नई दिल्ली: रूस के यूक्रेन पर जारी हमले के दौरान बढ़ते शरणार्थी संकट के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने रूस से तेल के आयात पर प्रतिबंध लगा दिया है। मंगलवार को बाइडेन ने इस बात का ऐलान किया है।
अमेरिका ने रूस से तेल आयात पर बैन लगा दिया है। राष्ट्रपति जो बाइडेन ने मंगलवार को इसकी घोषणा की। सुरक्षा विशेषज्ञ इस कदम को बहुत बड़ी कार्रवाई मानते हुए कह रहे हैं कि यही एक ऐसा कदम है जो रूस को कदम पीछे हटाने पर मजबूर कर सकता है।
हालांकि माना जा रहा है कि इस कार्रवाई का असली असर तभी होगा जबकि यूरोपीय देश भी इसे लागू करें। लेकिन फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि कितने यूरोपीय देश यह कदम उठा पाएंगे। ब्रिटेन ने मंगलवार को कहा है कि वह साल के आखिर तक रूस से तेल का आयात चरणबद्ध तरीके से बंद कर देगा।
अमेरिका के मुकाबले रूस पर यूरोप की ऊर्जा निर्भरता कहीं ज्यादा है। सऊदी अरब के बाद रूस दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा तेल निर्यातक है। लेकिन अमेरिका उससे थोड़ी मात्रा में ही तेल आयात करता है जिसका विकल्प खोजना आसान है। लेकिन यूरोप के लिए निकट भविष्य में तो ऐसा करना आसान नहीं दिखता।
युद्ध में भी यूक्रेन के रास्ते बड़े स्तर पर हो रही है रूसी गैस आपूर्ति एक और खतरा तेल कीमतों में बेतहाशा वृद्धि हुई है। यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद से ही दुनियाभर में तेल की कीमतें आसमान छू रही हैं। अगर रूस से आयात बंद कर दिया जाता है तो उपभोक्ताओं, उद्योगों और वित्तीय बाजारों के लिए बड़ी मुश्किलें खड़ी हो सकती हैं, जिसका असर अंतरराष्ट्रीय अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा। अमेरिकी प्रतिबंध का असर अमेरिका में गैसोलिन के दाम ऐतिहासिक ऊंचाई पर हैं।
बाइडेन प्रशासन ने यूक्रेन की मांग मानते हुए रूस से तेल आयात पर प्रतिबंध का ऐलान किया है। हालांकि रूस पर इसका बहुत ज्यादा असर होने की संभावना नहीं है क्योंकि अमेरिका बहुत कम तेल रूस से खरीदता है और प्राकृतिक गैस तो बिल्कुल नहीं लेता है।
पिछले साल अमेरिका के कुल पेट्रोलियम आयात का सिर्फ 8 प्रतिशत रूस से आया था। 2021 में इसकी मात्रा 24.50 करोड़ बैरल थी, यानी लगभग 6,72,000 बैरल प्रतिदिन। लेकिन रूस से आयात रोजाना घट रहा है क्योंकि खरीदार भी रूसी तेल को ना कह रहे हैं। लेकिन रूस पर फिलहाल इसका ज्यादा असर नहीं होगा क्योंकि इतनी ही मात्रा में वह अपना तेल कहीं और बेच सकता है। चीन और भारत उसके संभावित ग्राहक हैं।
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