नई दिल्ली: कृषि कानूनों की वापसी के बाद राजनीतिक नेताओं की प्रतिक्रिया का सिलसिला जारी है. सत्ता पक्ष जहां मोदी सरकार के इस फैसले को मास्टरस्ट्रोक बता रहा है वहीं सत्ता पक्ष मोदी सरकार के इस फैसले को उसकी नाकामी का आईना भी बता रहे हैं।
इस बाबत कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने एक तरफ केंद्र सरकार के कानूनों को वापस लेने के फैसले का स्वागत किया और दूसरी तरफ प्रधानमंत्री मोदी को पत्र लिखकर लखीमपुर खीरी कांड के पीड़ितों को न्याय दिलाने की मांग की है।
प्रियंका गांधी ने प्रधानमंत्री को भेजी चिट्ठी को ट्विटर पर शेयर किया है.उन्होंने लिखा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज लखनऊ में हैं और मैंने उन्हें लखीमपुर खीरी कांड के पीड़ितों के लिए न्याय की मांग करते हुए एक पत्र भेजा है।
उन्होंने लिखा @narendramodi जी अगर देश के किसानों के प्रति आपकी नीयत सचमुच साफ है तो आज अपने केंद्रीय गृह राज्यमंत्री के साथ मंच पर विराजमान मत होईये, उनको बर्खास्त कीजिये।
प्रधानमंत्री जी को मेरा पत्र।
..@narendramodi जी अगर देश के किसानों के प्रति आपकी नीयत सचमुच साफ है तो आज अपने केंद्रीय गृह राज्यमंत्री के साथ मंच पर विराजमान मत होईये, उनको बर्खास्त कीजिये।
प्रधानमंत्री जी को मेरा पत्र। pic.twitter.com/5XNAmAjmvN
— Priyanka Gandhi Vadra (@priyankagandhi) November 20, 2021
प्रियंका गांधी ने प्रधानमंत्री को भेजे पत्र में कहा, ‘प्रधानमंत्री जी ! लखनऊ में आपका स्वागत है। कल आपने किसानों पर तीन काले कानून थोपने की क्रूरता को स्वीकार किया और उन्हें वापस लेने की घोषणा की। मैंने अखबारों में पढ़ा है कि आज लखनऊ में होने वाले डीजीपी सम्मेलन में आप देश के प्रशासन के प्रभारी अधिकारियों से चर्चा करेंगे.
लखीमपुर के किसानों के नरसंहार के दौरान अन्नदाता पर किए गए अत्याचारों को पूरा देश देखा । आप यह भी जानते हैं कि किसानों को अपनी कार से कुचलने का मुख्य आरोपी आपकी सरकार में केंद्रीय गृह राज्य मंत्री का बेटा है. राजनीतिक दबाव के चलते उत्तर प्रदेश सरकार ने शुरू से ही इस मामले में न्याय की आवाज को दबाने की कोशिश की. माननीय सुप्रीम कोर्ट ने इस संदर्भ में कहा कि सरकार की मंशा को देखकर ऐसा लगता है कि सरकार किसी खास आरोपी को बचाने की कोशिश कर रही है.
पत्र के अंत में प्रियंका गांधी ने कहा, “यदि देश के किसानों के प्रति आपकी मंशा स्पष्ट है, तो अपने केंद्रीय गृह राज्य मंत्री के साथ मंच पर न बैठें, उन्हें बर्खास्त करें।” देश भर के किसानों के खिलाफ दर्ज मामले वापस लें और सभी शहीद किसानों के परिवारों को आर्थिक सहायता प्रदान करें।
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