‘नफ़रत की आँधियों में मोहब्बत के चिराग़ जलाने निकले हैं’… लखनऊ में हिंदू-मुस्लिम एकता सम्मेलन में बोले मौलाना अरशद मदनी

Millat Times Staff

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18 July 2026 (Publish: 01:24 PM IST)

लखनऊ, 18 जुलाई 2026: जमीयत उलमा-ए-हिन्द उत्तर प्रदेश की ओर से शनिवार को लखनऊ के अटल बिहारी वाजपेयी साइंटिफिक कन्वेंशन सेंटर में ‘हिंदू-मुस्लिम एकता सम्मेलन’ का आयोजन किया गया। सम्मेलन में जमीयत उलमा-ए-हिन्द के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी, संकट मोचन मंदिर के महंत डॉ. बिशंभर नाथ मिश्र, वरिष्ठ अधिवक्ता इंदिरा जय सिंह समेत विभिन्न धर्मों के धार्मिक नेताओं, बुद्धिजीवियों और सामाजिक हस्तियों ने हिस्सा लिया।

‘नफ़रत की राजनीति ने देश को दोराहे पर ला खड़ा किया’

सम्मेलन को संबोधित करते हुए मौलाना अरशद मदनी ने कहा कि देश में सांप्रदायिक शक्तियों ने सामाजिक माहौल को पूरी तरह खराब कर दिया है। उन्होंने कहा कि पहले केवल मुसलमान निशाने पर थे, लेकिन अब इस्लाम को भी निशाना बनाया जा रहा है। उनके मुताबिक नफ़रत की राजनीति ने देश को ऐसे मोड़ पर पहुंचा दिया है, जहां से बाहर निकलने के लिए समाज के सभी वर्गों को मिलकर प्रयास करने होंगे।

उन्होंने कहा कि जमीयत उलमा-ए-हिन्द ने सांप्रदायिकता और नफ़रत के खिलाफ एक व्यापक जनअभियान शुरू किया है और लखनऊ का यह सम्मेलन उसी अभियान का पहला चरण है।

‘मोहब्बत के चिराग़ जलाने निकले हैं’

मौलाना मदनी ने कहा, “नफ़रत की इन तेज़ आँधियों में हम मोहब्बत के चिराग़ जलाने निकले हैं।” उन्होंने लोगों से इस मुहिम का हिस्सा बनने की अपील करते हुए कहा कि परिस्थितियां चाहे जितनी कठिन क्यों न हों, उम्मीद और इंसानियत का रास्ता नहीं छोड़ना चाहिए।

आजादी के आंदोलन का किया जिक्र

अपने संबोधन में मौलाना मदनी ने आजादी के आंदोलन का उल्लेख करते हुए कहा कि अंग्रेजों के खिलाफ पहली बुलंद आवाज़ दिल्ली के एक मदरसे से उठी थी। उन्होंने हजरत शाह अब्दुल अज़ीज़ मुहद्दिस देहलवी और 1857 के स्वतंत्रता संग्राम में उलेमा की कुर्बानियों का जिक्र करते हुए कहा कि नफ़रत के खिलाफ उठी आवाज़ को भी कोई ताकत दबा नहीं सकती।

‘जमीयत का राजनीति से कोई संबंध नहीं’

उन्होंने स्पष्ट किया कि जमीयत उलमा-ए-हिन्द एक धार्मिक संगठन है और उसका राजनीति से कोई संबंध नहीं है। संगठन न चुनाव लड़ता है और न किसी को चुनाव लड़ाता है। उसका उद्देश्य केवल देश में भाईचारा, एकता और इंसानियत का संदेश फैलाना है।

बाढ़ राहत और NRC का भी किया जिक्र

मौलाना मदनी ने कहा कि जमीयत ने हमेशा धर्म से ऊपर उठकर इंसानियत की सेवा की है। उन्होंने केरल और पंजाब में आई बाढ़ के दौरान राहत कार्यों तथा असम में NRC से प्रभावित लगभग 40 लाख लोगों के मामलों में कानूनी सहायता का उल्लेख करते हुए कहा कि संगठन ने बिना किसी धार्मिक भेदभाव के लोगों की मदद की।

पेपर लीक और जौहर यूनिवर्सिटी का मुद्दा भी उठाया

मौलाना मदनी ने कहा कि लगातार हो रहे पेपर लीक ने लाखों युवाओं का भविष्य प्रभावित किया है और ऐसी व्यवस्था में सुधार की जरूरत है।

रामपुर स्थित मौलाना मोहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय पर जारी ध्वस्तीकरण नोटिस का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि यदि भवन निर्माण में नियमों का उल्लंघन हुआ है तो कानून के तहत जुर्माना या अन्य वैधानिक कार्रवाई की जा सकती है, लेकिन पूरी इमारत गिरा देना उचित नहीं होगा। उन्होंने कहा कि ऐसा होने पर वहां पढ़ने वाले हजारों छात्रों का भविष्य प्रभावित होगा।

‘अन्याय के खिलाफ सभी को बोलना होगा’ : डॉ. बिशंभर नाथ मिश्र

सम्मेलन के मुख्य अतिथि और वाराणसी के संकट मोचन हनुमान मंदिर के महंत डॉ. बिशंभर नाथ मिश्र ने कहा कि देश की आजादी में सभी समुदायों का योगदान रहा है। उन्होंने कहा कि आज अन्याय के खिलाफ हर नागरिक को खुलकर आवाज़ उठानी होगी। उन्होंने मौलाना अरशद मदनी की मुहिम का समर्थन करते हुए कहा कि जहां भी जरूरत होगी, वे उनके साथ खड़े रहेंगे।

इंदिरा जय सिंह बोलीं– संविधान सभी को बराबरी देता है

वरिष्ठ अधिवक्ता इंदिरा जय सिंह ने कहा कि यह सम्मेलन देश में एकता, भाईचारे और संवैधानिक मूल्यों का संदेश देता है। उन्होंने कहा कि भारतीय संविधान सभी नागरिकों को समान अधिकार देता है और किसी भी प्रकार के भेदभाव की अनुमति नहीं देता।

उन्होंने कहा कि आज का सबसे बड़ा दुर्भाग्य यह है कि लोकतंत्र को दिशा दिखाने वाला बुद्धिजीवी वर्ग मौन है। हालांकि सम्मेलन में सभी धर्मों के लोगों की मौजूदगी ने उन्हें भरोसा दिलाया है कि देश की एकता को कोई कमजोर नहीं कर सकता।

देशभर में चलाया जाएगा अभियान

जमीयत उलमा-ए-हिन्द के उपाध्यक्ष मौलाना असजद मदनी ने सम्मेलन का घोषणा-पत्र पढ़कर सुनाया, जिसे उपस्थित लोगों ने हाथ उठाकर समर्थन दिया। उन्होंने कहा कि यह अभियान पूरी तरह गैर-राजनीतिक है और इसका उद्देश्य देशभर में प्रेम, भाईचारे, सामाजिक सौहार्द और विभिन्न समुदायों के बीच विश्वास को मजबूत करना है।

उन्होंने बताया कि आने वाले समय में देश के अलग-अलग राज्यों में भी ऐसे सम्मेलन आयोजित किए जाएंगे, जिनमें धार्मिक नेता, उलेमा, बुद्धिजीवी, कानून विशेषज्ञ, सामाजिक कार्यकर्ता, युवा और महिलाएं शामिल होकर राष्ट्रीय एकता और सामाजिक सद्भाव का संदेश देंगे।

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