प्रधानमंत्री मोदी ने किया एसिया के द्वितीय तथा भारत के पहले सबसे लंबे रेल और पथ पुल का उदघाटन

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25 December 2018 (Publish: 03:42 PM IST)

प्रधानमंत्री मोदी ने किया एसिया के द्वितीय तथा भारत के पहले सबसे लंबे रेल और स्थल पथ संलग्न बगीबील पुल का उद्घाटन। 21 साल की अपेक्षा। लम्बाई 4.940 किलोमीटर। खर्च हुआ 5920 करोड़ रुपए।

चाईजुर रहमान/मिल्लत टाइम्स,असम:दीर्घकालीन प्रत्याशा तथा अपेक्षाकृत आसाम के बगीबील पुल का आज देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुभ उद्घाटन किया। पिछले 21 साल के अपेक्षा के बाद एसिया के द्वितीय तथा भारत के पहला सबसे ज्यादा लंबाई वाला रेल ओर स्थल पथ संलग्न बगीबील पुल का आज दोपहर दो बजे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उद्घाटन करके देशवाशीयो को समर्पित किया। आज दोपहर 1:25 बजे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी असम के डिब्रुगड़ जिले के मोहनबारी हवाई अड्डा पहुंचने के बाद उसको भव्य स्वागत किया गया।

आसाम के मुख्यमन्त्री सर्बानन्द सोनोवाल, राज्यपाल जगदीश मुखी, आसाम सरकार के मुख्य सचिव आलोक कुमार ओर आसाम पुलिस के डिजिपि कुलधर शईकिया समेत अन्य पदाधिकारी ने प्रधानमंत्री का भव्य स्वागत किया। उसके बाद 3 बिशेष हेलिकॉप्टर से प्रधानमंत्री बगीबील पुल के पास जा पहुचे ओर फिटा काटकर पुल का शुभ उद्घाटन किया। इस एतिहासिक मौकेपर आसाम के मुख्यमन्त्री सर्बानन्द सोनोवाल, राज्यपाल जगदीश मुखी, केन्द्रीय रेल राज्यमंत्री राजेन गोहाई भी मौजूद थे। गौरतलब है कि बगीबील पुल 4.940 किलोमीटर लम्बा है। 1997 साल के 22 जनवारी मे तदानीन्तन प्रधानमंत्री एईस डि देवगौड़ा ने इसका आधारशिला स्थापित किए थे। लगभग पांच साल तक कई भी काम न होने के बाद 2002 मे तदानीन्तन प्रधानमंत्री अटल विहारी बाजपेयी द्वारा निर्माण कार्य का शुभारंभ किया गया। 2007 मे तदानीन्तन प्रधानमंत्री डॉ मनमोहन सिंह के सरकार द्वारा बगीबील पुल को रास्ट्रीय प्रकल्प घोषित किया गया।

इस पुल को बनाने मे कुल 5920 करोड़ रुपए खर्च किए गए। एन एफ रेलवे के उद्योग मे हिन्दुस्तान कॉन्सट्राक्सन ने बगीबील पुल को 77 हजार मेट्रिक टन लोहे से बनाया है। जो कि तीन आईफैल टावर बनाने का लोहा इस्तेमाल किए गए। चुईडेन ओर फिनलैंड पुल की आर्हि से बनाया बगीबील पुल मे आमेरिकान गोल्डन गेट का साद्रृश्य दिखाई देती है। 42 खम्बायुक्त बगीबील पुल के ऊपर मे 362 ष्ट्रीट लाईट लगाया गया ओर साथ ही साथ नीचे दो ब्रडगज रेलपथ मे 300 लाईटे ओर 882 थ्रेसार लाईट लगाया जा चुका है। भुमिकम्प के आघात से बचने के लिए पुल मे उच्च प्रयुक्ति इस्तेमाल किया गया जबकि 7-8 प्रावल्य का भुमिकम्प से कोई नुकसान नही होगा। बगीबील पुल से डिब्रुगड़-धेमाजि अरुणाचल प्रदेश मे यातायात व्यवस्था को सुचल हुआ है। दीर्घ बरस से यातायात व्यवस्था को लेकर इस इलाके के लोग अनेक कष्ट का सामना कर रहे थे। आसाम-अरुणाचल प्रदेश का सम्पर्क इस पुल के जरिए अभी अनेक आसान हो पायेगा। हालांकि 1961के भारत-चीन युद्ध के बाद यहा पर पुल बनाने का दाबी उत्थापित हुआ था। लेकिन 1985 मे अल आसाम चात्र संस्था ओर भारत सरकार के बीच हुई आसाम चुक्ति मे बगीबील पुल का निर्माण को स्थान दिया गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दीर्घकालीन प्रत्याशा तथा अपेक्षाकृत बगीबील पुल का शुभ उद्घाटन करने के बाद धेमाजि जिले के कारें चापरमे मे आयोजित एक समारोह को सम्बोधित किया। प्रधानमंत्री ने कहा कि बगीबील पुल के द्वारा देश के उच्च स्तर के प्रयुक्ति प्रतिफलित हुए है। उत्तर-पूर्व के यातायात व्यवस्था को एक नया दिशा मिल गया। भूतपूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का सपना पूरा हुआ। आज के दिन को एक एतिहासिक दिन है। कांग्रेस सरकार ने इस पुल को बनाने मे कई कदम नही उठाए थे।

केंद्र मे बीजेपी का सरकार आने के बाद बगीबील पुल का काम आगे बढ़ाया गया। देश के प्रतिरक्षा के लिए यह पुल महत्वपूर्ण है। मोदी ने अपने भाषण के दौरान आसाम के एतिहासिक वीर, शिल्पी, साहित्यिको का भी जिक्र किया। हालांकि प्रधानमंत्री ने बगीबील पुल का नामांकन नही किया। इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बगीबील पुल का शुभ उद्घाटन करके पुल पर कुछ दूर तक पैदल चले ओर उपस्थित लोगो को अभिवादन किया। समारोह मे आसाम के मुख्यमन्त्री सर्बानन्द सोनोवाल, राज्यपाल जगदीश मुखी, केन्द्रीय रेल मंत्री पीयूष गोयल, केन्द्रीय रेल राज्यमंत्री राजेन गोहाई, आसाम के वित्तमंत्री डॉ हिमन्त विश्व शर्मा, बिटिचि चीफ हाग्रामा महिलारी, अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री दर्जी खाण्डु समेत कई नेता मौजूद थे। समारोह के दौरान प्रधानमंत्री ने तिनिसुकिया – नाहरलगुण यात्रीबाही रेल का भी फ्लेग अफ किया।

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