नई दिल्ली: देशभर में बीजेपी द्वारा लाए गए विवादित नागरिकता संशोधन कानून का पुरजोर तरीके से विरोध प्रदर्शन हो रहा है। सड़कों पर उतरे प्रदर्शनकारियों के संख्या बल को देखते हुए साफ पता चलता है कि इस देश की जनता ने कानून को सिरे से खारिज कर दिया है लेकिन बीजेपी अब भी अपनी जिद पर अड़ी हुई है और विरोध प्रदर्शन को नजरंदाज करते हुए कानून को वापिस लेने की मांग को नकार रही है।
वहीं दिल्ली के शाहीन बाग इलाके में लगभग 1 महीने से सभी समुदाय की महिलाए और बच्चे इस कानून को वापिस लेने की मांग पर धरना प्रदर्शन कर रहे है। और पूरे देश में शाहीन बाग कि महिलाओं की जमकर तारीफ हो रही है किस प्रकार वो इस कड़ाके कि ठंड में संविधान की रक्षा के लिए सड़क पर बैठी है
किन्तु बीजेपी और उसके समर्थक रोज नए प्रोपगेंडा तैयार कर महिलाओं के आंदोलन को बदनाम करने की कोशिश कर रहे है कभी वह सड़क पर लोगो को हो रही तकलीफ का बहाना लेकर याचिकाएं दायर करते है तो कभी कुछ और लेकिन हद तो तब हो गई जब बीजेपी के आईटी सेल प्रमुख ने एक फर्जी वीडियो डालकर दावा किया की शाहीन बाग की महिलाओं के आंदोलन के पीछे कांग्रेस का हाथ है।
वीडियो में एक युवक बोलता हुआ देखा जा सकता है जो दावा करता है कि शाहीन बाग में धरने पर बैठी महिलाओं को पैसे दिए जा रहे है और शिफ्ट के हिसाब के यह विरोध प्रदर्शन कर रहे है और प्रत्येक महिला को 500 रुपए मिल रहे है उसके बाद तो भाजपा के आईटी सेल ने अपना काम किया और बिकाऊ शाहीन बाग की महिलाए सोशिया मीडिया पर ट्रेंड करवाने लगे यह हमारा देश का दुर्भाग्य है जो महिलाओं के लिए ऐसी अभद्र भाषा का प्रयोग किया का रहा है।
लेकिन बीजेपी के आईटी सेल प्रमुख अमित मालवीय के इस फर्जी वीडियो का भांडा तब फुट गया जब वीडियो वाला युवक खुद सामने आ गया और दावा किया की अमित मालवीय ने मुझे 5000 का लालच देकर यह वीडियो बनवाया लेकिन बाद ने वह मुकर गया और 200 रुपए का ही भुगतान किया।
युवक ने अपना नाम अंकुर पंडित बताया है और बीजेपी आईटी सेल प्रमुख अमित मालवीय पर गंभीर आरोप लगाए है की यह इसी प्रकार अल्पसंख्यक समुदाय के खिलाफ पैसे देकर फर्जी प्रोपेगेंडा बनाते है। कभी हिंदू युवकों और महिलाओं को मुस्लिम वेसभूषा वाले कपड़े पहनाने के बाद CAA के शमर्थन में नारे लगवाते है तो कभी कुछ और
इसके बाद सोशल मीडिया पर अमित मालवीय की जमकर खिंचाई की का रही है।
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