नई दिल्ली: (रुखसार अहमद) लावारिस लाशों के वारिस के रूप में मशहूर अयोध्या के समाजसेवी मोहम्मद शरीफ चाचा को सोमवार की शाम दिल्ली में राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने पद्मश्री सम्मान से नवाजा। यह सम्मान उन्हें समाजसेवा के क्षेत्र में काम करने के लिए दिया गया है। इस सम्मान की घोषणा 25 जनवरी, 2020 को ही हुई थी। लेकिन कोरोनाकाल होने के कारण उस समय पुरस्कार वितरण कार्यक्रम का आयोजन नहीं हो सका।
करीब डेढ़ साल बाद उन्हें इस सम्मान से नवाजा गया है। मोहम्मद शरीफ को पद्मश्री सम्मान मिलने पर जिले के लोगों में खुशी की लहर है। दो साल पूर्व भारत सरकार की ओर से पद्म पुरस्कारों के लिए की गई घोषणा में अयोध्या के मोहम्मद शरीफ का नाम भी शामिल है।
मोहम्मद शरीफ पिछले कई सालों से बिना किसी प्रकार के धार्मिक भेदभाव के लावारिस लाशों का अंतिम संस्कार कर रहे हैं। पद्म श्री अवॉर्ड के लिए अपने नाम घोषणा होने के बाद मोहम्मद शरीफ कहते हैं, ’27 साल पहले सुल्तानपुर में मेरे बेटे की मौत हो गई थी, उसकी लाश लावारिस में दाखिल हुई थी और मुझे इसके बारे में एक महीने बाद पता चला था। उसके बाद मैंने इस काम को अपने हाथ में ले लिया। मैंने अब तक हिंदुओं के 3000 और मुसलमानों के 2500 शवों का अंतिम संस्कार किया है।
बता दें कि मोहम्मद शरीफ जिले में लावारिस लाशों के वारिस के रूप में जाने जाते हैं। पेशे से साइकिल मिस्त्री मोहम्मद शरीफ अयोध्या की जिला अस्पताल में लावारिस लोगों की सेवा करते हैं। वहीं, बीमार और दुर्घटना में मारे गए लावारिस लोगों के शव को अंतिम संस्कार करने का काम भी लंबे समय से करते चले आ रहे हैं।
वैसे तो समाजसेवी मोहम्मद शरीफ मुस्लिम धर्म से जुड़े हैं और शहर के रिकाबगंज क्षेत्र स्थित ताड़ की तकिया कब्रिस्तान के अंदर एक कमरे में रहते हैं। लेकिन शरीफ चाचा के जेहन में सभी धर्मों के लिए पूरा सम्मान है। यही वजह है कि अगर उन्हें जानकारी मिलती है कि किसी व्यक्ति का लावारिस शव पाया गया है तो वह उस शव का अंतिम संस्कार उसी रीति-रिवाज से करते हैं, जिस धर्म से मृत व्यक्ति जुड़ा होता है।
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