नई दिल्ली:बिहार,केरल,पंजाब,राजस्थान,पश्चिम बंगाल,पुदुचेरी,दिल्ली और मध्य प्रदेश विधानसभाओं के बाद अब तेलंगाना विधानसभा में सीएए,एनआरसी और एनपीआर के खिलाफ सोमवार को प्रस्ताव पास हुआ है।
मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव ने विधानसभा में कहा कि ऐसे लाखों लोग हैं जिनके पास वैध दस्तावेज नहीं हैं। ऐसे में केंद्र को संशोधित नागरिकता कानून पर एकबार फिर से विचार करना चाहिए।
इस प्रस्ताव के पास होने से पहले सीएम चंद्रेशेखर राव ने कहा कि जो भी इन कानूनों के खिलाफ कुछ भी कह रहा है उसे सरकार देश विरोधी कह रही है, ऐसा हो सकता है कि आज तेलंगाना की विधानसभा को भी देश विरोधी कह दिया जाए।
केसीआर ने अपने संबोधन में कहा कि देश में जिस तरह से एनआरसी, सीएए और एनपीआर के खिलाफ प्रदर्शन हुए हैं, किसी भी सभ्य समाज में ऐसा नहीं होना चाहिए। ये बात सिर्फ किसी एक समुदाय की नहीं पूरे देश के हित से जुड़ी हुई है। केसीआर ने कहा कि केंद्र सरकार को इन प्रस्तावों पर पुन: विचार करना चाहिए।
बता दें कि नागरिकता संशोधन कानून के संसद में पास होने के बाद से ही असम और पूर्वोत्तर सहित देशभर में इसके खिलाफ विरोध प्रदर्शन शुरू हो गया था। दिल्ली के शाहीन बाग़ में बीते तीन महीने से अधिक समय से महिलाएं इस कानून के खिलाफ धरने पर बैठी हुई हैं. वहीं शाहीन बाग़ के आधार पर मुंबई, लखनऊ, इलाहाबाद सहित देश के कई शहरों पर महिलाएं धरने पर बैठ गई हैं।
एक तरफ देश के कई हिस्सों में आज भी इस कानून के खिलाफ धरना प्रदर्शन जारी है, वहीं कई राज्यों ने इस कानून के खिलाफ विधानसभा में प्रस्ताव पारित कर चुके हैं. इस कानून के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में दर्जनों याचिकाएं दायर हुई है. किन्तु केंद्र की मोदी सरकार इस कानून पर एक कदम भी पीछे हटने के तैयार नहीं है।
बीते गुरुवार को संदस में इस मसले पर जबर्दस्त बहस देखने को मिली थी। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने राज्य सभा में विपक्षी नेताओं पर सीएए और एनपीआर के मसले पर मुसलमानों को गुमराह करने का आरोप लगाया था। उन्होंने कहा था कि यह भ्रम फैलाया गया कि सीएए से उनकी नागरिकता छिन जाएगी।
बता दें कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने गुरुवार (12 मार्च) को राज्यसभा में जानकारी दी थी कि राष्ट्रीय जनसंख्या पंजी (एनपीआर) को अपडेट करने के लिए किसी तरह के दस्तावेज को दिखाने की जरूरत नहीं है और जो कुछ जानकारी मांगी जा रही है वो वैकल्पिक हैं।
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