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मिल्लत टाइम्स में काम करने वाले पत्रकारिता क्यों कर रहे हैं ?

नई दिल्ली : (रुखसार अहमद) मिल्लत टाइम्स के न्यूज़ रूम में एक परिचर्चा (Random discussion ) की गई । इस परिचर्चा को सुफियान सैफ ने होस्ट किया, जिसमें पत्रकारिता को लेकर चर्चा की गई। मिल्लत टाइम्स ने अपनी टीम से इस सवाल पर चर्चा कि वह पत्रकारिता में क्यों हैं ? इस सवाल पर सभी लोगों ने अपने विचार साझा किए और अपना अनुभव भी शेयर किया।

सबसे पहले शुरुआत मिल्लत टाइम्स के सीनियर रिपोर्टर ( हिंदी एडिटर ) असरार अहमद से हुई। उन्होंने अपने मीडिया में होने की वजह बताई। असरार ने बताया कि मुख्या धारा की मीडिया समाज में दबे कुचले लोगों की आवाज जनता तक नहीं पहुंचाती है, ऐसे लोगों की आवाज बनने के लिए उन्होंने मीडिया में कदम रखा है ।

साथ ही उन्होंने अपने फील्ड का अनुभव भी शेयर किया। असरार ने बताया कि जब वो दिल्ली दंगो में रिपोर्टिंग करने गए थे वहां कुछ लोगों ने उन्हें पकड़ लिया था। तब उन्हें लगा कि आखिर मीडिया में होने की क्या अहमियत और उसमें क्या-क्या खतरे उठाने पड़ सकते हैं। उनके साथ इस दौरान एक घटना भी घटी थी।

दंगाईयों ने उस समय असरार से कहा था कि अगर तुम मीडिया से हो तो पत्थर उठाओ और मुल्लों को मारो। उन्होंने बताया कि जो वहां की आम जनता थी सबको इसी तरीके से मारा जा रहा था। असरार पर हमला इसलिए नहीं किया गया क्योंकि उन्होंने अपनी पहचान मीडिया बताकर पहले ही कर दी थी।
इस बारे में शयान अशकर का कहना है कि मुख्य धारा की मीडिया एक ऐजंडे के तहत काम कर रही है, लेकिन मिल्लत टाइम्स कोई ऐजंडा के तहत काम नहीं करता। इसलिए उन्होंने मिल्लत टाइमस को ज्वाइन किया है।

जब यही सवाल एक महिला पत्रकार रुखसार अहमद से पुछा गया तो उन्होंने बताया की वह मीडिया में इसलिए हैं क्योंकि विशेष तौर पर मुस्लिम समुदाय और महिलाओं से जुड़े मुद्दो को दबाया जाता है और मेन स्ट्रीम मीडिया ऐसी खबरों को नहीं चलाता। इसलिए वह उनकी आवाज बनना चाहती हैं।

मिल्लत टाइम्स में काम करने वाले वीडियो एडिर मुजाहिद इस्लाम ने बताया की वह मीडिया में इसलिए हैं क्योंकि जिस क्षेत्र के वह रहने वाले हैं वहां बहुत कम बच्चों ने इस फील्ड को चुना है। मुजाहिद का बचपन से शौक था कि वह मीडिया में काम करें और लोगों की आवाज बनें।

मिल्लत टाइम्स में काम करने वाली सिद्दीका यासमीन का कहना है की ऐसी बहुत सी खबरे होती हैं जो मेन स्ट्रीम मीडिया नहीं उठाता। लेकिन मिल्लत टाइम्स ऐसी खबरों को दिखता है इसलिए उन्होंने मीडिया में विशेष तौर पर मिल्लत टाइम्स को ज्वाइन किया है।

काशिफ हसन मिल्लत टाइम्स में कंटेंट राइटिंग का काम करते है उनसे जब इस सवाल के बारे में पूछा गया कि वह मीडिया में क्यों हैं तो उन्होंने बताया जो राष्ट्र के लिए निस्वार्थ काम करते हैं उनकी संख्या बहुत कम है इसलिए मीडिया के ज़रिए से मैं राष्ट्र की सेवा करना चाहता हूं, मुझे लगता है यह जनसेवा करने का सबसे अच्छा तरीका है।

दानिश आलम ने मीडिया में होने की वजह बताई कि जब तक हम अपनी शिराकत दारी नहीं देगें तब तक हमें लोग नहीं जान पाएंगे। साथ ही उन्होंने बताया कि मिल्लत टाइम्स उन्होंने इसलिए ज्वाइन किया क्योंकि यहां बिना किसी रुकावट के अपनी बात रख सकते हैं। मेन स्ट्रीम मीडिया में आपको कई मामलों पर बोलने की मनाही होती है, लेकिन मिल्लत टाइम्स में आप अपने विचार खुलकर रख सकते हैं।

मीडिया में हम क्यों है इस सवाल पर मिल्लत टाइम्स के चीफ एडिटर शम्स तबरेज़ कासमी ने अपने विचार साझा किए। उन्होंने बताया की उनका मकसद ऐसे लोगों की आवाज बनना है जिन्हें मेन स्ट्रीम मीडिया दिखाता ही नहीं। विशेष तौर पर अल्पसंख्यक को लेकर नेगेटिव खबरों को चलाया जाता है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि हम केवल मुसलमानों की ही आवाज़ नहीं बल्कि किसान, दलित और गरीब लोगों की आवाज़ को हम अपने चैनल के माध्यम से दिखाते हैं। मुख्य धारा की मीडिया सिर्फ अपनी टीआरपी के लिए काम करती है और मुसलमानों, दलितो के मुद्दो के लिए ऐसा कोई प्लेटफार्म नहीं जहां उनकी आवज को उठाया जा सके। इसलिए मिल्लत टाइम्स ऐसे लोगों की आवाज़ बना है। उन्होंने कहा कि तमाम धमकी के बावजूद भी यहां के लोग बिना किसी डर के काम कर रहे हैं ।