नई दिल्ली, साल 2021 खत्म हो रहा है, पिछले सालों की तरह इस भी मिल्लत टाइम्स ने सेंकड़ों ऐसी न्यूज़ को ब्रेक किया जिसको मेनस्ट्रीम मीडिया ने नहीं दिखाया। ऐसी खबरों को मिल्लत टाइम्स ने सबसे पहले जाकर कवर किया। इस साल 10 ऐसी खबरे रहीं जिन्हें मिल्लत टाइम्स ने सबसे पहले लोगों तक पहुंचाया।
त्रिपुरा, असम समेत अन्य जगहों पर हमारे रिपोर्टर्स ने जाकर ग्राउंड रिपोर्टिंग की। मिल्लत टाइम्स की उर्दू, अंग्रेजी, हिंदी, बंगला वेबसाइट और यूट्यूब चैनल पर तकरीबन 6 हजा़र से ज़्यादा हम लोगों ने महत्वपूर्ण ख़बरें प्रकशित कीं जिनमें 100 से ज्या़दा खबरों पर प्रशासन और सरकार ने नोटिस भी लिया। आइए जानें उन खबरों के बारे में जो इस साल मिल्लत टाइम्स के लिए अहम रही….
त्रिपुरा मामला
21 अक्टूबर 2021 को त्रिपुरा में विश्व हिंदू परिषद के कार्यकर्ताओं ने एक रैली के दौरान जमकर उपद्रव मचाया था। यह एक ऐसी घटना रही जिसे कभी नहीं भुलाया जा सकता। इस घटना में कई मजिस्दों और मुसलामनों के घरों को निशाना बनाया गया था। वहीं इस मामले को मिल्लत टाइम्स के चीफ एडिटर शम्स तबरेज कासमी ने ग्राउंड पर जाकर लोगों तक सच दिखाया था। किस तरह पुलिस ने भी उपद्रव मचाने वालों का साथ दिया था और कई मुस्लिम पत्रकार भी UAPA लगाकर कार्रवाई की।
असम हिंसा
22 सिंतबर को असम में अवैध अतिक्रमण का आरोप लगाते हुए करीब 800 मुस्लिम परिवार के घरों को पुलिस ने ढह दिया था। इस घटना में दो लोगों की मौत भी हो गई थी। एक शख्स की लश पर एक पत्रकार ने उछल-उछल कर वार भी किया था, जो काफी चर्चा में रहा था। इस खबर को मिल्लत टाइम्स ने सबसे पहले दिखाया था। इस खबर को करने के लिए मिल्लत के पत्रकार शमसूरहमान मौजूद थे।
गाज़ियाबाद लिंचिंग मामला
इस के जून में ही गाज़ियाबाद के लोनी में एक बुज़ुर्ग के साथ मार पीट की गई थी और जबरन जय श्री राम के नारे भी लगवाए थे। इतना ही नहीं बुज़ुर्ग की दाढ़ी भी काट दी गई थी। इस घटना से जुड़ा वीडियो मिल्लत टाइम्स ने सबसे पहले शेयर किया था, वहीं मिल्लत टाइम्स की वीडियो को राहुल गांधी ने भी शेयर किया था। इसके बाद उन लोगों के खिलाफ कार्रवाई हुई तो जिन्होंने बुजुर्ग के साथ लिंचिंग करने की कोशिश की थी।
शाहबुद्दीन मौत केस
इस साल शाहबुद्दीन जब अस्पाताल में भर्ती थे तब उनका इलाज बेहतर तरीके से नहीं किया जा रहा था। कोरोना से जब उनकी मौत हो गई थी, तभी यह खबर मीडिया में नहीं थी। मिल्लत टाइम्स ने इस खबर को कवरेज किया। हमारी खबर के बाद उनके शव खर लाकर दिल्ली गेट पर दफनाने की इजाजत दी गई थी
दलित बहिष्कार मामला
मिल्लत टाइम्स की अहम खबरों में एक हरियाणा में पंचकूला में दलित समाज बहिष्कार भी थी। यहां टीम ने जाकर ग्राउंड रिपोर्टिंग की थी। इस गांव में ठाकुरों ने दलितो का बहिष्कार कर रखा था, क्योकिं दलित के लड़के ने ठाकुर की लड़की से शादी कर ली थी। इसलिए पूरा गांव को सजा दी गई थी।
अतीकुर्रहमान केस
कैम्पस फ्रंट ऑफ इंडिया के लीडर अतीकुर्रहमान इन दिनों मथुरा जेल में बंद हैं। उन्होंने हाथरस की पीड़िता को इंसाफ दिलाने और उसके परिवार को तसल्ली देने के लिए उसके घर जाने की कोशिश की थी। तभी उन्हें पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया था। एम्स के इलाज के लिए परिवारों वालों ने काफी मदद की गुहार लगई थी। मिल्लत टाइम्स ने इस मामले में अतीकुर्रहमान के परिवार वालों से भी बात की थी। उन्होंने बताया था कि बेकसूर होते हुए भी वह जेल में सजा काट रहे है।
उमर गौतम मामला
इसी साल जबरन धर्म परिवर्तन के आरोप में उमर गौतम को गिरफ्तार किया था। यह मामला काफी चर्चा में भी रहा, उमर गौतम से लिंक जोड़ते हुए कई लोगों को भी गिरफ्तार किया था। मिल्लत टाइम्स ने उन सभी लोगों से बातचीत की थी जिन्हें उमर गौतम ने धर्म परिवर्तन करवाया था। उन्हें बताया था कि उन्होंने धर्म अपनी मर्जी से बदला था। उमर गौतम को झूठे अरोप में फंसाया गाया है।
कश्मीरी लड़की धर्म परिवर्तन मामला
इस साल एक मामला ने बड़ा तूल पकड़ा था, वह था कश्मीरी लड़कियों का धर्म परिवर्तन मामला। इसमें दो समुदयों के लोगों को आपस में लड़ाने की कोशिश की गई थी। मिल्लत टाइम्स के रिपोर्टर कश्मीर में मौजूद थे। लड़कियों ने मिल्लत टाइम्स के जरिए बताया था की उन्होंने धर्म अपनी मर्जी से काबुला है। वह उन लड़को को पंसद करती थी, और इस्लाम के बारे में पूरी स्टडी करके इस्लाम कुबुल किया था। गोदी मीडिया में इस खबर को यह कहकर चलाया गया था कि दो सिख लड़कियों का जबरदस्ती धर्म परिवर्तन कराया गया, साथ ही कहा गया था कि उनकी शादी दोगुनी उम्र के लड़के से कराई गई। लेकिन मिल्लत टाइम्स ने इस मामले में सच्चाई दिखाई।
तालिबान सत्ता
इस साल सबसे ज्यादा खबरों में रहा वह था अफगानिस्तान पर तालिबान का कब्जा। गोदी मीडियो ने तालिबान की छवि खराब दिखाने में कोई कसर नहीं छोड़ी। लेकिन मिल्लत टाइम्स ने लोगों तक तालिबान की सच्चाई पहुंचाई। बहार के उन तमाम लोगों का इंटरव्यू भी किया जो तालिबान के बारे में सच बता रहे थे। तालिबान को केवल गोदी मीडिया ने बदनाम करने की कोशिश की थी। लेकिन हमने वहां की एक-एक खबर को कवर किया और लोगों तक सच्चाई पहुंचाई ।
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