नई दिल्ली : त्रिपुरा में हिंसा मामले में हाई कोर्ट ने संज्ञान लिया है। अदालत ने राज्य की सरकार से कहा है कि वह इस संबंध में 10 नवंबर तक हलफ़नामा दायर करे। वहीं कोर्ट ने पूछा हलफनामे में सरकार को इलाके में शांति कायम करने के लिए उठाए गए कदमों और जांच की स्थिति की जानकारी देनी होगी।
त्रिपुरा के पानीसागर और कुछ अन्य इलाक़ों में हुई सांप्रदायिक हिंसा की घटनाओं को लेकर सोशल मीडिया पर भी ख़ासी बहस हो रही है। हिंसा की ये घटनाएं पानीसागर के साथ ही ऊनाकोटी और सिपाहीजाला जिलों में भी हुई थीं।
राज्य सरकार ने मुख्य न्यायाधीश इंद्रजीत महंती और न्यायमूर्ति सुभाशीष तलपात्रा की बेंच को बताया कि उसने पानीसागर में विश्व हिंदू परिषद (विहिप) की रैली के मद्देनज़र ज़रूरी पुलिस इंतजाम किए थे। विहिप ने यह रैली बांग्लादेश में हिंदू मंदिरों और दुर्गा पूजा के पंडालों पर हुए हमलों के विरोध में 26 अक्टूबर को बुलाई थी।
राज्य सरकार ने अदालत को बताया कि इस रैली के दौरान दो समुदाय के लोगों में झगड़ा हुआ और इसके बाद मामला पुलिस में पहुंच गया। अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों ने आरोप लगाया कि उनकी तीन दुकानों को जला दिया गया और तीन घरों में तोड़फोड़ की गई। इसके अलावा एक मसजिद में भी तोड़फोड़, चोरी और महिलाओं के साथ अभद्रता करने का आरोप लगाया गया है।
जबकि दूसरी ओर से की गई शिकायत में आरोप लगाया गया है कि विहिप की रैली पर हमला किया गया। राज्य सरकार ने अदालत को बताया कि तमाम आरोपों की जांच की जा रही है।
बता दें त्रिपुरा में विश्व हिंदू परिषद के कार्यकर्ताओं ने एक रैली के दौरान जमकर उपद्रव मचाया था। यह रैली 21 अक्टूबर को निकाली थी। लेकिन अब तक इस हिंसा को रोकने में पुलिस भी नाकाम रही थी। वह मस्जिदों में तोड़फोड़ और मुसलमानों की दुकान में आग लगा रहे है। ये घटना वीएचपी की रैली के दौरान हुई थी। इस हिंसा में 21 मजिस्दों को निशाना बनाया गया। कई मुसलमानों के घरों और दुकानों में तोड़फोड़ की गई थी।
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