नई दिल्ली : मजलिस-ए-इत्तेहाद-ए-मुसलमीन के मुखिया मौलाना मुफ्ती अबुल कासिम नोमानी ने कहा है कि दारुल उलूम देवबंद के दरवाजे हमेशा सबके लिए खुले है, कोई भी जब चाहे यहां आ सकता हैं। लेकिन उन्होंने इस बात को साफ किया कि एजेंसी की नीति के तहत चुनावी दौर में राजनीतिक नेताओं को यहां आने की इजाजत नहीं है।
AIMIM राष्ट्रीय अध्यक्ष और सांसद असदुद्दीन ओवैसी के दारुल उलूम देवबंद में आना भी एक चुनाव नीति के अंदर आता है। इसलिए हमने उन्हें यहां आने की अभी इजाजत नहीं । मीडिया से बात करते हुए मौलाना मुफ्ती अबुल कासिम नोमानी ने कहा कि असदुद्दीन ओवैसी ने हाल ही में सहारनपुर और मुजफ्फरनगर का राजनीतिक दौरा किया था और दोनों जगहों पर औपचारिक चुनावी रैलियों को संबोधित किया था। इसी तरह देश के अन्य नेताओं ने भी यूपी में सियासी दौर शुरू कर दिया है। इस संबंध में हमने यह साफ कर दिया है की चुनाव के दौरान देवबंद में राजनीतिक नेताओं को आने की अनुमति नहीं है।
मौलाना मुफ्ती अबुल कासिम नोमानी ने सोशल मीडिया पर चल रही बहस के बीच अपने भाषण में कहा कि उत्तर में राजनीतिक गतिविधियां शुरू हो गई हैं। प्रदेश में इस समय और जैसे-जैसे चुनाव नजदीक आ रहे हैं, सभी राजनीतिक दलों के नेता आस-पास होने चाहिए इसलिए इस समय संस्था में राजनीतिक नेताओं का स्वागत नहीं किया जा सकता। दारुल उलूम देवबंद के दरवाजे किसी के लिए भी हमेशा खुले हैं जो जब चाहे तब आ सकता है। लेकिन चुनावी दौर में दारुल उलूम देवबंद के पदाधिकारी अपनी पिछली नीति के तहत राजनीतिक नेताओं से नहीं मिलते।
मुफ्ती अबुल कासिम नोमानी ने कहा कि अखिल भारतीय मजलिस-ए-इत्तेहाद-ए-मुस्लिमीन के राष्ट्रीय अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी भी राज्य भर के राजनीतिक दौरे पर हैं। वे बात करने आए थे, जिनके सामने संस्था का पद रखा गया था। अब कैसे कोई प्रस्तुत करता है यह उसकी अपनी प्रक्रिया है। उन्होंने कहा कि मजार-ए-कासमी और दारुल उलूम देवबंद में कोई भी कभी भी आ सकता है, किसी के लिए कोई पाबंदी नहीं है। लेकिन संस्था के प्रभारी चुनाव अवधि के दौरान राजनीतिक नेताओं से नहीं मिलते हैं। गौरतलब है कि इस संबंध में संगठन पहले भी बयान जारी कर चुका है और कई प्रमुख राजनीतिक नेताओं से मिलने से भी इनकार कर चुका है।
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