कर्नाटक सरकार ने 13 मई को बड़ा फैसला लेते हुए फरवरी 2022 के उस विवादित आदेश को रद्द कर दिया है, जिसके तहत स्कूलों और प्री-यूनिवर्सिटी कॉलेजों में हिजाब सहित धार्मिक प्रतीकों पर रोक लगा दी गई थी।
अब छात्र-छात्राएं तय यूनिफॉर्म के साथ हिजाब, पगड़ी, जनेऊ, रुद्राक्ष, शिवधारा और अन्य पारंपरिक धार्मिक प्रतीक पहन सकेंगे, बशर्ते इससे अनुशासन, सुरक्षा या पहचान में कोई बाधा न आए।
2022 के आदेश पर लगी रोक
5 फरवरी 2022 को जारी आदेश में सरकारी, सरकारी सहायता प्राप्त और निजी शिक्षण संस्थानों में यूनिफॉर्म को सख्ती से लागू करने का निर्देश दिया गया था। इसके बाद हिजाब विवाद ने राष्ट्रीय स्तर पर राजनीतिक और कानूनी बहस को जन्म दिया था।
मार्च 2022 में कर्नाटक हाईकोर्ट ने कहा था कि हिजाब इस्लाम का अनिवार्य धार्मिक अभ्यास नहीं है। बाद में मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, जहां दो जजों की पीठ ने अलग-अलग राय दी और मामला बड़ी पीठ को भेज दिया गया। यह मामला अभी भी लंबित है।
सरकार ने क्या कहा?
नए आदेश में राज्य सरकार ने कहा कि धर्मनिरपेक्षता का अर्थ किसी की निजी आस्था का विरोध करना नहीं है, बल्कि सभी धर्मों के प्रति समान सम्मान और निष्पक्ष व्यवहार सुनिश्चित करना है। सरकार के अनुसार, सीमित धार्मिक प्रतीकों की अनुमति देने से संस्थानों का अनुशासन प्रभावित नहीं होगा और छात्रों के संवैधानिक अधिकारों का सम्मान भी बना रहेगा।
सरकार ने स्पष्ट किया है कि अनुमत धार्मिक प्रतीक पहनने वाले किसी भी छात्र को प्रवेश, परीक्षा, पढ़ाई या अन्य शैक्षणिक गतिविधियों से वंचित नहीं किया जाएगा। किसी छात्र को ऐसे प्रतीक हटाने के लिए मजबूर भी नहीं किया जा सकेगा। हालांकि, राष्ट्रीय और राज्य स्तर की प्रतियोगी परीक्षाओं में सुरक्षा कारणों से निर्धारित ड्रेस कोड लागू किया जा सकेगा।
स्कूल प्रबंधन समितियों, कॉलेज प्रशासन और संस्थानों के प्रमुखों को निर्देश दिया गया है कि धार्मिक प्रतीक पहनने वाले छात्रों को अपमानित या परेशान न किया जाए।
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