पुलिसवालों ने मुझ पर बरसाई ताबड़तोड़ लाठियां, बोले- तूझे कूट-कूट कर बनाएंगे बड़ा रिपोर्टर :मनदीप पुनिया

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05 February 2021 (Publish: 11:11 AM IST)

नई दिल्ली: सिंघु बॉर्डर पर किसानों के प्रदर्शन को कवर करने गए स्वतंत्र पत्रकार मनदीप पुनिया दिल्ली पुलिस द्वारा गिरफ्तार कर लिया गया था। लेकिन दिल्ली की एक अदालत ने हाल ही में जमानत दे दी. रिहाई के बाद पुनिया ने मीडिया से बातचीत में बताया कि उन्होंने सिंघु बॉर्डर पर किसानों पर पथराव करने वालों के बारे में बताया था. जिसके बाद उनकी गिरफ्तारी हुई. उन्होंने गिरफ्तारी वाले दिन की घटना को याद करते कहा कि मैं बैरिकेड के पास खड़ा होकर रिपोर्ट कर रहा था. वहां कुछ प्रवासी मजदूर थे, जो निकलने की कोशिश कर रहे थे. पुलिसवाले उन्हें लगातार गालियां दे रहे थे. पुलिसकर्मियों ने पहले पत्रकार धर्मेंद्र को खींच लिया. मैंने उन्हें रोकने की कोशिश की तो उन्होंने कहा कि ये रहा मनदीप पुनिया इसे भी खींच लो. उन्होंने मुझे भी खींच लिया और ताबड़तोड़ लाठियां बरसानी शुरू कर दी.

पुनिया ने बताया कि पुलिसवाले कह रहे थे कि इसको तो हम रिपोर्ट करवाएंगे. कई दिनों से उछल रहा है. कूट कूटकर बड़ा रिपोर्टर बनाएंगे. फिर मुझे टैंट में ले गए वहां भी मारा. मेरा कैमरा और फोन तोड़ दिया. उसके बाद मुझे सफेद स्कॉर्पियो में डालकर अलग-अलग थानों में घुमाने लगे. फिर रात को दो बजे मेडिकल करवाने ले गए. वहां भी डॉक्टर से बार बार बोल रहे थे कि ये स्टाफ का मामला है आप देख लीजिए. मगर डॉक्टर ने शायद वीडियो देखा होगा. उन्होंने पुलिसवालों को कहा कि आप पीछे हट जाएं. मैं इसका पूरा मेडिकल करूंगा. मैं डॉक्टर को धन्यवाद देना चाहता हूं. सारे मेडिकल के बाद साढ़े 3 बजे मुझे समयपुर बादली हवालात में बंद कर दिया गया.

मनदीप पुनिया ने कहा कि जब किसानों पर पथराव हुए थे तो मैंने उसकी रिपोर्टिंग कि थी सारे लोगो कि फेसबुक id निकल कर दिखाया था कि यह सारे लोग बीजेपी के ही है कई तो उसमे पदाधिकारी भी थे उसके बाद ही मुझको गिरफ्तार कर लिया गया।
मनदीप ने कहा कि मैंने जेल में भी रिपोर्टिंग कि मेरे बैरक में कुछ किसान भी थे उन्होंने अपना घाव मुझे दिखाया कि किस तरह से उन्हें मारा गया है मई उन लोगो कि बातें अपने जिस्म पर लिख ली जो किसान जेल में हैं सब के हौसले बुलंद हैं।

पत्रकारों को डरना नहीं चाहिए
मैं कहना चाहूंगा कि मैं ग्राउंड ज़ीरो, से रिपोर्ट कर रहा था कई लोगों को सरकार ने जेल में डाल रखा है. कप्पन साहब तो जेल में हैं, इन सब को रिहा किया जाए. मैं ज़रूर सिंघु बॉर्डर जाऊँगा. जिस संवेदनशीलता से किसान आंदोलन को कवर करने की ज़रूरत है वो करूंगा, जो भी सत्ता की कमज़ोरी उजागर करता है उसको गिरफ़्तार कर लिया जाता है. चाहे उत्तर प्रदेश में मिड डे मील में नमक रोटी देने की घटना हुई हो, उस पत्रकार को गिरफ़्तार किया गया. कप्पन साहब जेल में है. पत्रकार को डरना नहीं चाहिए. जितना सरकार आपको दबाती हैं उतनी ही तेज़ी से स्प्रिंग की तरह पत्रकार को उछालकर काम करना चाहिए. सरकार हमारी क़लम से डरती है, इसलिए हमें अपनी क़लम रुकना नहीं चाहिए.

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