मिल्लत टाइम्स,नई दिल्ली: जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी में तीन साल पुराना कथित देशद्रोह का मुद्दा एक बार फिर से गरमाया हुआ है। दरअसल दिल्ली पुलिस ने 9 फ़रवरी 2016 को हुई जेएनयू की घटना पर पूरे तीन साल बाद चार्जशीट जारी की है। जिसके बाद से यह ख़बर मीडिया की सुर्खी बन चुकी है और टीवी चैनलों पर एक बार फिर देशद्रोह की घमासान जारी हो गया है।
आपको याद होगा कि तीन साल पहले एक चैनल ने कन्हैया, उमर ख़ालिद और अनिर्बन की एक विडियो फूटेज जारी की थी जिसमें वे देशद्रोही नारा लगा रहे थे। हालाँकि इस विडियो फूटेज को फेंक बता दिया गया और अब उसी विडियो फूटेज के आधार पर पुलिस ने चार्जशीट जारी की है।
एबीवीपी सदस्यों ने लगाए थे नारे
एक और दिलचस्प बात इस मुद्दे पर अब यह आयी है की ख़ुद एबीवीपी के दो पूर्व सदस्यों ने बताया है कि देशद्रोह के नारे ख़ुद एबीवीपी के कार्यकर्ताओं ने लगाए थे और यह करने के लिए बक़ायदा साज़िश रची गयी थी।
प्रेस कॉनफ़्रेंस कर दी जानकारी
जेएनयू के दो पूर्व छात्र प्रदीप नारवाल और जतिन गोराइया घटना के समय एबीवीपी के छात्रनेता हुआ करते थे, जतिन उपाध्यक्ष थे जबकि प्रदीप जोईंट सेक्रेटरी थे। लेकिन 2016 में इन्होंने एबीवीपी से इस्तीफ़ा दे दिया था। दोनों छात्रों ने 16 जनवरी 2019 को प्रेस कॉनफ़्रेंस बुलाई और इंडियन एक्सप्रेस की ख़बर के अनुसार उन्होंने कहा कि घटना के समय ABVP के ही लोगों ने ‘पाकिस्तान ज़िंदाबाद’ का नारा लगाया. ये दोनों उस नारेबाज़ी का ज़िक्र कर रहे थे, जिसका कथित वीडियो एक न्यूज चैनल ने चलाया था. जतिन और प्रदीप का कहना है कि विडियो में नज़र आ रहे लोग भी ABVP से ही जुड़े हुए थे.
प्रदीप नारवाल का कहना है
“मैं और जतिन, दोनों दलित हैं. मुझे याद है कि घटना के समय हम दोनों से बार-बार कहा गया कि हम टीवी पर इंटरव्यू दें. रोहित वेमुला की आत्महत्या के बाद ABVP का बचाव करें. हमने ऐसा करने से इनकार कर दिया. क्योंकि वो लोग बार-बार वेमुला का ज़िक्र आतंकवादी कहकर करते थे. 9 फरवरी के कार्यक्रम में उन्हें अपने लिए मौका नज़र आया. कि इस बहाने वेमुला के मुद्दे से लोगों का ध्यान भटकाया जाए.”
एबीवीपी ने किए आरोप ख़ारिज
जतिन का दावा है कि 9 फरवरी के कार्यक्रम को लेकर JNU में ABVP के वॉट्सऐप ग्रुप पर जो बातें हुईं, उसका फोकस ही ये था कि किस तरह इस इवेंट पर कुछ भड़काऊ किया जाए. चूंकि जतिन और प्रवीण ABVP छोड़ चुके हैं, सो उनके इन आरोपों पर सवाल भी उठ रहे हैं.
जेएनयू के जॉइंट सेक्रटरी रह चुके सौरभ शर्मा भी ABVP से ही हैं. उन्होंने जतिन और प्रवीण के लगाए इल्ज़ामों पर प्रतिक्रिया करते हुए कहा-
“उन्होंने अब कांग्रेस जॉइन कर ली है. ये प्रेस कॉन्फ्रेंस राहुल गांधी के इशारों पर बुलाई गई. वो इस मुद्दे से लोगों का ध्यान भटकाना चाहते हैं. इसीलिए झूठ और दुष्प्रचार का सहारा ले रहे हैं.”
दिल्ली पुलिस की चार्जशीट में हैं ये सुबूत
सौरभ की कही बात कुछ हद तक सही है. प्रदीप नारवाल सच में ही कांग्रेस में आ गए हैं. मगर जतिन कांग्रेस के सदस्य नहीं हैं. इसी केस से जुड़ा एक और अपडेट है. इंडियन एक्सप्रेस में आनंद मोहन जे और प्रीतम पाल सिंह की रिपोर्ट छपी है. इसके मुताबिक, दिल्ली पुलिस ने इस मामले में जो चार्जशीट दाखिल की है, उसका एक अहम हिस्सा है छह मोबाइल फोन. और उनसे मिली वीडियो फुटेज. पुलिस ने राजद्रोह का केस खड़ा करने में ये तमाम चीजें इस्तेमाल की हैं. इनमें से कम से कम तीन फोन जेएनयू में ABVP से जुड़े लोगों के हैं. इनमें पूर्व और मौजूदा, दोनों तरह के मेंबर्स शामिल हैं. एक फोन पुलिस कॉन्स्टेबल का है. पुलिस ने अपनी चार्जशीट में ज़ी न्यूज़ की एक फुटेज का भी ज़िक्र किया है. इसके अलावा इसी चैनल के एक और प्रोग्राम का भी ज़िक्र है चार्जशीट में. इनका थोड़ा ब्योरा पॉइंट में जान लीजिए-
– जसप्रीत सिंह का आईफोन, जिसमें कथित तौर पर घटना के समय के 13 वीडियो थे.
-जेएनयू के पूर्व जॉइंट सेक्रटरी सौरभ शर्मा का मोबाइल, जिसमें 14 वीडियो थे. सौरभ भी ABVP के नेता हैं.
– जेएनयू में ABVP के पूर्व अध्यक्ष आलोक कुमार का माइक्रोमैक्स फोन, जिसमें 20 वीडियो हैं.
– ABVP के सदस्य ओंकार श्रीवास्तव का लेनेवो फोन और मेमरी कार्ड, जिसमें एक वीडियो है.
– जेएनयू के ही एक छात्र आनंद कुमार का मोबाइल.
– कॉन्स्टेबल धर्मवीर का सैमसंग जे-5 मोबाइल, जिससे 20 मिनट का वीडियो रिकॉर्ड किया गया था.
– जी न्यूज़ का एक वीडियो कैमरा, जिसमें रॉ फुटेज़ मिले.
– 10 फरवरी को जी न्यूज़ पर ऑन-एयर हुआ एक डिबेट प्रोग्राम. इसे भी पुलिस ने अपने सबूतों में गिना है!(इनपुट यूनिवर्सिटी)
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