सितामढ़ी:जिलाधिकारी एवं पूर्व पुलिस अधीक्षक पर हो हत्या का मुकदमा दर्जःबेदारी कारवाँ

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09 March 2019 (Publish: 07:51 PM IST)

जाँच रिपोर्ट आने के बाद भी आरोपी पुलिस वालों पर 302 का मुकदमा क्यों नहीं? असद रषीद/समिउल्लाह

मृतक के परिजन को एक-एक करोड़ मुआवाजा एवं परिवार के एक सदस्य को नौकरी दे नीतीश सरकार

प्रेस विज्ञप्ति: मधुबनी- आॅल इंडिया मुस्लिम बेदारी कारवाँ, मधुबनी ने पूर्वी चम्पारण के चकिया थाना क्षेत्र के रामडिहा निवासी मो0 गुफरान एवं मो0 तसलीम की पुलिस हिरासत में टार्चर कर निमर्म हत्या के विरोध में मधुबनी थाना मोड़ पर बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार एवं राज्य सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया। इस दौरान बेदारी कारवाँ के लोगों ने नीतीश सरकार मुर्दाबाद, अल्पसंख्यक विरोधी नीतीश सरकार हाय हाय, अल्पसंख्यकों की सुरक्षा नहीं तो वोट नहीं, अल्पसंख्यकों की सुरक्षा सुनिश्चित करो, बिहार एवं सितामढ़ी के मुसलमानों को टारगेट करना बन्द करो,

सितामढ़ी जिलाधिकारी एवं पुलिस अधीक्षक पर हत्या का मुकदमा दर्ज करो, मृतक के परिवार को एक एक करोड़ मुआवजा एवं एक एक व्यक्ति को सरकारी नौकरी दो आदि जमकर नारा लगा रहे थे और नीतीश सरकार को अल्पसंख्यक विरोधी सरकार भी बता रहे थे। विरोध प्रदर्शन के दौरान मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, सितामढ़ी वर्तमान जिलाधिकारी एवं पूर्व पुलिस अधीक्षक का थाना मोड़ पर पुतला दहन किया गया। प्रतिवाद मार्च एवं पुतला दहन कार्यक्रम का नेतृत्व संयुक्त रूप से बेदारी कारवाँ के मधुबनी महासचिव समिउल्लाह नदवी एवं असद रशीद नदवी कर रहे थे। विरोध प्रदर्शन के द्वारा यह मांग की गई कि दोनों युवकों की हत्या की निष्पक्ष सी0बी0आई0 जाँच कराई जाए और सभी दोषी पुलिस कर्मी, जिलाधिकारी एवं पुलिस अधीक्षक पर हत्या का मुकदमा दर्ज किया जाए। अगर ऐसा नहीं किया गया तो हमारा संगठन मिथिलाँचल में बड़ा आन्दोलन तो करेगा ही पटना के गर्दनीबाग में भी विरोध प्रदर्शन करेगा और तबतक करता रहेगा

जबतक सितामढ़ी जिलाधिकारी एवं पुलिस अधीक्षक पर हत्या का मुकदमा दर्ज कर जेल में नहीं डाला जाता। पिछलेे दिनों पूर्वी चम्पारण के चकिया थाना क्षेत्र के रामडिहा निवासी मो0 गुफरान एवं मो0 तसलीम को सितामढ़ी के डुमरा थाना की पुलिस ने उठाकार पुछताछ के दौरान थर्ड डिग्री का इस्तेमाल कर मौत के घाट उतार दिया। पुलिस ने पहले तो इस मामले को दबाने की पूरी कोशिश की लेकिन नाकाम रहे। इस मामले पर परिवार के सदस्यों ने साफ साफ पुलिस पर आरोप लगाया है कि जबरन हमारे लड़के से जुर्म कबूल करवाने के लिए डुमरा थाना पुलिस ने थर्ड डिग्री का प्रयोग किया है जिस कारण दोनों युवकों की मृत्यु हुई है। जाँच रिपोर्ट ने भी यह साबित कर दिया है कि टार्चर के कारण ही दोनों युवक की जान गई है। कुछ पुलिस कर्मी को सस्पेंड भी किया गया है, कुछ पर केस भी दर्ज किया गया है, पुलिस अधीक्षक का भी तबादला कर दिया गया है। जब्कि पुलिस अधीक्षक एवं जिलाधिकारी भी उतने ही दोषी हैं जितना पुलिस कर्मी। फिर सरकार ऐसे लोगों को क्यों बचा रही है? आखिर नीतीश कुमार की किया मजबूरी है कि दंगाई एवं हत्यारा जिलाधिकारी का तबादला नहीं कर पा रहे हैं? वर्तमान जिलाधिकारी के संरक्षण में ही पिछले दिनों सितामढ़ी में हुए दंगा में जैनुल अंसारी की निर्मम हत्या कर सरेआम पुलिस की मौजूदगी में जला दिया गया था तब से लगातार नीतीश सरकार अंधी बनी हुई है और साजिश के तहत अल्पसंख्यकों की हत्या करा रही है। सितामढ़ी दंगा के आरोपियों को खुली छूट दे दी गई है किसी पर आज तक कोई कार्रवाई नहीं हो सकी है, फिर भी नीतीश कुमार सुशासन, न्याय के साथ विकास और फर्जी कानून का राज का माला जपते नहीं थकते हैं। पिछले कुछ दिनों से अल्पसंख्यक में डर एवं खाफै का माहौल पैदा कर एकबार फिर से वोट की राजनीति कर रहे हैं

नीतीश कुमार जिसमें वह किसी भी हाल में कामयाब नहीं होंगे। मुस्लिम तुष्टिकरण के मामले में नीतीश कुमार एक नम्बर के नेता हैं मुसलमानों में फुट डालो राज करो की नीति पर इन दिनों अधिक काम कर रहे हैं, लेकिन बिहार हीं नहीं देश के अल्पसंख्यक समुदाय अब और अधिक मुर्ख बनने वाले नहीं हैं, अगर सुरक्षा नहीं तो वोट नहीं, अधिकार नहीं तो वोट नहीं, शिक्षा नहीं तो वोट नहीं की नीति पर अल्पसंख्यक समुदाय भी अब काम करना शुरू कर दिया है जिसका परिणाम नीतीश गठबंधन को 2019-2020 के चुनाव में जरूर दिखेगा। अल्पसंख्यक समुदाय सत्ता सौंप सकता है तो उखाड़ने में भी अधिक समय नहीं लेता। विरोध प्रदर्शन में उपाध्यक्ष मकसूद आलम पप्पु खान, खालिद हुसैन आदि बड़ी संख्या में लोग उपस्थित थे।

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