नई दिल्ली : दोषियों और अपराधियों की पहचान से जुड़ा क्रिमिनल प्रोसीजर आइडेंटिफिकेशन बिल संसद के दोनों सदनों से पास हो गया है।
इस बिल को लेकर राज्यसभा में बुधवार को जमकर हंगामा हुआ। हालांकि, बाद में इसे ध्वनिमत से पास करा लिया गया। इससे पहले सोमवार को ये बिल लोकसभा से पास हो गया था।
अब राष्ट्रपति की मंजूरी मिलने के बाद ये कानून बन जाएगा। इस बिल के कानून बनने के बाद ये दोषियों की पहचान से जुड़े मौजूदा कानून आइडेंटिफिकेशन ऑफ प्रिजनर्स एक्ट 1920 की जगह ले लेगा।
नया कानून आते ही पुराना कानून निरस्त हो जाएगा। पुराने कानून में सिर्फ फिंगरप्रिंट और फुटप्रिंट रिकॉर्ड करने की इजाजत है, जबकि इस बिल में आंखों के रेटिना से लेकर पैरों के प्रिंट तक को रिकॉर्ड रखने की इजाजत दी गई है।
जानें, इस बिल में क्या-क्या है?
क्या-क्या रिकॉर्ड होगाः फिंगरप्रिंट, फुटप्रिंट, हथेलियों के प्रिंट, फोटो, आंखों का आइरिस और रेटिना, … फिजिकल और बायोलॉजिकल सैंपल, हैंडराइटिंग और सिग्नेचर का रिकॉर्ड रखा जाएगा.
किस-किसका रिकॉर्ड रखा जाएगाः किसी क्रिमिनल केस में दोषी साबित हुए अपराधी और क्रिमिनल केस में गिरफ्तार आरोपी को अपना रिकॉर्ड देना होगा.
किसका रिकॉर्ड नहीं रखा जाएगाः राजनीतिक बंदियों का कोई रिकॉर्ड नहीं लिया जाएगा. अगर किसी मामले में 7 साल से कम सजा है और महिला या बच्चों से जुड़ा अपराध नहीं है, तो अपराधी को बायोलॉजिकल सैंपल देने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता. बाकी सैंपल लिए जाएंगे.
मना किया तो क्या होगाः इस बिल में प्रावधान है कि अगर कोई भी अपराधी या आरोपी अपने सैंपल देने से मना नहीं कर सकता. अगर करता है तो IPC की धारा 186 के तहत कार्रवाई होगी. इसके तहत 3 महीने कैद और 500 रुपये जुर्माना या दोनों की सजा हो सकती है.
बरी हुए तो फिर क्या होगाः अगर किसी आरोपी को आपराधिक मामले में कोर्ट बरी कर देती है तो कोर्ट के आदेश पर उस व्यक्ति का सारा डेटा रिकॉर्ड से हटा दिया जाए… लेकिन व्यक्ति पर एक से ज्यादा मामले हैं और एक ही मामले में बरी हुआ है तो रिकॉर्ड रहेगा.
कौन रखेगा ये सारा रिकॉर्डः केंद्र सरकार की एजेंसी नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) इसका रिकॉर्ड रखेगी। ये रिकॉर्ड 75 साल के लिए स्टोर किया जाएगा। NCRB के पास ही इस डेटा को स्टोर रखने और डिलीट करने का अधिकार होगा।
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