आजम खान के ड्रीम प्रोजेक्ट जौहर यूनिवर्सिटी पर बुलडोजर एक्शन की तैयारी, 38 इमारतों को गिराने का आदेश

Millat Times Staff

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16 July 2026 (Publish: 07:36 AM IST)

समाजवादी पार्टी (सपा) के वरिष्ठ नेता आजम खान के ड्रीम प्रोजेक्ट मौलाना मोहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय पर बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई की तैयारी शुरू हो गई है। रामपुर विकास प्राधिकरण (आरडीए) ने विश्वविद्यालय परिसर की 40 में से 38 इमारतों को अवैध निर्माण मानते हुए उन्हें 20 दिनों के भीतर स्वयं हटाने का आदेश दिया है। यदि तय समय में ऐसा नहीं किया गया, तो आरडीए बुलडोजर चलाकर इन भवनों को ध्वस्त करेगा और कार्रवाई का पूरा खर्च विश्वविद्यालय प्रबंधन से वसूला जाएगा।

व्यक्तिगत सुनवाई के बाद जारी हुआ आदेश

आरडीए की ओर से पहले विश्वविद्यालय प्रबंधन को नोटिस जारी किया गया था। इसके बाद निर्धारित व्यक्तिगत सुनवाई में विश्वविद्यालय के डिप्टी रजिस्ट्रार, अधिवक्ता और अन्य प्रतिनिधि डीएम एवं आरडीए के उपाध्यक्ष अजय कुमार द्विवेदी के सामने पेश हुए। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद आरडीए ने विश्वविद्यालय प्रबंधन के जवाब को असंतोषजनक मानते हुए 38 भवनों को अवैध घोषित कर ध्वस्तीकरण का आदेश जारी कर दिया।

आरडीए ने क्यों माना निर्माण अवैध?

डीएम अजय कुमार द्विवेदी के अनुसार, क्षेत्रीय अवर अभियंता की रिपोर्ट के आधार पर विश्वविद्यालय के निर्माण की जांच शुरू की गई थी। जांच में पाया गया कि मेडिकल भवन और अकादमिक ब्लॉक को छोड़कर बाकी 38 इमारतों का निर्माण किसी सक्षम प्राधिकारी से मानचित्र स्वीकृत कराए बिना किया गया।

आरडीए का कहना है कि जब विश्वविद्यालय ने मेडिकल भवन और अकादमिक ब्लॉक का नक्शा जिला पंचायत से स्वीकृत कराया था, तो बाकी इमारतों का नक्शा क्यों नहीं पास कराया गया। इससे स्पष्ट होता है कि विश्वविद्यालय प्रबंधन को नियमों की जानकारी थी।

विश्वविद्यालय ने सुनवाई में क्या दलील दी?

विश्वविद्यालय प्रबंधन ने सुनवाई के दौरान कहा कि जौहर विश्वविद्यालय राजस्व ग्राम सींगनखेड़ा में स्थित है, जिसे 27 सितंबर 2024 से पहले रामपुर विकास प्राधिकरण के विकास क्षेत्र में शामिल नहीं किया गया था। इसलिए उस समय आरडीए से नक्शा पास कराने की आवश्यकता नहीं थी। प्रबंधन का यह भी कहना था कि निर्माण काफी पुराने हैं और वर्तमान नियमों के आधार पर उन्हें अवैध नहीं माना जा सकता।

विश्वविद्यालय ने यह भी दलील दी कि वर्ष 2017 में तत्कालीन जिलाधिकारी द्वारा गठित समिति ने निर्माण की लागत 147.20 करोड़ रुपये आंकी थी, जबकि अब इसे करीब 2000 करोड़ रुपये बताया जा रहा है, जो तथ्यों पर आधारित नहीं है। इसलिए आरडीए का नोटिस अधिकार क्षेत्र से बाहर जारी किया गया है और इसे निरस्त किया जाना चाहिए।

आरडीए ने दलीलें क्यों खारिज कीं?

