नई दिल्ली : उत्तराखंड के कुमाऊं क्षेत्र में मूसलाधार बारिश होने से मंगलवार को 42 और लोगों की मौत हो गई तथा कई मकान ढह गए। कई लोगों के अब भी मलबे में फंसे होने की खबर है। इसके साथ ही वर्षाजनित घटनाओं में अब तक मरने वालों की संख्या 47 हो गई है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बुधवार को स्थिति का जायजा लेने के लिए कुमाऊं का दौरा किया, जो राज्य के सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्रों में से एक है। उन्होंने संवाददाताओं से कहा कि राज्य भर में भारी क्षति हुई है और सामान्य स्थिति में लौटने में समय लगेगा। धामी ने राहत प्रयासों के लिए प्रत्येक जिलाधिकारियों को 10-10 करोड़ रुपये मंजूर किए हैं।
अपने पूर्वानुमान में भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने कहा है कि बुधवार से बारिश में काफी कमी आएगी। राज्य के बाकी सप्ताह में बारिश न होने की संभावना है। उत्तराखंड में इस सप्ताह रिकॉर्ड तोड़ बारिश हुई, जिससे बाढ़ भूस्खलन और संपत्ति का नुकसान हुआ।
सेना और राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (एनडीआरएफ) की कई टीमों और स्थानीय अधिकारियों के साथ बचाव और राहत अभियान चला रही है।
अधिकारियों ने बताया कि खराब मौसम के बीच कई घंटे के संघर्ष के बाद मंगलवार शाम नैनीताल से संपर्क बहाल कर दिया गया।
कुमाऊं क्षेत्र में 42 और लोगों की मौत के साथ ही आपदा के कारण मरने वालों की संख्या 47 हो गई है, क्योंकि पांच लोगों की मौत सोमवार को हुई थी।
डीआईजी नीलेश आनंद भारने ने बताया, ‘कुमाऊं क्षेत्र में मरने वालों की संख्या 40 से अधिक हो गई है।
अधिकारी ने बताया कि इन 42 मौतों में से 28 लोग नैनीताल जिले में मारे गए, छह-छह लोगों की मौत अल्मोड़ा एवं चंपावत जिलों में, एक-एक व्यक्ति की मौत पिथौरागढ़ और उधम सिंह नगर जिले में हुई है।
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