मिल्लत टाइम्स,नई दिल्ली,। केंद्र सरकार अंडमान और निकोबार के तीन लोकप्रिय द्वीपों- रॉस द्वीप, नील द्वीप और हैवलॉक द्वीप के नाम बदलने जा रही है। इसकी घोषणा आने वाले रविवार को की जा सकती है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी नेताजी सुभाष चंद्र बोस की 75 वीं वर्षगांठ पर पोर्ट ब्लेयर की अपनी यात्रा के दौरान इसका एलान कर सकते हैं। गौरतलब है कि सुभाष चंद्र बोस ने 1943 को पोर्ट ब्लेयर में तिरंगा फहराया था।
नए द्वीपों के ये होंगे नाम
केंद्र सरकार ने रॉस द्वीप का नाम नेताजी सुभाष चंद्र बोस द्वीप, नील द्वीप का नाम शहीद द्वीप और हैवलॉक द्वीप का नाम स्वराज द्वीप रखने का फैसला किया है। प्रधानमंत्री मोदी रविवार को पोर्ट ब्लेयर जाने वाले हैं। इस दौरान वे नेताजी के श्रद्धांजलि भी अर्पित करेंगे। पीएम की यात्रा के दौरान द्वीप के लिए अन्य योजनाओं की भी घोषणा कर सकते हैं।
नेताजी के संबंधी और भाजपा नेता ने की थी मांग
गौरतलब है कि नवंबर में पश्चिम बंगाल भाजपा के उपाध्यक्ष और नेताजी के संबंधी चंद्र कुमार बोस ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर अंडमान और निकोबार द्वीप समूह का नाम बदलकर शहीद और स्वराज द्वीप करने का आग्रह किया था।
‘यूनाइटेड फ्री इंडिया’ के पहले पीएम थे नेताजी
दिलचस्प तथ्य है कि नेताजी ने ‘यूनाइटेड फ्री इंडिया’ के पहले प्रधानमंत्री के रूप में 30 दिसंबर, 1943 को पोर्ट ब्लेयर के तत्कालीन जिमखाना ग्राउंड, जिसे अब नेताजी स्टेडियम कहा जाता है, उसमें राष्ट्रीय ध्वज फहराया था। इस दौरान नेताजी ने घोषणा की थी कि अंडमान और निकोबार द्वीप स्वतंत्र होने वाला भारत का पहला क्षेत्र है. इस अवसर नेताजी ने अंडमान और निकोबार द्वीपों का नाम शहीद और स्वराज रखा था।
ये लोग भी थे नेताजी के साथ
गौरतलब है कि उन्हीं दिनों द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान जापानियों ने इन द्वीपों पर कब्जा कर लिया था। उन्होंने आईएनए के जनरल ए डी लोगनाथन को इसका गवर्नर नियुक्त किया था। नेताजी के साथ इस अवसर पर सर्वश्री आनंद मोहन सहाय, कैप्टन रावत-एडीसी और कर्नलडीएस राजू भी थे। राजू नेताजी के पर्सनल फिजिशियन थे।
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