आरडीए ने विश्वविद्यालय की दलीलों को स्वीकार नहीं किया। प्राधिकरण ने कहा कि भले ही उस समय सींगनखेड़ा गांव आरडीए क्षेत्र में शामिल नहीं था, लेकिन विश्वविद्यालय ने दो भवनों का मानचित्र जिला पंचायत से स्वीकृत कराया था। इससे यह साबित होता है कि निर्माण के लिए स्वीकृति लेने की प्रक्रिया की जानकारी विश्वविद्यालय प्रबंधन को थी।

इसी आधार पर उत्तर प्रदेश नगर नियोजन एवं विकास अधिनियम, 1973 की धारा 27(1) के तहत 38 भवनों को अवैध घोषित करते हुए ध्वस्तीकरण का आदेश पारित किया गया।

15 दिन का समय, फिर चलेगा बुलडोजर

आदेश में कहा गया है कि विश्वविद्यालय प्रबंधन 15 दिनों के भीतर इन भवनों को स्वयं हटाकर आरडीए को सूचित करे। यदि ऐसा नहीं किया गया, तो निर्धारित अवधि पूरी होने के बाद आरडीए स्वयं ध्वस्तीकरण की कार्रवाई करेगा। इस कार्रवाई पर होने वाला पूरा खर्च उत्तर प्रदेश नगर नियोजन एवं विकास अधिनियम की धारा 40 के तहत भू-राजस्व की तरह विश्वविद्यालय प्रबंधन से वसूला जाएगा।

ध्वस्तीकरण के बाद सिर्फ दो भवन बचेंगे

यदि आरडीए का आदेश लागू होता है तो विश्वविद्यालय परिसर में केवल मेडिकल भवन और अकादमिक ब्लॉक ही बचेंगे। बाकी सभी 38 भवनों को ध्वस्त कर दिया जाएगा।

82 हजार वर्गमीटर से अधिक क्षेत्र में फैली हैं 38 इमारतें

आरडीए के आदेश के मुताबिक जिन 38 भवनों को अवैध घोषित किया गया है, उनका कुल क्षेत्रफल 82,309.80 वर्गमीटर है। आदेश में कहा गया है कि मेडिकल भवन और अकादमिक ब्लॉक को छोड़कर शेष सभी निर्माण बिना मानचित्र स्वीकृति या वैधानिक अनुमति के कराए गए हैं।

क्या है मौलाना मोहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय?

मौलाना मोहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय (Mohammad Ali Jauhar University) उत्तर प्रदेश के रामपुर जिले में स्थित एक निजी (प्राइवेट) विश्वविद्यालय है। इसकी स्थापना वर्ष 2006 में उत्तर प्रदेश विधानमंडल द्वारा पारित अधिनियम के तहत की गई थी। विश्वविद्यालय का संचालन मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट करता है और इसका नाम महान स्वतंत्रता सेनानी, पत्रकार तथा शिक्षाविद् मौलाना मोहम्मद अली जौहर के सम्मान में रखा गया है।

विश्वविद्यालय के संस्थापक समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम खान हैं, जो लंबे समय तक इसके कुलाधिपति (चांसलर) भी रहे। यह परिसर रामपुर शहर से करीब 12 किलोमीटर दूर स्थित है और 250 एकड़ से अधिक क्षेत्र में फैला हुआ है। परिसर में आधुनिक शैक्षणिक भवन, पुस्तकालय, प्रयोगशालाएं, छात्रावास, खेल सुविधाएं और अन्य शैक्षणिक संसाधन उपलब्ध हैं।

विश्वविद्यालय में स्नातक (UG), स्नातकोत्तर (PG) और पीएचडी स्तर तक शिक्षा दी जाती है। यहां इंजीनियरिंग एवं प्रौद्योगिकी, कानून, शिक्षा, वाणिज्य, विज्ञान, कृषि, फार्मेसी, पैरामेडिकल, नर्सिंग, प्रबंधन और मानविकी समेत कई संकाय संचालित हैं।

हालांकि, स्थापना के बाद से विश्वविद्यालय कई बार विवादों में भी रहा है। भूमि अधिग्रहण, निर्माण कार्यों और प्रशासनिक मामलों को लेकर समय-समय पर जांच और कानूनी कार्रवाई होती रही है।

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