नई दिल्ली, सुप्रीम कोर्ट ने बेंगलुरु के चमाराजपेट मैदान में गणेश चतुर्थी पूजा की अनुमति नहीं दी है। कर्नाटक वक्फ बोर्ड ने जगह को अपनी संपत्ति बताते हुए कहा था कि वहां सालों से ईद की नमाज़ हो रही है। इसपर आज सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने ज़मीन में यथास्थिति बनाए रखने का आदेश देते हुए मामला वापस कर्नाटक हाई कोर्ट को भेज दिया।
इससे पहले हाई कोर्ट की सिंगल बेंच ने मैदान में यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया था, लेकिन डिवीजन बेंच ने सरकार को पूजा की अनुमति मांग रहे लोगों के आवेदन पर विचार करने को कहा था। इसके बाद राज्य सरकार ने 31 अगस्त और 1 सितंबर को पूजा की इजाज़त दे दी थी। अब यह पूजा नहीं होगी।
वक्फ बोर्ड ने याचिका में कहा था कि मैदान उसकी संपत्ति है। वहां 1964 से ईद की नमाज़ हो रही है। वहां पूजा से सांप्रदायिक तनाव हो सकता है वहीं हाई कोर्ट में राज्य सरकार ने मैदान पर वक्फ बोर्ड के दावे को विवादित बताया था। सरकार का कहना था कि उसे पूजा की अनुमति देने पर विचार करने से नहीं रोका जा सकता। पहले ये सुनवाई सुप्रीम कोर्ट की दो सदस्यीय बेंच कर रही थी।
लेकिन बाद में ये मामला तीन सदस्यीय पीठ को भेज दिया गया। वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल कर्नाटक वक़्फ़ बोर्ड का प्रतिनिधित्व कर रहे थे। इस मामले को लेकर इलाक़े में बड़ी संख्या में पुलिसकर्मियों को तैनात कर दिया गया था।
बता दें कि मुस्लिम समुदाय का दावा है कि साल 1871 से इस ज़मीन पर उनका बेरोकटोक दखल रहा है। वे इस ज़मीन का इस्तेमाल अपनी इबादत और कब्रिस्तान के रूप में करते रहे हैं।
मुस्लिम पक्ष ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि मैसूर स्टेट वक़्फ़ बोर्ड ने इसे वक़्फ़ प्रोपर्टी घोषित कर रखी है और जब कोई प्रोपर्टी वक़्फ़ प्रोपर्टी घोषित कर दी जाती है तो उसके चरित्र में कोई बदलाव नहीं किया जा सकता है। इसे छह महीने के भीतर ही चैलेंज किया जा सकता है। कर्नाटक बोर्ड ऑफ़ ऑकफ़ और सेंट्रल मुस्लिम एसोसिएशन ऑफ़ कर्नाटक ने हाई कोर्ट के फ़ैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी।
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