नई दिल्ली, मध्यप्रदेश के भोपाल में करीब 20 फीट गहरे सीवेज टैंक में उतरने पर दो लोगों की मौत हो गई। पुलिस ने रस्सी से बांधकर लाशों को बाहर निकाला। सरकार ने इस मामले की जांच के आदेश दे किए है।
इस मामले में 24 घंटे में रिपोर्ट मांगी गई है। एक मृतक 18 साल का छात्र है, जो झाबुआ से पिता के पास भोपाल आया था। 2019 में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि दुनिया के किसी भी देश में लोगों को गैस चैंबर में मरने के लिये नहीं भेजा जाता है। लोग रोज मर रहे हैं।
इंसानों को इस तरह मरने के लिए छोड़ा नहीं जा सकता। उनके जीवन की रक्षा के लिए सरकारों ने क्या किया है? उनके पास सुरक्षात्मक गियर, मास्क, ऑक्सीजन सिलेंडर भी नहीं हैं। दुनिया के किसी अन्य हिस्से में ऐसा नहीं होता है।
13 दिसंबर को भोपाल में जो हुआ वो सर्वोच्च अदालत के आदेश का साफ तौर पर उल्लंघन था। भोपाल नगर निगम के जोन नंबर-1 के लाऊखेड़ी में एक निजी कंपनी सीवेज का काम कर रही है, सीवेज लाइन अभी बंद है, लेकिन उसमें बारिश और घरों से निकलने वाला गंदा पानी भर गया। सोमवार को कंपनी के इंजीनियर दीपक सिंह और एक अन्य मजदूर जांच करने के लिए गए थे, बाहर उनकी लाश ही आई। थाना प्रभारी अरूण शर्मा ने कहा मर्ग कायम कर जांच कर रहे हैं।
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