चाईजुर रहमान/मिल्लत टाइम्स,गुवाहाटी,13 जुन: असम मे विदेशी समस्या की समाधान के लिए एन आर ची का काम माननीय उच्चतम न्यायालय के आदेश और देखरेख मे चल रहे है। इस बिच भारतीय सेना का रिटायर्ड अफसर को विदेशी घोषित कर डिटेनशन कैम्प मे भेजा जाने पर पुरे असम मे माहोल गर्मी पर उठा। हालांकि सेना की मुख्य कार्यालय के हस्तक्षेप मे रिटायर्ड आर्मी अफसर को डिटेनशन कैम्प से मुक्त किया गया। गौरतलब है कि भारतीय सेना के रिटायर्ड कैप्टन सोना उल्लाह को बिदेशी न्यायाधिकरण द्वारा बिदेशी घोषित करार दिया गया था। पिछले 28 मई से 7 जुन तक उन्हे गोवालपारा डिटेनशन कैम्प मे रहना पड़ा।
1987–2017 तक भारतीय सेना मे सेवा के दौरान सोना उल्लाह को राष्ट्रपति का मेडल भी मिला था। डिटेनशन कैम्प से चुटने के बाद मिल्लत टाइम्स से हुई बातचीत मे उन्होंने कहा कि भारत की न्याय व्यवस्था सभी नागरिक के लिए समान होना चाहिए।
मै भारतीय सेना मे था और मेरे पास मौका था इसलिए मुझे न्याय मिला एसा नही बल्की नागरिकता के लिए बिदेशी न्यायाधिकरण से जुॅज रहे निर्दोष और प्रकृत भारतीय को न्याय मिलना चाहिए। उन्होने कहा की डिटेनशन कैम्प मे सिर्फ दो फुट जगह पर रहने दिया जाता है और खाना-पीना का कोई अच्छा सुविधा नही है। इसका सुधार होना चाहिए।।
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