नई दिल्ली (मिल्लत टाइम्स ) कोरोना वायरस की दूसरी लहर के दौरान जहां चिकित्सा व्यवस्था ध्वस्त हो गई है, वहीं इसने भारतीय समाज की पोल खोल दिया है। इस महामारी की आड़ में, भेदभाव का एक नया युग शुरू हो गया है, जिसमें लोग अपने पड़ोस में रहने वाले लोगों को मानवीय दर्जा देने के लिए तैयार नहीं हैं। इसका एक उदाहरण जौनपुर में देखने को मिला जब एक बूढ़े व्यक्ति ने अपनी मरी हुयी पत्नी को साइकिल पर बिठाया और इधर-उधर घुमाता रहा। गांव वालों ने अंतिम संस्कार करना करने से मना कर दिया
न्यूज पोर्टल आजतक की रिपोर्ट के अनुसार , घटना जौनपुर के मड़ियाहूँ कोतवाली इलाके में हुई। तिलक धारी सिंह की पत्नी राजकुमारी कई दिनों से बीमार थीं। सोमवार को उनकी हालत बिगड़ गई और उन्हें जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया लेकिन अस्पताल में उनकी मौत हो गई। अस्पताल ने एम्बुलेंस द्वारा शव को घर पहुंचा दिया
जब तिलक धारी अपनी पत्नी का अंतिम संस्कार कर रहे थे, ग्रामीण वहां पहुँच गए और उन्हें ऐसा करने के लिए मना किया, जिसके कारण अंतिम संस्कार नहीं किया जा सका। जब पुलिस को इसके बारे में पता चला, तो उन्होंने शव को कफन में लपेटा और जौनपुर के राम घाट पर अंतिम संस्कार किया। उसके बाद, पुलिस ने उनकी देखरेख में सभी रस्में निभाईं।
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