नई दिल्ली, झारखंड के राज्यपाल ने ‘एंटी मॉब लिंचिंग बिल’ को मंजूरी देने से इंकार करते हुए इसे राज्य सरकार को वापस कर दिया है। इस बिल को झारखंड विधानसभा में पारित होने के बाद उनकी मंजूरी के लिए भेजा गया था।
राज्यपाल ने कहा है कि इस बिल में ‘भीड़’ यानी (Mob) को सही से परिभाषित नही किया गया है। राज्यपाल की तरफ से बिल में भीड़ की परिभाषा पर पुनर्विचार करने के लिए कहा गया है।
दरअसल बिल में दो और दो सो ज्यादा लोगों को भीड़ माना गया है। राज्यपाल का मानना है कि बिल में भीड़ की परिभाषा कानून के मुताबिक नहीं है। सरकार से कहा गया है कि बिल में कानून की परिभाषा को फिर से परिभाषित करने की जरूरत है।
बता दें कि मॉब लिंचिंग बिल झारखंड विधानसभा से मंजूरी के दो महीने बाद राजभवन भेजा गया। यह बिल विधानसभा में 12 दिसंबर को पास हुआ था, अब इस बिल को राज्यपाल की मंजूरी मिलनी थी। लेकिन राजभवन ने इसे सरकार के पास वापस भेज दिया है। दरअसल दिसबंर 2021 में शीतकालीन सत्र के दौरान, झारखंड विधानसभा ने “भीड़ हिंसा और मॉब लिंचिंग विधेयक, 2021 की रोकथाम” को मंजूरी दी थी।
मॉब लिंचिंग विधेयक में 3 साल से लेकर आजीवन कारावास तक की सजा और 25 लाख रुपए तक के जुर्माने का प्रावधान है। अगर भीड़ के हमले से कोई चोटिल होता है या मर जाता है, तो इसके लिए सजा जुर्माने का प्रावधान किया गया है।
वहीं साजिश या उकसाने और लिंचिंग करने की कोशिश के लिए भी विधेयक में सजा का प्रावधान है। राज्य सरकार की “मुआवजा योजना” के मुताबिक पीड़ितों के लिए मुआवजे के साथ ही झारखंड सरकार के विधेयक में संपत्ति कुर्क और तीन साल की सजा कर का प्रावधान है।
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