हिन्दी पट्टी के युवाओं तुम्हें कैसे अंधेरे से निकाला जाए?

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27 November 2019 (Publish: 02:35 PM IST)

यूनिवर्सिटी ऑफ़ कैलिफ़ोर्निया, बर्कली के केमोस्ट्री डिपार्टमेंट में पढ़ाने वाले या पढ़ कर जा चुके 17 छात्रों को रसायन शास्त्र में शोध के लिए नोबेल पुरस्कार मिला है। डिपार्टमेंट के बाहर उन सभी 17 नोबेल पुरस्कार विजेताओं की तस्वीर लगी है। यही नहीं जिन्हें नोबेल नहीं मिला मगर अमरीका के राष्ट्रपति से सर्वोच्च पुरस्कार मिला है उनकी भी तस्वीरें हैं। उस प्रोफ़ेसर लुईस पर क्या गुज़री होगी जिसे नोबेल के लिए चालीस बार नामांकित किया गया मगर नहीं मिला। उसके चार चार छात्रों को नोबेल मिला। लुईस की संदिर्ध स्थिति में मौत हो गई। कोई कहता है आत्महत्या थी कोई कहता है हत्या।

लुईस की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना करता हूँ। यूनिवर्सिटी कैंपस में नोबेल पुरस्कार विजेता प्रोफ़ेसरों के लिए पार्किंग रिज़र्व है। NL RESERVED लिखा है। वैसे आम प्रोफ़ेसरों को पार्किंग के 1500 डॉलर देने पड़ते हैं! आप नोबेल जीत कर अपने लिए फ़्री पार्किंग हासिल करते हैं !

यूनिवर्सिटी ऑफ़ कैलिफ़ोर्निया, बर्कली जनता के पैसे से चलती है। पब्लिक यूनिवर्सिटी है। अब कुछ विभाग अपने स्तर पर फंड लाते हैं क्योंकि फंड में कटौती हो रही है लेकिन इस यूनिवर्सिटी को यहाँ तक लाने में टैक्स पेयर के पैसे ने ही मदद की। जहां प्रोफ़ेसर किसी चीज़ पर तीस तीस साल रिसर्च करते रहे।

भारत में हिन्दी प्रदेश के युवाओं को यह कह कर मूर्ख बनाया गया कि जे एन यू के छात्र 35 साल की उम्र तक वहाँ क्या करते हैं ? क्या रिसर्च करते हैं? कुछ तो शर्म करो दोस्तों। हिन्दी पट्टी के युवाओं तुम्हें कैसे अंधेरे से निकाला जाए ? तुम्हीं बताओ तुम्हें कौन सा क़िस्सा सुनाया जाए? इन नेताओं का कुछ तो करो जो मर्सिडीज़ कार में आते हैं, पाँच सितारा होटलों में ठहरते हैं और कहते हैं कि किसानों के लिए सरकार बना रहे हैं।

जब तुम्हारे लिए कालेज और लाइब्रेरी की बात होती है तो हंसते हैं। सब्सिडी का पैसा गिनते हैं। 950000 करोड़ के ग़बन का आरोपी उप मुख्यमंत्री बना है। आख़िर तुम्हारे ही दम पर इन नेताओं के आगे आयोग से लेकर अदालतें रेंग रही हैं। तुम्हारी हैसियत लगातार कमज़ोर होती जा रही है। कुछ तो स्वाभिमान पैदा करो। देखो तो दुनिया ज्ञान के क्षेत्र में क्या कर रही है।

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