तिहाड़ जेल में हत्या के कैदी ने किया हेड कॉन्स्टेबल रज्जाक खान पर जानलेवा हमला,कांस्टेबल घायल

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18 January 2019 (Publish: 04:13 PM IST)

मिल्लत टाइम्स,नई दिल्ली:दिल्ली के तिहाड़ जेल में यूं तो केदियों में आपसी झगड़े होने की ख़बरें आना आम बात है, लेकिन इस बार एक बेहद सनसनीखेज ख़बर ने सबको चौका के रख दिया है। तिहाड़ के जेल न. 1 के हाई सिक्योरिटी वार्ड में कई ह्त्याओं को अंजाम दे चुके कैदी ने अपने जेलवार्ड के बाहर ड्यूटी पर तैनात हेड कॉन्स्टेबल रज़्ज़ाक खान पर जानलेवा हमला कर दिया। मुल्ज़िम प्रमोद पुत्र भीम सिंह उन्हें डारने धमकाने की अक्सर कोशिश करता रहता था, और अलग-अलग तरह की मांगे करके परेशान करता रहता था। लेकिन अपनी ड्यूटी के पाबंद एक ईमानदार सुरक्षाकर्मी रज़्ज़ाक खान ने निडर होकर अपनी ड्यूटी से कोताही नहीं बरती, बल्कि कानूनी दायरे में रहते हुए उसकी जो भी शिकायत दूर कर सकते थे, उन्होंने की।

लेकिन कल पानी लेने के बहाने उसने रज़्ज़ाक़ खान से अपनी जेल वार्ड का गेट खुलवाया और अचानक खान पर हमला कर दिया, इतने में खान कुछ समझ पाते कैदी ने बुरी तरह से मरना पीटना शुरू कर दिया। वह उनकी जान लेना चाहता था तमिलनाडु पुलिस के ड्यूटी पर तैनात 2 जवानों ने रज़्ज़ाक़ खान को कैदी प्रमोद से काफी मशक्कत के बाद बचाया। जिसकी रिेकॉर्डिंग वार्ड में लगे सीसीटीवी कैमरा में भी कैद हो गयी। रज़्ज़ाक खान ने तुरंत इसकी सूचना आला अधिकारियों को दी, पर अधिकारियों ने भी कोई खास तवज्जो नहीं दी, बल्कि उल्टे खान को ही नसीहत कर डाली की वह ऐसे केदियों से थोड़ा बचकर रहे। खान ने खुद ही हरिनगर स्थित दीनदयाल उपाध्याय हॉस्पिटल पहुंचकर अपना मेडिकल कराया तब जाकर इलाज शुरू हुआ। इसके बाद रज़्ज़ाक खान ने अपना तहरीरी बयान थाना हरिनगर SHO को दर्ज कराया।

सवाल यह है कि जेल में होने वाली इन खतरनाक वारदातों पर प्रशासन वक़्त रहते कोई कार्यवाही आख़िर क्यों नहीं करता? जेल में होने के वावजूद कैदियों के हौसले इतने बुलंद कैसे हो जाते हैं कि वह किसी पर भी जानलेवा हमला करने से नहीं कतराते? यदि जेल में सुरक्षाकर्मी ही सुरक्षित नहीं है तो कैदियों की सुरक्षा कैसे की जाती होगी इस बात का अंदाज़ा बखूबी लगाया जा सकता है। इन सवालों के बीच ये बात भी अहम है कि जेल प्रशासन के आला अधिकारी इस मामले में तुरंत संज्ञान लें और वक़्त रहते सख़्त क़दम उठाएं। ताकि किसी खतरनाक वारदात को होने से रोका जा सके।

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