूर-दराज के देशों ने भी रूसी आक्रमण के खिलाफ आवाज उठाई।
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